scorecardresearch
 

नवरात्रि में पांचवें दिन होगी मां स्कंदमाता की पूजा, जानें सही पूजन विधि

तंत्र साधना में माता का सम्बन्ध विशुद्ध चक्र से है. ज्योतिष में इनका सम्बन्ध बृहस्पति नामक ग्रह से है. इस बार मां के पांचवे स्वरुप की उपासना 03 अक्टूबर को होगी.

Advertisement
X
स्कंद माता की पूजा से कार्तिकेय की पूजा स्वयं हो जाती है.
स्कंद माता की पूजा से कार्तिकेय की पूजा स्वयं हो जाती है.

नवदुर्गा का पांचवां स्वरुप स्कंदमाता का है. कार्तिकेय (स्कन्द) की माता होने के कारण इनको स्कन्दमाता कहा जाता है. अतः इनको पद्मासना देवी भी कहा जाता है. इनकी गोद में कार्तिकेय भी बैठे हुये हैं. अतः इनकी पूजा से कार्तिकेय की पूजा स्वयं हो जाती है. तंत्र साधना में माता का सम्बन्ध विशुद्ध चक्र से है. ज्योतिष में इनका सम्बन्ध बृहस्पति नामक ग्रह से है. इस बार मां के पांचवे स्वरुप की उपासना 03 अक्टूबर को होगी.

स्कंदमाता की पूजा से क्या विशेष लाभ हो सकते हैं?

- स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति सरलता से हो सकती है

- इसके अलावा अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट है तो उसका भी अंत हो सकता है

- स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करें तथा पीली चीज़ों का भोग लगाएं.

Advertisement

- अगर पीले वस्त्र धारण किये जाएं तो पूजा के परिणाम अति शुभ होंगे.

- इसके बाद जो भी प्रार्थना है, विशेषकर संतान सम्बन्धी , करें

विशुद्ध चक्र के कमजोर होने के क्या परिणाम होते हैं?

- विशुद्ध चक्र कंठ के ठीक पीछे स्थित होता है

- इसके कमजोर होने से वाणी की शक्ति कमजोर हो जाती है

- इसके कारण हकलाहट और गूंगेपन की समस्या भी होती है

- इससे कान नाक गले की समस्या भी हो सकती है

- इसके कमजोर होने से व्यक्ति सिद्धियां और शक्तियां नहीं पा सकता

Advertisement
Advertisement