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'नूरजहां' आम की कहानी... साइज ऐसा कि एक का वजन 5 किलो तक; कीमत ₹3000 पीस, एडवांस बुकिंग के लिए तरसते हैं लोग

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा में होने वाले विशालकाय नूरजहां आम (Noorjahan Mango) की पूरी कहानी. जानें 5 किलो तक के इस 'किंग ऑफ मैंगो' के इतिहास, कीमत और विदेशी मांग के बारे में...

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अफगानिस्तान से आकर MP की मिट्टी में घुली मिठास.(Photo:ITG)
अफगानिस्तान से आकर MP की मिट्टी में घुली मिठास.(Photo:ITG)

भारत को अगर आमों का राजा कहा जाता है, तो मध्यप्रदेश की धरती पर एक ऐसा 'महाराजा' पैदा होता है जिसे देखकर और चखकर दुनिया हैरान रह जाती है. हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाले नूरजहां आम की. अपने विशालकाय आकार, लाजवाब मिठास और बेजोड़ सुगंध के कारण इसे ग्लोबल लेवल पर 'किंग ऑफ मैंगो' और 'लग्जरी मैंगो' का दर्जा हासिल है. नूरजहां आम की 5 अनोखी खूबियां...


विशालकाय आकार और वजन: जहां सामान्य आम कुछ सौ ग्राम के होते हैं, वहीं एक नूरजहां आम का वजन औसतन 2 से 5 किलो तक होता है. आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के स्वाद के लिए काफी है.

शाही कीमत: अपनी दुर्लभता के कारण यह आम बेहद महंगा बिकता है. बाजार में इसके एक ही फल की कीमत 1500 से लेकर 3000 रुपये तक होती है.

दुर्लभता और सीमित उत्पादन: इसके पेड़ों पर फलों की संख्या बहुत सीमित होती है. यही वजह है कि पकने से पहले ही बड़े-बड़े रईसों और शौकीनों द्वारा इसकी एडवांस बुकिंग कर ली जाती है.

अद्वितीय स्वाद: इसका गूदा (पल्प) बेहद रसीला, कम रेशे वाला और एक खास शाही सुगंध से भरपूर होता है, जो इसे अन्य आमों से अलग बनाता है.

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राष्ट्रीय सम्मान: नूरजहां आम की इसी विशेषता को देखते हुए इसे साल 1999 और 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है.

अफगानिस्तान से कट्ठीवाड़ा तक
माना जाता है कि नूरजहां आम की यह दुर्लभ प्रजाति मूल रूप से अफगान क्षेत्र की है. दशकों पहले यह भारत पहुंची और 1950-60 के दशक में मध्यप्रदेश के मालवा और आदिवासी अंचल झाबुआ-आलीराजपुर में फली-फूली.

जूना कट्ठीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के किसान भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता दिवंगत रणवीरसिंह जादव करीब 55-60 साल पहले गुजरात के बनमाह क्षेत्र से इसका एक पौधा लाए थे. उन्होंने कड़ी मेहनत से इसे कट्ठीवाड़ा की मिट्टी में रोपा, जो आज इस पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है. जादव परिवार ने ग्राफ्टिंग (कलम) तकनीक के जरिए इस विरासत को सहेज कर रखा है. आज उनके पास 20-25 वर्ष पुराने मुख्य पेड़ के अलावा 11 नए ग्राफ्टेड पौधे भी तैयार हो रहे हैं.

'नूरजहां' आम बना आलीराजपुर के किसानों के लिए वरदान

खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका तक 'लग्जरी मैंगो' की धूम
भले ही सीमित उत्पादन के कारण नूरजहां आम का बड़े पैमाने पर कमर्शियल एक्सपोर्ट नहीं हो पाता, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में इसकी साख किसी लक्जरी ब्रांड जैसी है.

खाड़ी देशों में क्रेज

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संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देशों में इसके बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप के दीवाने हैं.

भारतीय प्रवासियों की पसंद

इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में बसे भारतीय समुदायों के साथ-साथ सिंगापुर और मलेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी इसकी भारी मांग रहती है.

मध्यप्रदेश सरकार का उद्यानिकी विभाग अब कट्ठीवाड़ा की इस अनमोल धरोहर को सहेजने और इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों, ड्रिप इरिगेशन और फल प्रसंस्करण (फ्रूट प्रोसेसिंग) को बढ़ावा दे रहा है. नूरजहां आम आज केवल एक फल नहीं, बल्कि आलीराजपुर के जनजातीय अंचल के किसानों की समृद्धि, कृषि नवाचार और वैश्विक पटल पर मध्यप्रदेश के गौरव का प्रतीक बन चुका है.

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