
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, जिसमें दावा किया गया है कि खंडवा जिला प्रशासन ने AI से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार जीता है. हालांकि, जल शक्ति मंत्रालय ने 'जल संचयन, जन भागीदारी' (JSJB) अभियान से जुड़े अवॉर्ड में कथित गड़बड़ी को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों का खंडन किया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन अवॉर्ड्स को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन और भ्रामक हैं.
जलशक्ति मंत्रालय के मुताबिक, सोशल मीडिया पर जिन मामलों का हवाला दिया जा रहा है, वे JSJB अभियान से नहीं, बल्कि मंत्रालय के एक अन्य पोर्टल जल शक्ति अभियान–कैच द रेन (JSA-CTR) से जुड़े हैं. दोनों अभियानों के उद्देश्य, पोर्टल और प्रक्रियाएं पूरी तरह अलग हैं.
वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने भी डिजिटल मीडिया में आई उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें खंडवा जिले में JSJB अभियान के तहत गड़बड़ी का दावा किया गया था.
बता दें कि केंद्र के 'जल संचय, जन भागीदारी' अभियान के तहत जल संरक्षण में बेहतरीन काम के लिए खंडवा जिले को देश भर में पहला स्थान मिला है. नवंबर में नई दिल्ली में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में इसे 2 करोड़ रुपये का पुरस्कार मिला. खंडवा जिले की कावेश्वर पंचायत ने भी समारोह में सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में दूसरा पुरस्कार जीता.
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 'X' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, ''जहां बीजेपी सरकार को हमारे बच्चों को AI का सही इस्तेमाल सिखाना चाहिए, वहीं वह खुद AI का इस्तेमाल करके भ्रष्टाचार कर रही है. खंडवा में बीजेपी सरकार के अधिकारियों ने दो फुट गहरे गड्ढों को AI का इस्तेमाल करके कुएं बना दिया और इलाके में अलग-अलग विकास कार्यों की AI से बनी तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड कर दीं."
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ''इन तस्वीरों के आधार पर उन्होंने माननीय राष्ट्रपति से पुरस्कार भी ले लिया. जब जमीनी हकीकत सामने आई, तो वहां खेत और खाली मैदान पाए गए. साफ है कि यह जल संरक्षण नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी से बनी तस्वीरों का खेल था. बीजेपी शासन में भ्रष्टाचार भी स्मार्ट हो गया है."

जलशक्ति मंत्रालय ने कहा कि कुछ जगहों पर एआई से बनाए गए फोटो और शादी के कार्ड को JSJB अभियान से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है. जिन मामलों में गलत फोटो या दस्तावेज अपलोड किए जाने की शिकायतें आई हैं, वे JSA-CTR पोर्टल से संबंधित हैं, न कि JSJB से.
JSA-CTR पोर्टल से जुड़े मामलों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. यह मामला प्रधानमंत्री के संज्ञान में है और पीएमओ ने भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इसके बाद सभी जिला कलेक्टरों को ईमेल के जरिए निर्देश भेजे गए हैं कि वे ऐसे अधिकारियों की पहचान करें, जिन्होंने पोर्टल पर भ्रामक या गलत तस्वीरें अपलोड की हैं और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करें.
इसके साथ ही JSA-CTR पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग पर अस्थायी रोक लगा दी गई है. जिलों को यह अधिकार दिया गया है कि वे गलत तस्वीरें हटाएं या उनमें सुधार करें. जिला अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि सोशल मीडिया पर अवार्ड को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों पर सही तथ्य सामने रखें.
JSJB अवार्ड से जुड़े तथ्य जल संचयन, जन भागीदारी पहल की शुरुआत 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत से हुई थी. इस अभियान का उद्देश्य लोगों की भागीदारी से वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और जल भंडारण को बढ़ावा देना है.
बता दें कि JSJB के तहत प्रोत्साहन के रूप में जिलों और नगर निगमों को दो श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाते हैं- 1 करोड़ रुपये और 40 लाख से 25 लाख रुपये.
इसकी निगरानी JSJB डैशबोर्ड के माध्यम से फोटो और लोकेशन टैगिंग के जरिए की जाती है. सत्यापन के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के 339 नोडल अधिकारी नियुक्त हैं. प्रक्रिया के तहत 1 प्रतिशत भौतिक सत्यापन और 99 प्रतिशत डिजिटल सत्यापन किया जाता है.
इस वर्ष 67 जिलों, 6 नगर निगमों और 1 शहरी स्थानीय निकाय (ULB) को शॉर्टलिस्ट किया गया था. कुल 100 पुरस्कार दिए गए, जिन्हें 18 नवंबर 2025 को विज्ञान भवन में राष्ट्रपति के हाथों प्रदान किया गया.
जल शक्ति मंत्रालय ने दो टूक कहा है कि जल संचयन, जन भागीदारी अभियान से जुड़े अवार्ड पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दिए गए हैं और उन्हें गलत तरीके से विवाद में घसीटना तथ्यात्मक रूप से गलत है. मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर ध्यान न दें और आधिकारिक तथ्यों पर भरोसा करें.
जिला प्रशासन का पलटवार- पुरस्कार का तस्वीरों से लेना-देना नहीं
राष्ट्रीय जल पुरस्कार से जुड़े आरोपों पर विवाद बढ़ने के बाद खंडवा प्रशासन ने अपनी स्थिति साफ करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नागार्जुन बी गौड़ा ने कहा कि AI से बनी तस्वीरें अपलोड करने का राष्ट्रीय जल पुरस्कार से कोई लेना-देना नहीं है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सीईओ ने कहा कि 'जल संचय, जन भागीदारी' अभियान के तहत किए गए 1 लाख 29 हजार 46 कार्यों की पूरी जांच के बाद वेरिफाइड तस्वीरें अभियान के JSJB पोर्टल पर अपलोड की गईं.
IAS गौड़ा ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इन सभी तस्वीरों को वेरिफाई किया और कुल कार्यों के एक प्रतिशत का रैंडम फील्ड इंस्पेक्शन किया.
CEO ने आगे कहा, "पहली नजर में खंडवा जिले में किए गए जल संरक्षण कार्यों के बारे में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं."
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से संबंधित तस्वीरें 'कैच द रेन' नाम के दूसरे पोर्टल पर सिर्फ शैक्षिक और प्रेरणादायक उद्देश्यों के लिए अपलोड की जाती हैं.
CEO ने आगे कहा, "जिला प्रशासन को पता चला है कि AI से बनाई गई 21 तस्वीरें 'कैच द रेन' पोर्टल पर अपलोड की गई थीं. यह शायद गलत इरादे से किया गया था. जिला प्रशासन इन तस्वीरों को अपलोड करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है."
गौड़ा ने आगे कहा, "'कैच द रेन' पोर्टल 'जल संचय, जन भागीदारी' अभियान पोर्टल से बिल्कुल अलग है. 'जल संचय, जन भागीदारी' अभियान के तहत अवॉर्ड 'कैच द रेन' पोर्टल पर अपलोड की गई तस्वीरों के आधार पर नहीं दिए जाते हैं."
उन्होंने आगे बताया कि 'जल संचय, जन भागीदारी' अभियान के तहत खंडवा जिले में 1.25 लाख से ज्यादा जल संरक्षण के काम किए गए, जो देश में सबसे ज्यादा हैं.