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वंदे मातरम्

देखें, 1971 की जंग में भारत की शानदार जीत की कहानी

16 दिसंबर 2020

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी. भारतीय सेना के जवानों के सामने पाकिस्तानी सेना ने बिना शर्त सरेंडर किया था. पाकिस्तान के जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी के नेतृत्व में लगभग 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था. शिमला समझौते के हिस्से के रूप में उन्हें वापस लौटाया गया था. इस युद्ध के बाद ही पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश अलग देश बना. पूर्वी पाकिस्तान आजाद होने के बाद यह नया देश अस्तित्व में आया. आज वंदे मातरम में हम आपको सुनाएंगे 1971 की जंग में भारत की शानदार जीत की कहानी.

कश्मीर में आतंक पर नकेल, पाकिस्तान का हार्ट फेल!

06 दिसंबर 2020

पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में लगातार घुसपैठ करने की कोशिश में जुटा रहता है. कभी नीलम वैली तो कभी लीपा वैली में लॉन्चपैड बनाने की कोशिश भी करता है. सीमावर्ती इलाकों में सेना की चुनौतियां बेहद ज्यादा होती हैं. ग्रामीण इलाकों में पाकिस्तान की सीज फायर से परेशान लोगों को मजबूरन आर्मी के ठिकानों में शरण लेनी पड़ती है. वहीं घाटी में डीडीसी चुनाव में तीन चरण की वोटिंग जब खत्म हुई पाकिस्तान को बौखलाहट होने लगी. कश्मीर की इच्छा शक्ति से पाकिस्तान परस्त है. आतंक परस्त पाकिस्तान ने बारूदों की ढेर भारत में भेजने की कोशिश की थी लेकिन उनका मिशन फेल हो गया. राष्ट्रीय राइफल्स ने पूरे घाटी को फिर से सजा दिया है. देखिए जम्मू कश्मीर की बदलती तस्वीर की कहानी, श्वेता सिंह के साथ.

भारत-PAK के बीच महज 500 मीटर का फासला, देखें कहां है कांटेदार तारों से बनी LoC

21 नवंबर 2020

Line of Control, यानि एक ऐसी रेखा जो दुश्मन को उसकी हद बताती हो. LoC पर तैनात जवानों के सामने न जाने कितनी चुनौतियां होती हैं. जिनका सामना करके वो देश की रक्षा करने में जुटे रहते हैं. लेकिन उन पर सिर्फ चुनौतियां ही नहीं बल्कि जिम्मेदारियां भी हैं. देश की रक्षा की जिम्मदारी. आइये आज LoC से ग्राउंट रिपोर्ट में दिखाते हैं. जबाजों की जिंदगी. देखें

जानिए क्यों भारत के इस रेजीमेंट से कांपता है चीन?

31 अक्टूबर 2020

भारतीय सेना की ऐसी एक टुकड़ी है, जिसे जीत का जश्न मनाना नहीं आता, बलिदान उसके लिए उत्सव है, अभिमान की पगड़ी सजाए, कड़ा कलाई में लगाए, आदर्शों की राह पर सवार ये भारत के संत सिपाही हैं. चिड़ियों से मैं बाज लड़ाऊं वाले सिद्धांत को जीने वाले मां भारती के ये वीर सपूत दुश्मनों को हमेशा खटकते हैं. बात सिख रेजीमेंट के जवानों की हो रही है. इस रेजीमेंट के हर सिपाही के मन में ऐसा जोश होता है, जो सवा लाख पर भारी पड़ जाए. ये वो योद्धा हैं, जिन्होंने आजाद हिंदुस्तान के सफर पर पहला कदम बढ़ाया था. देखिए वंदे मातरम का ये खास कार्यक्रम, श्वेता सिंह के साथ.

वंदे मातरम: नक्सलियों से कैसे जूझते हैं कोबरा कमांडोज?

10 अक्टूबर 2020

केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स(सीआरपीएफ) के कोबरा कमांडोज नक्सलियों के लिए काल कहे जाते हैं. कोबरा कमांडोज की अलग-अलग बालियंस की अलग-अलग खासियते हैं. जंगलों के बीच जाल बिछाकर रहने वाले शौर्यवान कमांडोज को हमेशा नक्सलियों से खतरा बना रहता है. घने जंगलों में ये बिल्कुल भी नहीं पता होता कि नक्सलियों का हाइड आउट कहां है, किस जगह वे छिपकर बैठे होते हैं. उनका निशाना सुरक्षाबल होते हैं, जिनकी राहों में मौत बनकर बैठे रहते हैं. ऐसे में कोबरा कमांडोज की नजरें नक्सलियों पर टिकी रहती हैं. कोबरा कमांडोज के 205वीं बटालियन की खासियत है कि ये गलती दोहराते नहीं और दुश्मन को घात लगाने का कोई मौका नहीं देते. देखिए वंदे मातरम, श्वेता सिंह के साथ.

घरों में छिपे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन पूरा करने में माहिर है QAT

29 अगस्त 2020

जिनके लिए इंटरनेट का अधिकार दुनिया में सबसे बड़ा है, इंसानी अधिकारी की यह कहानी जरूर सुनिए. जो आज भी धारा 370 के पुनर्जन्म की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वे आतंक की तिल-तिल मौत की तस्वीर जरूर देखें. जो आजादी के झूठे नारे का नैरेटिव ढूंढते हैं. वो वर्दी की बंदिशों को भी जरूर समझ लें. देश के दुश्मनों की हर हरकत का ये जवान बिजली के झटके से काम तमाम कर देते हैं. देश की सुरक्षा पर आने वाली जांच को नाकाम करने के लिए ये अपने प्राण तक दांव पर लगा देते हैं. आज हम सीआरपीएफ की क्विक एक्शन टीम से आपकी मुलाकात करवाने वाले हैं. देखिए वंदेमातरम, श्वेता सिंह के साथ.

ऊंचे पहाड़ों पर कैसे दुश्मन को हराती है भारतीय सेना, देखें HAWS की ट्रेनिंग

22 अगस्त 2020

भारतीय सेना हर तरह के पहाड़ी युद्ध में फतह हासिल कर सकती है. ये बात चीन की रिपोर्ट में कही गई है. देश में आर्मी का हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल है, पूरे देश की बटालियन के जवान यहां ट्रेनिंग लेने आते हैं, इस ट्रेनिंग में सिखाया जाता है. कैसे बर्फ पर चलना है, और कैसे बर्फीले तूफानों का सामना करना है और कैसे बर्फबारी के बीच होने वाली घुसपैठ पर भी ध्यान रखना है. और ऊंचे ऊंचे पहाड़ों, चट्टानों में दुश्मन से लड़ कर फतह हासिल करनी है. हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल यानि HAWS में ट्रेनिंग लेकर अलग अलग सैनिक अपनी रेजिमेंट को ट्रेन्ड करते हैं. सैनिक ऐसे रास्तों से दुश्मन तक पहुंचते हैं. जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. इस पर देखें वंदे मातरम का ये खास एपिसोड.

वंदे मातरम्: क्षमता अकूत, निशाना अचूक, खास हैं वायुसेना के ये अटैक हेलिकॉप्टर

15 अगस्त 2020

सबसे शक्तिशाली कौन है, वो जिसके पास हथियार हैं या हथियार चलाने का हुनर. जीत किसकी होती है, वो जो मौका देखते आक्रमण कर दे या उसकी जो शक्ति का भी शांति के लिए ही प्रयोग करता है, उसी की होती है जयजयकार. उसी की सबसे ताकतवर है ललकार. इनके नाम में ही है विजय की हुंकार. भारत की किसी सीमा पर इस वक्त युद्ध नहीं चल रहा लेकिन इस संकट काल को युद्ध काल न कहे तो क्या कहें. पर देश सर्तक है, सजग है. ये भारत का दृढ़ आत्मविश्वास है. ये हमारे अटल संघर्ष का स्वाभिमान है. अपनी धरती का इंच भर भी न छोड़ने का अडिग निर्णय है. देखिए आजतक की खास पेशकश वंदे मातरम्.

देखें भारतीय सेना में नए योद्धाओं के तैयार होने की कहानी

13 जून 2020

देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पासिंग आउट परेड चल रही है. इस बार कोरोना को देखते हुए परेड का आयोजन बेहद सादगीपूर्ण तरीके से किया जा रहा है. इस बार परेड में पैरेंट्स शामिल नहीं हो पाए लेकिन आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे और तमाम दूसरे अधिकारी इस जिम्मेदारी को निभाएंगे. इस बार ये पहला मौका है जब पास आउट होने के बाद अधिकारी सीधे अपनी यूनिट में तैनात हो जाएंगे. देखें भारतीय सेना में योद्धाओं के तैयार होने की कहानी.