scorecardresearch
 

नियुक्ति पत्र मिले, लेकिन नौकरी नहीं... राजस्थान में नए भर्ती कैलेंडर से बदलेगी 'चयनित बेरोजगारों' की किस्मत?

राजस्थान सरकार ने 2026 के लिए पूरे साल का भर्ती कैलेंडर जारी कर दिया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे युवाओं के लिए बड़ी सौगात बताया और सरकार ने दावा किया कि आने वाले एक साल में लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा. इस ऐलान के बाद कई जगह युवाओं ने सरकार का स्वागत भी किया, लेकिन इसी जयपुर में सरकारी दफ्तरों के बाहर एक कड़वी हकीकत सामने खड़ी है.

Advertisement
X
ये सभी नर्सिंग ऑफिसर कोरोना काल में फ्रंटलाइन वॉरियर थे. (Photo- ITG)
ये सभी नर्सिंग ऑफिसर कोरोना काल में फ्रंटलाइन वॉरियर थे. (Photo- ITG)

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने साल 2026 के लिए एक लाख नौकरियों का भव्य 'भर्ती कैलेंडर' जारी किया है. मुख्यमंत्री निवास पर इस घोषणा का युवाओं ने तालियों और स्वागत के साथ अभिनंदन किया. लेकिन इस चमक-धमक वाली तस्वीर के पीछे एक कड़वी सच्चाई भी है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पारदर्शिता और समयबद्ध नियुक्तियों का वादा किया है, लेकिन पुरानी भर्तियों के चयनित अभ्यर्थी आज भी 'बेरोजगार' बनकर दर-दर भटक रहे हैं. 

जयपुर की कड़ाके की ठंड में सरकारी दफ्तरों के ठीक बाहर सैकड़ों ऐसे सरकारी कर्मचारी धरने पर बैठे हैं जिनके हाथों में नियुक्ति पत्र तो है, लेकिन जॉइनिंग का कोई अता-पता नहीं है. नर्सिंग ऑफfसर दो साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं तो आईटीआई टीचर चार महीने से सरकार से बधाई पत्र लेकर पोस्टिंग के इंतजार में बैठे हैं.

कोरोना में फ्रंटलाइन वॉरियर थे धरने पर बैठे कर्मी

स्वास्थ्य विभाग के बाहर धरना दे रहे ये वही नर्सिंग ऑफिसर हैं, जिन्होंने साल 2023 में नर्सिंग ऑफिसर की परीक्षा दी थी. अक्टूबर 2023 में रिजल्ट आया, चयन हुआ, नियुक्ति की तैयारी पूरी थी, लेकिन जॉइनिंग से ठीक पांच दिन पहले आचार संहिता लागू हो गई. इसके बाद सरकार बदली और इनके सपने भी फाइलों में उलझ गए.

ये सभी नर्सिंग ऑफिसर कोरोना काल में फ्रंटलाइन वॉरियर थे. इन्होंने जान जोखिम में डालकर वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य सेवाएं दी थीं, जिसके बदले सरकार ने परीक्षा में 15 अंकों का बोनस दिया था. लेकिन नई सरकार ने जब कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को भी 15 अंकों का बोनस दे दिया, तो करीब 700 नर्सिंग ऑफिसर चयन सूची से बाहर हो गए. वह अब अपनी नियुक्ति के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं.

Advertisement

सात महीने के बच्चे को लेकर धरने पर बैठीं शांता

धरने पर बैठी शांता की गोद में सात महीने का बच्चा है. वह 500 किलोमीटर से ज्यादा दूर से जयपुर आई हैं. आजतक से बात करते हुए शांता बताती हैं कि उन्होंने बिछीवाड़ा तहसील के तलैया पीएचसी में कोरोना के दौरान काम किया. पति अहमदाबाद में मजदूरी करते हैं. नौकरी मिली थी, लेकिन अब नियुक्ति से मना किया जा रहा है. ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठकर शांता सरकार से सिर्फ अपना हक मांग रही हैं.

'स्वास्थ्य मंत्री के बदल गए सुर'

इन नर्सिंग ऑफिसर्स का कहना है कि वे भूख हड़ताल पर बैठे हैं. गले में माला पहनकर हाथ जोड़कर सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें नियुक्ति दी जाए, वरना उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा. दिसंबर 2024 में स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि फाइल मूव कर दी गई है और वित्त विभाग से मंजूरी मिलते ही पोस्टिंग दी जाएगी, लेकिन अब मंत्री का कहना है कि नियमों के मुताबिक ही कार्यवाही होगी.

पीएम मोदी से मिला 'बधाई पत्र', पर नहीं मिली नौकरी

यह लाचारगी सिर्फ स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है. जयपुर में ही आजीविका मिशन के तहत चयनित जूनियर इंस्ट्रक्टर भी धरने पर बैठे हैं. 1544 पदों के लिए करीब तीन हजार आईटीआई संस्थानों में पढ़ाने के लिए इनका चयन हुआ था. मार्च 2024 में फॉर्म भरे गए, मई 2025 में रिजल्ट आया और सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन्हें बधाई पत्र भी दिलाया गया.

Advertisement

चयनित इंस्ट्रक्टरों का कहना है कि उन्होंने निजी नौकरियां छोड़ दीं, कुछ ने शादी टाल दी, इस भरोसे में कि अब सरकारी नौकरी मिल जाएगी. लेकिन महीनों बीतने के बावजूद पोस्टिंग नहीं मिली. विभागीय अधिकारी कहते हैं कि फाइल मंत्री के पास है, जबकि मंत्री का कहना है कि अभी स्क्रूटनी चल रही है.

चयनित इंस्ट्रक्टर विकास सिसोदिया और जयप्रकाश बताते हैं कि सरकारी नौकरी के इंतजार में कई लोगों ने प्राइवेट जॉब छोड़ दी. कइयों की शादियां अटकी हुई हैं. विभाग के कमिश्नर कहते हैं कि फाइल मंत्री जी के पास है, जबकि कौशल राज्य मंत्री के.के. विश्नोई का कहना है कि बाहरी राज्यों की मार्कशीट की जांच (स्क्रूटनी) चल रही है, उसके बाद ही पोस्टिंग देंगे.

अधिकारियों पर फोड़ा ठीकरा, जॉइनिंग डेट की मांग

आंदोलनकारी युवाओं का आरोप है कि सरकारें बदल जाती हैं, लेकिन विभागों में बैठे अधिकारी वही रहते हैं. ये अधिकारी किसी न किसी तकनीकी पेंच में भर्ती को लटकाए रखते हैं. उनका कहना है कि सरकार नए-नए भर्ती कैलेंडर जारी कर रही है, लेकिन पुरानी भर्तियों का कोई कैलेंडर नहीं है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement