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खबरदार

QuallCom, Adobe, First Solar.. देखें किन कंपनियों के CEOs से मिले मोदी

23 सितंबर 2021

पीएम मोदी अपनी चार दिवसीय यात्रा पर अमेरिका पहुंच चुके हैं. पीएम मोदी ने आज अमेरिका की टॉप 5 कंपनियों के CEOs से मुलाकात की है, जिसमें दो CEOs भारतीय अमेरिकी हैं. पीएम मोदी ने CEO Meet की शुरुआत QuallCom (क्वालकोम) के सीईओ क्रिस्टियानो आर अमोन के साथ बैठक से की. QuallCom एक मल्टीनेशनल फर्म है. जो सेमीकंडक्टर्स, सॉफ्टवेयर और वायरलेस टेक्नोलॉजी सर्विस पर काम करती है. प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से बताया गया है कि QuallCom के सीईओ ने भारत के साथ 5जी और अन्य क्षेत्रों में काम करने की इच्छा जताई है. देखें

मोदी-बाइडेन की मुलाकात में क्या होगी बात? देखें खबरदार

22 सितंबर 2021

जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद ये पीएम मोदी की पहली अमेरिका यात्रा है. मोदी सितंबर 2019 में आखिरी बार अमेरिकी दौरे पर गए थे. पीएम की पिछली बड़ी विदेश यात्रा नवंबर 2019 में हुई थी, जब वो ब्राजील गए थे. इसके बाद कोरोना महामारी की वजह से वो किसी विदेश यात्रा पर नहीं जा पाए थे. हालांकि इस साल मार्च में वो बांग्लादेश के संक्षिप्त दौरे पर जरूर गए थे. यानी करीब 22 महीनों के बाद पीएम मोदी की ये पहली बड़ी विदेश यात्रा भी है. जिसमें पीएम मोदी के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद हैं. देखें खबरदार

महंत नरेंद्र गिरि की सुसाइड वाले एंगल का विश्लेषण, देखें खबरदार

21 सितंबर 2021

महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट इस केस की वो चाबी है. जिससे बहुत सारे सवालों के ताले खुल सकते हैं. इस मामले की जांच को निश्चित दिशा मिल सकती है. इस सुसाइड नोट के शब्दों पर जब आप गौर करेंगे तो आपको लगेगा कि लिखने वाला कितना विचलित है, कितना परेशान है क्योंकि वो बार बार एक ही बात, एक ही आघात, एक ही परेशानी की बात कर रहे हैं और कुछ चुने हुए लोगों के नाम ले रहे हैं. देखिए महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट का विश्लेषण.

महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में आनंद गिरी और 2 अन्य लोगों के नाम आए सामने

20 सितंबर 2021

पुलिस ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच के सिलसिले में उनके शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से हिरासत में ले लिया है. आज महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. महंत नरेंद्र गिरी देश के बड़े और प्रभावशाली संतों में से थे. ऐसे में उनकी संदिग्ध मौत ने हर किसी को चौंका दिया है. उनकी मौत प्रयागराज के बाघंबरी मठ में हुई है. महंत नरेंद्र गिरी का शव उनके कमरे में नायलॉन की रस्सी से लटका हुआ पाया गया था. पुलिस के मुताबिक उनके कमरे से एक 6-7 पन्ने का सुसाइड नोट बरामद किया गया है. सुसाइड नोट के मुताबिक नरेंद्र गिरी ने लिखा है कि मैं सम्मान से जिया हूं और अपमान से नहीं जी पाउंगा इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं. पुलिस के मुताबिक, सुसाइड नोट में उनके एक शिष्य आनंद गिरी पर मानसिक तौर पर परेशान करने का आरोप लगाया है. सुसाइड नोट में कई अन्य नाम हैं लेकिन अभी उनका खुलासा नहीं हुआ है. पुलिस के मुताबिक सुसाइड नोट में आनंद के अलावा 2 अन्य लोगों पर आरोप हैं. देखें खबरदार का ये एपिसोड.

खबरदार: कांग्रेस ने चरणजीत चन्नी को बनाया पंजाब का नया 'कैप्टन'

19 सितंबर 2021

24 घंटे की कयासबाजियों के बाद आखिरकार कांग्रेस ने पंजाब में अपना नया मुख्यमंत्री चुन लिया. चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नये मुख्यमंत्री होंगे. पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने ट्वीट करके चरणजीत सिंह चन्नी के नाम की घोषणा की. और बतायाकि कांग्रेस विधायक दल ने सर्वसम्मति से चन्नी को अपना नेता चुन लिया है. हालांकि, चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री चुना जाना भी अप्रत्याशित रहा. अबतक बीजेपी के बारे में कहा जाता था कि जिन नामों की चर्चा होती है. वो कभी मुख्यमंत्री नहीं बनता. अब पंजाब में कांग्रेस ने भी कुछ ऐसा ही किया है. देखें वीडियो.

खबरदार: मुख्यमंत्री ने दिया इस्तीफा, पंजाब कांग्रेस में विवाद सुलझा या उलझा?

18 सितंबर 2021

पंजाब में अगामी विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्‍यपाल ने उनका इस्‍तीफा मंजूर कर लिया है. कैप्टन ने इस्तीफा देने के बाद मीडिया के साथ वार्ता के दौरान कहा- वो अपमानित महसूस कर रहे थे. हालांकि, कैप्टन ने अपने अगले कदम को लेकर सस्पेंस रखा है. लेकिन, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को डेंट लगना लगभग तय है. क्योंकि कैप्टन कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं. और करीब कुल साढ़े नौ साल पंजाब में मुख्यमंत्री रह चुके हैं. देखें वीडियो.

एससीओ के मंच से तालिबान के कट्टर समर्थकों को पीएम मोदी का मैसेज

17 सितंबर 2021

आज शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की बैठक को पीएम मोदी ने वर्चुअली संबोधित किया.पीएम मोदी ने तालिबान सरकार के कट्टर सहयोगी बन चुके चीन और पाकिस्तान का नाम लिये बगैर तीखे हमलों से उसे घायल कर दिया. पीएम मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग की मौजूदगी में कट्टरपंथ के खिलाफ एससीओ के मंच से जो मैसेज दिया है.वो तालिबान सरकार पर भारत सरकार का आधिकारिक स्टैंड भी है. देखें वीडियो.

TIME लिस्ट पर बरादर की 'प्रभावशाली' छाप! देखें खबरदार

16 सितंबर 2021

तालिबान सरकार का गुमशुदा उप-प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर जिंदा है और उसका नाम TIME मैगजीन के सौ सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में दर्ज पाया गया है. टाइम मैगजीन ने 2021 में दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की जो लिस्ट जारी की है. उसमें शामिल ग्लोबल नेताओं की लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन हैं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं और साथ में है तालिबान सरकार का उप-प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर, जिसके नाम ने सभी को हैरान-परेशान कर दिया है. क्योंकि भले ही दुनिया ने तालिबान सरकार को अभी तक मान्यता ना दी हो लेकिन TIME मैगजीन ने मुल्ला बरादर को दुनिया पर छाप छोड़ने वाले नेता के तौर पर मान्यता दे दी है. ज्यादा जानकारी के लिए देखें खबरदार.

अफगानिस्तान में तालिबान राज का कैसा कटा एक महीना, खबरदार में देखें विश्लेषण

15 सितंबर 2021

15 अगस्त से आज 15 सितंबर तक तालिबान के राज में अफगानिस्तान का ये एक महीना चिंताओं, आशंकाओं और तकलीफों के बीच गुज़रा है. तालिबान शब्द ही अफगानिस्तानियों के लिए अत्याचार का पर्यायवाची बना हुआ है. लेकिन इस एक महीने में तालिबानियों का भी बजट बिगड़ गया है. क्योंकि आतंकवादी संगठन चलाना एक बात है और एक देश को चलाना एकदम दूसरी बात है. तालिबानी लड़ाके चाहे कितने ही वफादार हों लेकिन भूखे पेट अपने आतंकी संगठन को कब तक सेवा देते रहेंगे. वहां आम लोगों की हालत बुरी है तो आतंकवादियों को भी आटे दाल का भाव समझ में आ रहा है. देखिए खबरदार के इस एपिसोड में पूरा विश्लेषण.

क्या है पीएम मोदी का यूपी वाला वोट गणित, खबरदार में देखें विश्लेषण

14 सितंबर 2021

यूपी चुनाव में लाइट, कैमरा के बाद एक्शन का फेज शुरु हो गया है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रंगमंच पर उतरे. अपने पूरे अंदाज और आक्रामकता के साथ और इसके लिए उन्होंने जमीन चुनी अलीगढ की. अलीगढ में बीजेपी ने आज अपने चुनावी शक्ति प्रदर्शन वाली जनसभा की. यूं तो ये कार्यक्रम जाट नायक राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर नए विश्वविद्यालय के शिलान्यास का था. लेकिन इसी बहाने बीजेपी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति का तोड़ निकालने की कोशिश की है और साथ के साथ योगी सरकार के कामकाज का प्रमोशन किया है. पीएम मोदी ने कैसे यूपी चुनाव का एजेंडा सेट करने वाला ये चुनावी शो किया. इसे खबरदार के इस एपिसोड में समझिए.

28 साल के पुलिसकर्मी की पीठ पर आतंकी वार, कुपवाड़ा में आंसु, गुस्सा और आक्रोश

13 सितंबर 2021

एक आतंकवादी दोपहर में श्रीनगर की एक व्यस्त सड़क पर आता है और सिर्फ 28 साल के एक युवा सब इंस्पेक्टर पर ताबड़तोड़ गोलियां चला देता है. इस घटना के वीडियो ने देश के तमाम लोगों को झकझोर कर रख दिया और आतंकियों की कायरता के सीसीटीवी सबूत दे दिए. आमतौर पर ऐसी खबरें हेडलाइन बनकर आंखों के सामने से गुज़र जाती हैं. लेकिन हेडलाइन के पार जाकर पुलिसकर्मी के परिवार तक पहुंचेंगे तो आपको एहसास होगा कि एक आतंकवादी हमला कैसे परिवार को अंदर ही अंदर तोड़कर रख देता है और आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना कितना ज़रूरी है. देखिए खबरदार में इसका पूरा विश्लेषण.

खबरदार: गुजरात सीएम के लिए बीजेपी ने भूपेंद्र पटेल को ही क्यों चुना, देखें विश्लेषण

12 सितंबर 2021

गुजरात में बीजेपी ने सीएम उम्मीदवार की चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है. अपना तुरूप का इक्का तय कर लिया है. 2022 के चुनाव में बीजेपी के ट्रंप कार्ड भूपेंद्र पटेल होंगे, जिनके नाम की आज गांधीनगर में घोषणा की गई. बीजेपी ने उन्हें विजय रुपाणी की जगह गुजरात का नया सीएम चुना है और इसी के साथ ये भी तय कर दिया है कि पार्टी अगला चुनाव उन्हीं के चेहरे पर लड़ेगी. भूपेंद्र पटेल के केस में भी बीजेपी ने सबकों चौंकाया. वो कहीं से रेस में नहीं थे, उनके नाम की कोई चर्चा तक नहीं थी. लेकिन फाइनल बाजी के वही विजेता बने. बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने सेलेक्शन को इतना सीक्रेट रखा कि किसी गेसवर्क की गुंजाइश ही नहीं रही. सेलेक्शन का स्टाइल कुछ वैसा ही था जैसे हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर का नाम तय करते वक्त दिखा या फिर यूपी में योगी आदित्यनाथ का नाम तय करते वक्त नजर आया. उत्तराखंड में भी बीजेपी का ये सरप्राइज एलीमेंट जारी रहा था और अब गुजरात में भी बीजेपी उस फंडे पर कायम दिखी. देखिए खबरदार का ये एपिसोड.

6 महीने में 4 मुख्यमंत्रियों को BJP ने दिखाया बाहर का रास्ता, देखें खबरदार

11 सितंबर 2021

चाल, चरित्र और चेहरा, बीजेपी की सियासत के ये तीन सूत्र रहे हैं लेकिन अब लगता है कि बीजेपी को चेहरे से चमत्कार पर ऐतबार ज्यादा होने लगा है. बीजेपी के चेहरा बदलो वाली रणनीति का ताजा शिकार हुए हैं विजय रूपाणी. गुजरात के सीएम के तौर पर आज रूपाणी का गेम ओवर हो गया और वो भी चुनाव से पहले हटाए जाने वाले मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में शामिल हो गए. मार्च से सितंबर तक यानी 6 महीने में 4 मुख्यमंत्रियों को बीजेपी लीडरशिप ने बाहर का रास्ता दिखाया है. देखें खबरदार.

9/11 हमले की बरसी के दिन शपथग्रहण का जश्न मनाएगा तालिबान? देखें खबरदार

10 सितंबर 2021

कल जब अमेरिका 9/11 आतंकवादी हमले की बरसी पर शोक मनाएगा तब हो सकता है कि तालिबान अफगानिस्तान में बीस साल बाद दोबारा सरकार बनाने का जश्न मनाए. ऐसी खबरें भी आई हैं कि तालिबान ने 9/11 अटैक की बरसी पर अपनी सरकार के शपथ ग्रहण करने की तैयारी कर ली है. अगर ये सही है तो तालिबान ने ये प्लान अमेरिका के जख्मों को कुरेदने के लिए ही बनाया होगा. 9/11 अटैक के 20 साल के बाद जब अफगानिस्तान में दोबारा तालिबानियों की सरकार बन रही है तो वो अपनी खुशी का सार्वजनिक प्रदर्शन करने के लिए उसी दिन को चुन सकता है जिस दिन अमेरिका में आतंकवादी हमला हुआ था. दुनिया जानती है कि अमेरिका पर हुआ वो हमला अलकायदा ने करवाया था और उस समय अफगानिस्तान में तालिबान की ही सरकार थी. तालिबान ने ही अलकायदा को संरक्षण दिया था. ज्यादा जानकारी के लिए देखें खबरदार.

क्या है अफगानिस्तान में चीन का बिजनेस मॉडल? देखें खबरदार

09 सितंबर 2021

जब दुनिया अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे को वेट एंड वॉच कर रही थी, तब चीन अफगानिस्तान की इस आपदा में भी अवसर खोज रहा था. अफगानिस्तान में तालिबान सरकार बनते ही चीन ने उसे अपने कर्ज के बोझ तले दबाने की पहली किश्त का ऐलान कर दिया है. चीन ने ऐलान किया है कि वो तालिबान सरकार को सवा दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता देने के लिए तैयार है, जिसका तालिबान बेसब्री से इंतजार कर रहा था. लेकिन तालिबान शायद नहीं जानता कि चीन किसी भी देश को मुफ्त की मदद देने में विश्वास नहीं रखता. वो जितना पैसा देता है उससे कई गुना कीमत वसूल लेता है. खबरदार में देखें अफगानिस्तान में चीन के बिजनेस मॉडल को डिकोड करने वाली रिपोर्ट.

तालिबान सरकार की टेरर कैबिनेट में मोस्ट-वॉन्टेड मंत्री, देखें योग्यता का विश्लेषण

08 सितंबर 2021

अफगानिस्तान में ऐसा निजाम आ चुका है जहां इंसानियत के दुश्मन, आतंकवादियों की संतानें कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं. खबरदार में आज हम तालिबान सरकार की टेरर कैबिनेट के मोस्ट-वॉन्टेड मंत्रियों की योग्यता का विश्लेषण करेंगे. हम आपको तालिबानी सरकार की खूबियों और खासियतों से भरपूर चेहरों की मुंह-दिखाई करवाएंगे. तालिबान की कैबिनेट वैसे तो तरह-तरह की नस्ल वाले आतंकवादियों से भरी पड़ी है. लेकिन इस टेरर कैबिनेट में कम से कम 14 आतंकवादी ऐसे हैं जो संयुक्त राष्ट्र की टेरर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवाने का कारनामा कर चुके हैं. देखिए खबरदार का ये एपिसोड.

प्रधानमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक...देखें तालिबान की सरकार में कौन-कौन शामिल

07 सितंबर 2021

तालिबान ने अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी है. इस अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री यानी सरकार के प्रमुख की भूमिका में मुल्ला हसन अखुंद होंगे. मुल्ला हसन अखुंद तालिबान की रहबरी शूरा यानी लीडरशिप काउंसिल का चीफ है और तालिबान प्रमुख मुल्ला हिब्तुल्लाह अखुंदजादा के बेहद करीबियों में शामिल हैं. मुल्ला बरादर को तालिबान सरकार में डिप्टी पीएम बनाया गया है. डिप्टी पीएम की भूमिका में मुल्ला हन्नाफी की भी भूमिका रहेगी. इसके अलावा मुल्ला याकूब तालिबान सरकार में रक्षा मंत्री होगा और सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान सरकार में आंतरिक मामलों का मंत्री होगा. शेर मोहम्मद अब्बास स्तनकजई तालिबान सरकार में उपविदेश मंत्री होगा. खैरुल्लाह खैरख्वा तालिबान सरकार में सूचना मंत्री होगा. जबकि तालिबान प्रवक्ता जैबुल्लाह मुजाहिद को उप सूचना मंत्री की जिम्मेदारी मिल रही है. अब्दुल हकीम को तालिबान सरकार का न्याय मंत्री बनाया गया है. ज्यादा जानकारी के लिए देखें खबरदार.

पंजशीर में शह-मात का खेल, देखें पूरी इनसाइड स्टोरी

06 सितंबर 2021

पंजशीर यानी पांच शेरों की घाटी, वो प्रांत जिसने कभी किसी बाहरी शक्ति की सत्ता को स्वीकार नहीं किया और हमेशा चुनौती दी. उसी पंजशीर पर तालिबान ने कब्ज़े का दावा किया है. हालांकि पंजशीर की शक्ति और शौर्य का प्रतीक बन चुकी आवाज़ें अब भी तालिबान को ललकार रही हैं. इन आवाज़ों को पाकिस्तानी फाइटर जेट और ड्रोन के हमले से दबाया नहीं जा सकता. तालिबान के प्रवक्ता ज़ैबुल्लाह मुजाहिद का दावा है कि पंजशीर पर तालिबान का कब्ज़ा हो चुका है. दूसरी तरफ पंजशीर के शेर कहे जाने वाले शाह अहमद मसूद के बेटे अहमद मसूद पिछले 3 दिन से ताजिकिस्तान में हैं. आज अपने ऑडियो संदेश में अहमद मसूद ने कहा है कि रेज़िस्टेंस फोर्स पंजशीर में अब भी मौजूद हैं और तालिबान के खिलाफ आगे लड़ाई जारी रहेगी. देखें खबरदार.

तालिबान में 'गृह-क्लेश', क्या गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा अफगानिस्तान?

05 सितंबर 2021

एक पुरानी कहावत है कि बंदर के हाथ उस्तरा नहीं लगना चाहिए. इसका अर्थ ये यह है कि मूर्ख व्यक्ति के हाथ कोई शक्ति या अधिकार नहीं आना चाहिए क्योंकि इसका परिणाम उसके लिए ही नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी हानिकारक हो सकता है. आज अमेरिका को ये बात समझ में आ रही होगी कि जिसने तालिबान के हाथ में अफगानिस्तान थमा दिया है, जिसका परिणाम पूरी दुनिया देख रही है. तालिबान से ना तो अफगानिस्तान संभल रहा है और ना ही वो अपनी सरकार ही बना पा रहा है. हालात ये हो गए हैं कि तालिबान में गृहक्लेश बढ़ता जा रहा है और अफगानिस्तान गृहयुद्ध की तरफ बढ़ता जा रहा है. देखिए खबरदार का ये एपिसोड.

पंजशीर पर तालिबानी कब्जा? देखें युद्धक्षेत्र से ग्राउंड रिपोर्टिंग

04 सितंबर 2021

तालिबान ने दस दिन में काबुल पर कब्जा कर लिया लेकिन उसके बाद वो दो मोर्चों पर लगातार फेल हो रहा है. एक मोर्चा पंजशीर का है, जहां तालिबान को नॉर्दन अलायंस के लड़ाकों ने पानी पिलाया हुआ है और दूसरा मोर्चा है काबुल की सत्ता का. जहां तालिबान के कदम ही नहीं जम पा रहे. तालिबान में बरादर सरकार बनना तो तय हो गया है लेकिन सरकार है कि बन ही नहीं रही. आज हम इन्हीं दो मोर्चों पर संघर्ष करने रहे तालिबान की हार का विश्लेषण करेंगे. आजतक की टीम ने युद्धक्षेत्र पंजशीर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान तालिबान के दावे के खिलाफ सबूत जुटाए हैं, देखें खबरदार

अफगान में आतंक की 'नेता-नगरी', कौन हैं तालिबान 'कैबिनेट' के 'बिग फेस'?

03 सितंबर 2021

कट्टरता के बीज से उपजने वाले साम्राज्य अक्सर एक भूखे, गरीब और मजबूर समाज की फसल खड़ी करते हैं. जिस अफगानिस्तान में हर 3 में से एक इंसान भूखा है, जहां 8 महीने में 5 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हो गए, सैकड़ों लोग मारे गए, हज़ारों लोग घायल हुए, उस अफगानिस्तान में तालिबान की बरादर सरकार की स्थापना का काम लगभग पूरा होने वाला है. इस सरकार में भाई भतीजावाद का वायरस लगा हुआ है और छंटे हुए आतंकवादी इस सरकार का चेहरा बनने जा रहे हैं. तालिबान की सत्ता के लोकल ट्रंप कार्ड हैं हिबातुल्ला अखुंदजादा, मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, अब्दुल हकीम हक्कानी और तालिबान के ग्लोबल ट्रंप कार्ड हैं चीन, रूस और पाकिस्तान. खबरदार के इस एपिसोड में देखिए तालिबानी सरकार के अहम चेहरों पर खास विश्लेषण.