scorecardresearch
 

वंदे मातरम्

ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप: जब 1971 के युद्ध में पाक बख्तरबंद पोस्ट्स को IAF ने मिट्टी में मिलाया

27 नवंबर 2021

भारत पाकिस्तान को किसी भी युद्ध में हमेशा से हराने में सक्षम रहा है. लेकिन 1971 में लक्ष्य केवल जीत नहीं था. ब्लकि तेजी से जीत था. ताकि अंतरराष्ट्रीय बीच-बचाव आने से पहले युद्ध का निर्णय आ जाए. आज तक की वरिष्ठ एंकर श्वेता सिंह अपने खास कार्यक्रम 'वंदे मातरम' का एक और संस्करण लेकर आई हैं. इस संस्करण में अंतरराष्ट्रीय सैन्य इतिहास के सबसे हैरतअंगेज लड़ाई की कहानी के बारे में श्वेता विस्तार से बताएंगी. देखें वीडियो.

देखें 1971 युद्ध में कैसे भारतीय सेना ने कैसे चूर किया था पाकिस्तान का गुरूर

20 नवंबर 2021

1947 में जब पाकिस्तान की भारत के साथ पहली लड़ाई की शुरूआत हुई तो वो युद्ध लगभग डेढ़ साल तक चला. 1965 महीने में जब युद्ध हुआ तो 7 महीने तक चला था. 1999 में जब करगिल में हुआ तो लगभग तीन महीना चला. लेकिन, 1971 का युद्ध केवल 13 दिन में खत्म हो गया. यूं तो हर युद्ध में पाकिस्तान को पटखनी दी गई थी. लेकिन, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए गए. पूर्वी पाकिस्तान के जनता को न्याय मिला था. पाकिस्तान को कभी न भूल पाने वाला सबक भारत ने दिया था. दरअसल, जब कोई युद्ध इतना निर्णायक होता है तो उसके पीछे कुछ ऐतिहासिक निर्णय होते हैं. इस वीडियो में देखें ऐसे ही लड़ाई की कहानी. देखें वीडियो.

India-PAK War: 1971 युद्ध के पहले दिन की लड़ाई की कहानी, देखें वंदे मातरम

13 नवंबर 2021

1971 में भारत पूरी कोशिश कर रहा था कि पाकिस्तान के साथ युद्ध को टाला जा सके. लेकिन पाकिस्तान ने भारतीय सेना में अतिक्रमण करना शुरू कर दिया. भारत ने युद्ध को टालने की पूरी कोशिश की लेकिन युद्ध की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी. जिस दिन पाकिस्तान ने भारत की पश्चिमी सीमा से लगते हुए एयरबेस पर हमला किया, उस समय हिंदुस्तान ने पूर्वी मोर्चे को पूरी तरह से खोल दिया. आज वंदे मातरम में 1971 युद्धे के पहले दिन की लड़ाई की कहानी देखें

PAK के मनोबल को चकनाचूर करने वाला युद्ध, देखें बसंतर के जंग की कहानी

30 अक्टूबर 2021

भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के समय भारतीय एवं पाकिस्तानी सेनाओं के बीच पश्चिमी सीमा पर बसन्तर का युद्ध लड़ा गया एक महत्त्वपूर्ण युद्ध था. यह युद्ध बसन्तर नदी के क्षेत्र में हुआ था जो पाकिस्तान में है. इस भयंकर युद्ध में भारतीय सैनिक विजयी हुए थे. यह एक ऐसा युद्ध था जिसमें कई सूरमाओं ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण त्‍याग दिए. लेकिन दुश्मन के सामने घुटने नहीं टेके थे. इस पर देखें वंदे मातरम.

250 गोरखाओं के सामने 4000 पाक सैनिकों का सरेंडर, देखें सिलहट की शौर्यगाथा

23 अक्टूबर 2021

हथियार हो या न हो, संख्या हो या न हो, हौसला तो है. कभी-कभी वीरता की कहानियां ही दुश्मन के दिलों में खौफ भरने के लिए काफी होती हैं. कभी-कभी रुतबा ही परिचय होता है. आज वंदे मातरम् के इस एपिसोड में 1971 के युद्ध की एक ऐसी ही कहानी बताएंगे, जब भारतीय सैनिकों ने संख्या में खुद से कहीं ज्यादा पाकिस्तानियों को शिकस्त दी थी. ये लड़ाई थी सिलहट की. ऐसा पहली हुआ था, जब भारतीय सेना ने एक ऑपरेशन में अपने सैनिकों को हैलीकॉप्टर के जरिए दुश्मन की जमीन में उतारा था. 1971 की ये पहली ऐसी लड़ाई थी जब पाकिस्तान के सरेंडर का नमूना देखने को मिला था. देखिए ये एपिसोड.

जब 120 भारतीय सैनिकों ने 2000 PAK सैनिकों को चटाई थी धूल, देखें लोंगेवाला से वंदे मातरम

16 अक्टूबर 2021

1971 को India-Pakistan के बीच हुए जंग में केवल 120 भारतीय सैनिकों ने 2000 पाकिस्तानियों को धूल चटा दी थी. इस पूरे युद्ध में लोंगेवाला पोस्ट से दुश्मन की चाल पर नजर रखी जा रही थी. पाकिस्तान को इस लड़ाई में ऐसी मात मिली थी कि जनरल नियाजी की अगुवाई में ढाका स्टेडियम में करीब 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पड़ गए थे. हालांकि, भारत ने दया दिखाते हुए 1972 के शिमला समझौते के तहत इन सैनिकों को छोड़ दिया था. देश के बहादुर सिपाहियों ने किस तरह पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्तान को शिकस्त दी. देखें वंदे मातरम.

CIJW स्कूल में भारतीय सैनिकों को कैसे दिया जाता है प्रशिक्षण? देखें

20 जून 2021

CIJWS यानी काउंटर इंसरजेंसी और जंगल वॉरफेयर स्कूल में भारतीय सैनिकों इस प्रकार की ट्रेनिंग दी जाती है जिससे सैनिक जंगलों में दुश्मनों का सामना आसानी से कर सके. यहां दी जाने वाली ट्रेनिंग दुनिया की सबसे कठिन प्रशिक्षण में से एक मानी जाती है. इसके अलावा सैनिकों की फिटनेस लेवल बढ़ सके, इसके लिए तमाम तरह के कठिन दौर कराई जाती है. इन दौड़ों में दिमाग, फिटनेस और अनुशासन तीनों का प्रशिक्षण एक साथ हो जाता है. देखें वीडियो.

देखें, 1971 की जंग में भारत की शानदार जीत की कहानी

16 दिसंबर 2020

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी. भारतीय सेना के जवानों के सामने पाकिस्तानी सेना ने बिना शर्त सरेंडर किया था. पाकिस्तान के जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी के नेतृत्व में लगभग 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था. शिमला समझौते के हिस्से के रूप में उन्हें वापस लौटाया गया था. इस युद्ध के बाद ही पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश अलग देश बना. पूर्वी पाकिस्तान आजाद होने के बाद यह नया देश अस्तित्व में आया. आज वंदे मातरम में हम आपको सुनाएंगे 1971 की जंग में भारत की शानदार जीत की कहानी.

कश्मीर में आतंक पर नकेल, पाकिस्तान का हार्ट फेल!

06 दिसंबर 2020

पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में लगातार घुसपैठ करने की कोशिश में जुटा रहता है. कभी नीलम वैली तो कभी लीपा वैली में लॉन्चपैड बनाने की कोशिश भी करता है. सीमावर्ती इलाकों में सेना की चुनौतियां बेहद ज्यादा होती हैं. ग्रामीण इलाकों में पाकिस्तान की सीज फायर से परेशान लोगों को मजबूरन आर्मी के ठिकानों में शरण लेनी पड़ती है. वहीं घाटी में डीडीसी चुनाव में तीन चरण की वोटिंग जब खत्म हुई पाकिस्तान को बौखलाहट होने लगी. कश्मीर की इच्छा शक्ति से पाकिस्तान परस्त है. आतंक परस्त पाकिस्तान ने बारूदों की ढेर भारत में भेजने की कोशिश की थी लेकिन उनका मिशन फेल हो गया. राष्ट्रीय राइफल्स ने पूरे घाटी को फिर से सजा दिया है. देखिए जम्मू कश्मीर की बदलती तस्वीर की कहानी, श्वेता सिंह के साथ.