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महालक्ष्मी व्रत के आखिरी दिन क्या होगी पूजन विधि? शुभ मुहूर्त भी जान लें

महालक्ष्मी व्रत (MahaLaxmi vrat 2020) पर भादो की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और गुरु के विशाखा नक्षत्र से धन योग के शुभ संयोग बन रहे हैं. चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे और सूर्य-बुध मिलकर बुधादित्य योग बना रहे हैं

महालक्ष्मी व्रत आज से शुरू महालक्ष्मी व्रत आज से शुरू
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महालक्ष्मी व्रत में ॐ महालक्ष्म्यै नम: मंत्र का जाप करें
  • महालक्ष्मी व्रत के आरंभ और समापन में बन रहा ये शुभ संयोग

MahaLaxmi vrat 2020  महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत बुधवार, 26 अगस्त यानी आज से हो चुकी है. गणेश चतुर्थी के चौथे दिन शुरू हो रहा महालक्ष्मी व्रत गुरुवार, 10 सितंबर को समाप्त होगा. इस दौरान मां लक्ष्मी की उपासना और व्रत इंसान को धनवान बना सकती है. आचार्य कौशल भूषण से जानते हैं कि महालक्ष्मी व्रत पर इस साल क्या संयोग बन रहा है और व्रत करते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना है.

इस बार भादो की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और गुरु के विशाखा नक्षत्र से धन योग के शुभ संयोग बन रहे हैं. चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे और सूर्य-बुध मिलकर बुधादित्य योग बना रहे हैं. गुरु अपनी ही धुन राशि में बैठकर लाभ स्थान की तरफ देख रहा है. इस दौरान मां लक्ष्मी की उपासना और व्रत आपको मालामाल कर सकते हैं.

कैसे लें व्रत का संकल्प?
बुधवार, 26 अगस्त को सुबह स्नान करने के बाद लाल वस्त्र धारण करें. कंबल के आसन पर बैठकर सामने मां लक्ष्मी की तस्वीर लगाएं. इसके बाद चावल, गेहूं या धान का ढेर लगाकर सुगंधित धूप या अगरबत्ती जलाएं. इसके बाद मां लक्ष्मी को प्रिय चीजें भेंट करें. मां लक्ष्मी को लाल वस्त्र, लाल फल, लाल चूड़ियां, लाल सिंदूर, लाल मिठाई या गुड़ का भोग लगाएं.

15 दिन कैसे रखेंगे व्रत?
अगले 15 दिन महालक्ष्मी व्रत करना बड़ा कठिन काम है, लेकिन आपको इसे नियमित और पूरे विधि-विधान के साथ करना होगा, तभी इसका फल मिलेगा. व्रत में रोजाना सुबह-शाम मां लक्ष्मी की आरती होगी. इस दौरान ॐ महालक्ष्म्यै नम: मंत्र का जाप करना होगा. खीर, मालपुआ या पूरी का भोग लगेगा. फिर वही प्रसाद आपको खाना है. आप चाहें तो व्रत के 15 दिन सिर्फ शाम के वक्त ही दूध या फल खाकर रह सकते हैं.

शुभ घड़ी में व्रत का समापन
महालक्ष्मी व्रत का समापन भी बहुत अच्छे दिन हो रहा है. गुरुवार, 10 सितंबर को गुरु का नक्षत्र भी अच्छा रहेगा. साथ ही इस दिन जितिया व्रत (बच्चों की रक्षा-उन्नति के लिए रखा जाने वाला व्रत) का भी शुभ अवसर रहेगा. व्रत के अंतिम दिन मां लक्ष्मी (Maa Laxmi puja) को खीर-पूरी का भोग लगाकर लोगों में उसे प्रसाद के रूप में बांट दें. शुक्ल पक्ष में आरंभ होने और श्राद्धों (Shradh 2020) में समाप्त होने से पितृपक्ष का आशीर्वाद भी मिलता है.

क्या है शुभ मुहूर्त?
महालक्ष्मी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh muhurt) सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा. इसके बाद शाम को 7 बजे से 9 बजे तक पूजा होगी. इसके बाद मां लक्ष्मी को भोग लगाकर आरती करें. ज्योतिषविद का कहना है कि जिस घर में मां लक्ष्मी की इन 15 दिनों में पूजा होती है, उस घर से वह कभी नहीं रूठती हैं.

 

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