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दंगल: इस देश में घुसपैठियों के रक्षक कौन हैं?

संसद के अंदर तो घुसपैठियों को ले कर घमासान था ही, संसद के बाहर भी सरकार के एक मंत्री और कांग्रेस के सांसद इस मुद्दे पर भिड़ गए. बीजेपी के अध्यक्ष और राज्यसभा के सांसद, अमित शाह ने आज सदन के अंदर ही कांग्रेस को सीधी चुनौती दे दी. उन्होंने कह दिया कि एनआरसी यानि कि असम में बाहरी लोगों की गिनती का काम राजीव गांधी ने शुरू किया था, लेकिन कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी, हममें है – इस लिए हम इसे पूरा कर रहे हैं. कांग्रेस इस बात की दुहाई तो दे रही है कि एनआरसी राजीव गांधी की ही देन है, लेकिन घुसपैठियों को बाहर निकालने के सवाल पर गोल मोल भी है. यानि वो एनआरसी का क्रेडिट भी लेना चाहती है और संभावित घुसपैठियों की सहानुभूति भी चाहती है. दूसरी तरफ बीजेपी जिसने असम के चुनाव में बाहरी लोगों को मुद्दा बनाया था, ज़ोर शोर से कह रही है कि असम तो पहली झांकी है, अभी बंगाल बाकी है. इस लिए ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं – और ममता बनर्जी को मायावती का भी साथ मिल गया है. इस सारे घमासान के बीच – आज हम दंगल में कुछ सीधे सवाल पूछ रहे हैं –

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