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खून की मेन नली में थी सूजन, ब्लड सर्कुलेशन रुकने से फटने की थी आशंका; डॉक्टर्स ने ऐसे बचाई गैस कांड पीड़िता की जान

Bhopal News: बीएमएचआरसी के डॉक्टरों ने बिना ओपन सर्जरी किए रेडियोलॉजिकल इन्टरवेन्शनल प्रक्रिया से मरीज के एओर्टा में एक स्टेंट डालकर मरीज को खतरे से बाहर निकाला. यह प्रक्रिया भोपाल के सिर्फ चुनिंदा अस्पतालों में होती है.

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रेडियोलॉजी इन्टरवेंशनल प्रक्रिया से सफल सर्जरी. (सांकेतिक तस्वीर)
रेडियोलॉजी इन्टरवेंशनल प्रक्रिया से सफल सर्जरी. (सांकेतिक तस्वीर)

Bhopal News: खून को हार्ट से शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचाने वाली शरीर की मुख्य रक्तवाहिका (एओर्टा) में सूजन आ जाने पर प्राणघातक स्थिति से जूझ रही गैस पीड़ित महिला का बीएमएचआरसी में सफल ऑपरेशन हुआ है. बीएमएचआरसी के डॉक्टरों ने बिना ओपन सर्जरी किए रेडियोलॉजिकल इन्टरवेन्शनल प्रक्रिया से मरीज के एओर्टा में एक स्टेंट डालकर मरीज को खतरे से बाहर निकाला. यह प्रक्रिया भोपाल के सिर्फ चुनिंदा अस्पतालों में होती है. प्राइवेट अस्पतालों में इस पर 7-8 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि बीएमएचआरसी में गैस पीड़ित, गैस पीड़ित आश्रितों व आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए यह निशुल्क है.
 
BMHRC के रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ राधेश्याम मीणा ने बताया कि 65 साल की मरीज पेट दर्द की शिकायत के बाद बीएमएचआरसी आई थी. सीटी स्कैन की जांच में पता चला कि एओर्टा में सूजन है. एओर्टा शरीर की मुख्य रक्त वाहिका होती है. यह हार्ट से आने वाले रक्त को शरीर के बाकी अंगों तक पहुंचाती है. सूजन की वजह से एओर्टा फैलकर 6 सेमी चौड़ी हो गई थी और रक्त इसमें भर रहा था. ऐसी स्थिति में एओर्टा कभी भी फट सकती थी. इससे खून का प्रवाह रुक जाता  और मरीज के लिए प्राणघातक साबित होता. ऐसी स्थिति में हमने जल्द से जल्द एंडोवस्क्युलर एन्यूरिज्म रिपेयर (ईवीएआर) तकनीक से सर्जरी करने का फैसला किया.

सर्जरी करने वाले डॉक्टर्स की टीम.

हमने सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ गिरिराज गर्ग और एनेस्थीशियोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ गौरव आचार्य और रेडियोलॉजी विभाग में सीनियर रेजिडेंट डॉ दिनेश कुशवाहा की मदद से मरीज के एओर्टा में एक लंबा स्टेंट प्रत्यारोपित कर दिया, जिससे रक्त इस स्टेंट से होते हुए शरीर के अन्य अंगों में पहुंचने लगा। कुछ दिनों में एओर्टा का आकार भी सामान्य हो जाएगा.

काफी सुरक्षित प्रक्रिया है 
डॉ मीणा ने बताया कि परंपरागत तौर पर इस तरह की परेशानी से जूझ रहे मरीजों की ओपन सर्जरी होती है, जिससे मरीज को रिकवर होने में अधिक समय लगता था. साथ ही ऑपरेशन के बाद दर्द भी काफी होता था. यह प्रक्रिया एकदम सुरक्षित है. तार के जरिए एओर्टा तक स्टेंट ले जाने के लिए सिर्फ एक छोटा चीरा लगाना होता है. ऑपरेशन के एक—दो दिन बाद मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया जाता है.

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किन लोगों को अधिक खतरा 
डॉ मीणा ने बताया कि आमतौर पर ब्लड प्रेशर के मरीजों, धूम्रपान करने वालों, हाई कॉलेस्टॉल वालों व अधिक उम्र के लोगों को यह बीमारी होती है. प्रति एक हजार व्यक्ति में से 3—4 लोगों में यह बीमारी पाई जाती है.
   
आर्टिक एन्यूरिज्म के लक्षण 

इस बीमारी में कई बार मरीज में कोई लक्षण नहीं देखे जाते. हालांकि, कुछ लोग सीने या पीठ में दर्द, सांस की कमी का अनुभव कर सकते हैं. इन संकेतों को पहचानना एवं सही समय पर इलाज करना महत्वपूर्ण है.
 
BMHRC की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि बीएमएचआरसी का रेडियोलॉजी विभाग मरीजों को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर रहा है. रेडियोलॉजी पद्धति से कई बीमारियों में मिनिमल इनवेसिव सर्जरी की जा रही है.  गैस पीड़ित और अन्य मरीजों को इससे काफी लाभ प्राप्त हो रहा है.

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