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कोरोना ने छीना पिता का साया, गांव वालों ने करवाई मुस्लिम बेटी की शादी, कन्यादान में दिया ढेरों सामान

जयपुर के प्रतापपुर गांव में एक मुस्लिम बेटी की शादी गांव के सभी लोगों ने मिलकर करवाई उसके कन्यादान में एक लाख 45 हजार रुपए दिए गए. दरअसल कोरोना के समय बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया था और परिवार के हालात बदतर थे.

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गांव वालों कार्रवाई मुस्लिम बेटी की शादी
गांव वालों कार्रवाई मुस्लिम बेटी की शादी

देश में राजनीतिक पार्टियां कितना भी हिंदू मुसलमान करने का प्रयास करें. लेकिन लोगों के दिलों में आज भी एक दूसरे के प्रति प्यार मौजूद है. इसका जीता जागता उदाहरण जयपुर जिले के जोबनेर के समीप प्रतापपुर गांव में देखने को मिला. जहां एक मुस्लिम बेटी की शादी गांव के सभी लोगों ने मिलकर करवाई और उसके कन्यादान में एक लाख 45 हजार रुपए दिए गए. शादी में मौजूद मेहमान व बारातियों ने गांव के लोगों की इस पहल की जमकर तारीफ की. इस मामले की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है.

जयपुर जिले के जोबनेर के समीप प्रतापपुरा गांव में एकमात्र मुस्लिम समुदाय के रफीक शाह का 2021 में कोरोना के चलते निधन हो गया था. परिवार में रफीक की मां, पत्नी व कुल पांच बच्चे हैं. उनकी जिम्मेदारी रफीक की पत्नी के कंधों पर आ गई. घर की आर्थिक हालत खराब है. रफीक के आकस्मिक निधन के बाद परिवार के लिए दो वक्त की रोटी भी मुश्किल हो गई. इस बीट 16 जून को रफीक की बड़ी बेटी मुस्कान बानो का निकाह छीर निवासी आमीन मोहम्मद के साथ हुआ.

परिवार में शादी के खर्च व विवाह को लेकर प्रतापपुरा गांव के स्थानीय युवाओं ने सामाजिक पहल में आगे होकर मुहिम चलाई. युवाओं के साथ- साथ आस पास के गांवों केलोग, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीणों ने महज चार दिनों में ही मैसेज ग्रुप की मदद से करीबन एक लाख 45 हजार रुपए की राशि एकत्रित की. साथ ही ग्रामीणों ने अपने परिवार की तरह विवाह के कार्यों को संपन्न करवाया.

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गांव के युवाओं ने शादी  का काम करवाया और पूरा गांव सभी रस्मों में शामिल हुआ. ग्रामीणों ने मुस्कान बानो की मां सलमा बानो के हाथों में थाली में कन्यादान के पैसे दिए. इस शादी में बेटी के माता की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे. इसके अलावा ग्रामीणों की तरफ से घर गृहस्थी का सामान जैसे कपड़े, अटैची, बर्तन,सिलाई मशीन, पंखे, आर्टिफिशियल गहने, बेडशीट, सिंगार बॉक्स, बाल्टी व हैंडबैग सहित कई आवश्यक वस्तुएं दी गईं.

सभी ने मिलकर बेटी की शादी को यादगार बनाया.एक ग्रामीण ने बताया की बिटिया की शादी में आर्थिक मदद के लिए व्हाट्स अप ग्रुप बनाया गया. इसमें ग्रामीणों व युवा साथियों के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं व अन्य ने मुहिम में शामिल होकर महज तीन दिनों में यह राशि एकत्रित की है. शादी में आने वाले लोगों ने गांव के लोगों के इस पहल की जमकर तारीफ की. तो वहीं यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.
 

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