सिर्फ चार घंटे का उपवास लेकिन देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेताओं से बर्दाश्त नहीं हुआ. सोचिए जिस मुद्दे पर देश में 12-12 मौत हो गईं उस मुद्दे पर फास्ट का आयोजन होता है. लेकिन फास्ट से पहले ब्रेकफास्ट की तस्वीर ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे देश में मुद्दे इतने छोटे हो गए और सियासी तमाशा इतना भारी हो गया है. सवाल ये भी उठता है कि क्या हमारे देश में सत्ता पक्ष से निराश होने पर जनता विपक्ष पर भरोसा कर सकती है. या फिर हर दल के लिए आप सिर्फ वोट बैंक हैं.