मध्य प्रदेश के ग्वालियर से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले दो मामले सामने आए हैं. यहां जिन माता-पिता ने बच्चों को पाल पोसकर बड़ा किया, खुद कष्ट झेले पर बच्चों के फ्यूचर को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया, आज उन्होंने ही घर से बेदखल कर दिया. मजबूरन ये बुजुर्ग वृद्धाश्रम में जिंदगी के बचे दिन काट रहे हैं.
दरअसल, हजीरा क्षेत्र में बिरला नगर निवासी राम स्वरूप तिवारी इन दिनों लक्ष्मीगंज के वृद्धाश्रम में रह रहे हैं. पहले तो वो मंदिर में पूजा पाठ कर अपना गुजारा कर लेते थे. मगर, उम्र अधिक होने और बेटों की बेरुखी के चलते वृद्धाश्रम में रह रहे हैं.
बेटों ने कृषि भूमि अपने नाम करा ली
राम स्वरूप का कहना है कि उन्होंने भरण पोषण के लिए आवेदन दिया था. इसके बाद आपसी समझौते में दिसंबर 2012 में मामले का निपटारा हो गया था. इसके बाद बेटों ने दतिया जिले की कृषि भूमि अपने नाम करा ली और अब वो कोई मदद नहीं करते हैं. इतना ही नहीं कुछ भी देने के बजाय मानसिक प्रताड़ित करते हैं.
स्थिति ऐसी नहीं है कि पिता को साथ रख रख सकें
ये मामला अदालत तक पहुंचा, जहां एक बेटे ने कहा कि पिता जिस मकान की बात कर रहे हैं वो उसने अपने पैसों से बनवाया है. वर्तमान में उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वो पिता को साथ रख रख सके.
इस पर एसडीएम विनोद सिंह ने आदेश जारी किया कि बेटा राकेश अपने पिता को मकान में एक कमरा दे, जिसमें बाथरूम और रसोई भी हो. इसके अलावा दोनों बेटे हर महीने तीन-तीन हजार रुपये भी दें.
तीन बेटों की मां रेशमा की कहानी
ऐसे ही एक मामले में गोसपुरा निवासी तीन बेटों की मां रेशमा का कहना है कि उन्हें बहू और बेटे परेशान करते हैं. बेटों ने एक-एक कमरे में ताला डाल दिया है. खाने के लिए भी कुछ नहीं देते हैं.
वहीं अदालत में बेटों ने मां के आरोपों को गलत बताया. इस मामले में एसडीएम विनोद सिंह ने तीनों बेटों को निर्देश दिया कि वे बुजुर्ग माता-पिता का ख्याल रखें. उन्हें भरण-पोषण के लिए 3-3 हजार रुपये हर महीने दें.