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खबरदार: बंगाल में दीदी विरोधी 'बचाओ-बचाओ' कर रहे?

ऐसी डेमोक्रेसी आप ढूंढते रह जाओगे. जहां चुनाव जीतने वाले कैंडिडेट को जान बचाने के लिए छुपना पड़ता है. राजनैतिक हिंसा की परंपरा को पूरी ताकत से आगे बढ़ाने में लगे पश्चिम बंगाल का लोकतंत्र अब उस जगह पर पहुंच चुका है. जहां राजनैतिक विरोधियों के लिए चुनाव जीतने के बाद अपने गांव जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही है. फिर भी खतरे में लोकतंत्र नहीं है. केवल उन राजनैतिक विरोधियों की जान ही खतरे में है. जिन्होंने सत्ताधारी पार्टी को पंचायत चुनाव में चुनौती देने की हिम्मत दिखाई.

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