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साहित्य आजतक: जावेद अख्तर ने बताया सफलता का मंत्र, मामे खान के गीतों पर झूमे लोग

'साहित्य आजतक' के दूसरे संस्करण के दूसरे दिन के कार्यक्रमों का समापन हो गया है. रविवार को इस कार्यक्रम का आखिरी दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत अहम सत्र साहित्य और समाज में कवि, गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर ने किया.

साहित्य आजतक 2017 साहित्य आजतक 2017

'साहित्य आजतक' के दूसरे संस्करण के दूसरे दिन के कार्यक्रमों का समापन हो गया है. रविवार को इस कार्यक्रम का आखिरी दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत अहम सत्र साहित्य और समाज में कवि, गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर ने किया. जावेद अख्तर ने कहा कि आदमी को अपनी शोहरत और कामयाबी पर घमंड नहीं करना चाहिए. साहित्य आजतक के सातवें सत्र में लोकगायक मामे खान ने अपनी प्रसिद्ध गीतों की प्रस्‍तुति दी. इसके अलावा श्याम रंगीला ने अपने अंदाज में लोगों को खूब हंसाया.

साहित्य आजतक के दूसरे दिन दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के देसी राग पर भी लोग खूब झूमे. 

सातवां सत्र : मामे खान, लोक गायक

साहित्य आजतक के सातवें सत्र में लोकगायक मामे खान ने अपनी प्रसिद्ध गीतों की प्रस्‍तुति दी. उन्‍होंने अपने गीत चौधरी... से महफिल में समां बांधा. मामे खान ने अपने गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्‍ध किया.

छठवां सत्र : क्रिकेट- लोकतंत्र बनाम वंशवाद

साहित्य आजतक के छठे सत्र क्रिकेट- लोकतंत्र बनाम वंशवाद में भारत के पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन राजदीप सरदेसाई और श्वेता सिंह ने किया. इस सत्र के दौरान राजदीप ने कहा कि अब वंशवाद का दौर खत्म हो रहा है. किसी भी क्षेत्र में अब ऐसे लोग उभर कर सामने आ रहे हैं जिन्हें किसी का सहारा नहीं मिला और उन्होंने महज अपनी काबिलियत से अपना मुकाम हासिल किया.

कीर्ति आजाद ने कहा, 'अगर आपके अंदर कुछ बड़ा करने की अभिलाषा है और दृढ़ संकल्प है, तो आपको कोई नहीं रोक सकता है. राजदीप सरदेसाई ने विराट कोहली एमएस धोनी और सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए बताया कि इन तीनों के पिता क्रिकेटर नहीं थे. लेकिन उनके टैलेंट और मेहनत ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया.

पांचवा सत्र: कवि सम्मेलन

साहित्य आजतक के पांचवे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में मशहूर कवि कुमार विश्वास, मनोज मुंतशिर, मदन मोहन समर, डॉ सरिता शर्मा, तेज नारायण शर्मा और डॉ निर्मल दर्शन ने अपनी कविताओं से महफिस में समां बांधा. इस सत्र का संचालन कुमार विश्वास ने किया.

चौथा सत्र: भारत का सबसे पॉवरफुल पीएम कौन?

साहित्य आजतक के विशेष सत्र भारत का सबसे पॉवरफुल पीएम कौन में वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी, उदय माहूरकर और लेखक संजय बारू ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन पुण्य प्रसून वाजपेयी ने किया. इस सत्र में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी पर विजय त्रिवेदी ने किताब लिखी, संजय बारू ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर किताब लिखी और पीएम मोदी पर किताब लिखने वाले उदय माहूरकर ने इस सत्र में चर्चा की.

क्या मनमोहन सिंह एक्सिडेंटल पीएम थे? संजय बारू ने कहा कि यह खुद मनमोहन सिंह मानते थे कि वह देश के एक एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर थे. संजय बारू ने कहा कि 1991 में उनकी नरसिंहा राव पर लिखी किताब में कहा था कि वह आर्थिक रिफॉर्म की पोलिटिकल लीडरशिप नरसिंहा राव ने की थी. उन्होंने अपने कार्यकाल में मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री का ओहदा दिया.

इस सत्र के दौरान कहा गया कि आर्थिक सुधार की दृष्टि से देखें तो देश के सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव थे. हालांकि यह मत भी रहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल के दौरान अपने कद को आरएसएस से बड़ा कर खुद को मोदी से ज्यादा शातिर प्रधानमंत्री स्थापित कर लिया.

तीसरा सत्र: एन अनसुटेबल ब्वॉय

साहित्य आजतक के दूसरे दिन के तीसरे अहम सत्र एन अनसुटेबल ब्वॉय में डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर करण जौहर ने किया. इस सत्र का संचालन अंजना ओम कश्यप ने किया. इस सत्र के दौरान अपनी किताब पर बात करने से पहले करण ने फिल्म एक्ट्रेस करीना कपूर और काजोल के साथ दोस्ती और अनबन पर अपनी बात कही. वहीं करण ने कहा कि ऐसा ही उनके साथ शाहरुख खान के साथ हुआ. हालांकि करण ने कहा कि उनके निजी रिश्ते उनकी प्रोफेश्नल लाइफ पर कभी असर नहीं डालते और इसीलिए वह भविष्य में शाहरुख के साथ काम करने का मौका देख रहे हैं.

करण ने कहा कि वह रियल फिल्में बनाना नहीं जानते लेकिन वह सपनों को बेचना जानते हैं और इसीलिए उनकी फिल्मों में वह सपनों के बचते दिखते हैं. वहीं इस सत्र के दौरान करण ने बताया कि उन्हें अपने सेक्सुअल ओरिएंटेशन के विषय में जो कहना था वह अपनी किताब एन अनसुटेबल ब्वॉय में लिख चुके हैं. करण ने कहा कि किताब में इस विषय पर लिखा एक-एक शब्द सही है.

करण ने कहा कि आज का दौर है कि नेपोटिस्म के बारे में चर्चा हो रही है लेकिन यह हर दौर में रहा. करण ने कहा कि यह सच है कि पिता का फिल्म बनाने का पूरा कारोबार था और शायद इसीलिए वह आज फिल्में बना रहे हैं. करण ने कहा कि यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं सभी क्षेत्रों में देखने को मिलता है. करण ने कहा कि पिता से विरासत में जो कुछ मिला उसने उनकी मदद जरूर की लेकिन उसके बाद उन्होंने सिर्फ मेहनत का सहारा लेकर अपना मुकाम तय किया है.

दूसरा सत्र: आज का साहित्य

साहित्य आजतक के दूसरे दिन के दूसरे अहम सत्र आज का साहित्य में मशहूल अशोक वाजपेयी, उपन्यासकार अलका सरावगी और लेखक और आलोचक मैनेजर पांडेय ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन पुण्य प्रसून वाजपेयी ने की. प्रसून ने मैनेजर पांडेय से भारतीय समाज के विश्लेषण पर पूछा कि समकालीन समाज पर क्या विचार है. मैनेजर पांडेय ने कहा कि आज भी भारतीय समाज में ऐसे लोग हैं जो अतीत के साहित्य को कला को संगीत को जानते हुए कुछ नया रचने, गढ़ने की कोशिश करते हैं. आज समाज में उन्हीं के कुछ मायने हैं. मनैजर पांडेय ने कहा कि समाज और साहित्य इसी रिश्ते के सहारे आगे बढ़ता है.

अशोक वाजपेयी ने कहा कि साहित्य कोई समाज नहीं गढ़ता है. बल्कि साहित्य एक व्यक्ति रच रहा है. मनैजर पांडेय की बात से इत्तेफाक रखते हुए अशोक ने कहा कि अब सोशल मीडिया के नाम पर एक विचित्र व्यवस्था सामने आई है जहां सिर्फ एक दूसरे की तारीफ ही होती रहती है. वहीं साहित्य का काम फैसला करना नहीं है बल्कि यह बताना है कि वस्तुस्थिति क्या है.

पहला सत्र: साहित्य और समाज

साहित्य आजतक के दूसरे दिन की शुरुआत अहम सत्र साहित्य और समाज में कवि, गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर ने किया. इस सत्र का संचालन पुण्य प्रसून वाजपेयी ने किया. इस सत्र की शुरुआत में जावेद अख्तर ने कहा कि आदमी को अपनी शोहरत और कामयाबी पर घमंड नहीं करना चाहिए. जावेद ने कहा कि अब संवाद की रफ्तार बढ़ चुकी है, टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया एक बड़ा मीडियम बन कर उभरा है. लेकिन इस रफ्तार की देन है कि आज गहराई कम हो गई है. हालांकि जावेद ने कहा कि आज अच्छी बात यही है कि नई पीढ़ी गहराई को खोज रही है.

मुगलों के दौर में हिंदुस्तान सबसे अमीर देश था

जावेद अख्तर ने कहा कि 1999 में ऑपरेशन विजय के समय वह कारगिल, बटालिक, द्रास के दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई. जावेद से पुण्य ने पूछा कि आखिर कभी-कई आपको राष्ट्रवाद के सवाल पर गुस्सा क्यों आ जाता है. जावेद ने कहा कि राष्ट्रवाद राजनीतिक दल और नेता दोनों से बहुत बड़ा है. यदि कोई नेता सोचे कि वह देश से बड़ा है तो यह सकी मुगालता है. जावेद ने कहा कि संभव है कि मैं सरकार से न जुड़ा हूं लेकिन देश से मैं हमेशा जुड़ा हूं. अकबर रोड के नाम बदले जाने के विदाद पर जावेद अख्तर ने कहा कि बिना अकबर के देश का इतिहास पूरा नहीं होता. अकबर बहुत बड़ा आदमी था. ऐसे समय में जब यूरोप में सेक्युलर को समझा जा रहा था तब अकबर ऐसा शहंशाह था जो सेक्युलरिज्म को प्रैक्टिस कर रहा था. जावेद अख्तर ने कहा कि मुगल काल में हिंदुस्तान दुनिया का सबसे अमीर देश था.

फिल्म और इतिहास में भेद रखें

ताममहल के मुद्दे पर जावेद ने कहा कि ताजमहल भी मिस्र के पिरामिड की तरह आर्किटेक्चर का एक वंडर है. दिल्ली के आर्किटेक्चर पर मुगल काल की छवि है. जावेद ने कहा कि इस्लाम में चेहरा बनाने हराम है लिहाजा इस दौर में कला के छेत्र में म्यूजिक और पेंटिंग अपने शीर्ष पर पहुंचे. जावेद ने कहा कि फिल्म को इतिहास और इतिहास को फिल्म समझने की भूल नहीं करनी चाहिए.

जावेद अख्तर ने इंडिया टुडे मैगजीन की साहित्य वार्षिकी 'अभिव्यक्ति का उत्सव' का लोकार्पण किया

जानें पहले दिन की झलकिंया

'साहित्य आजतक' के दूसरे संस्करण के दूसरे दिन की शुरुआत साहित्य जगत की कुछ और बड़ी हस्तियों के साथ. जहां पहले दिन की शुरुआत इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी के वेलकम स्पीच से हुई. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि 'साहित्य आजतक' हिन्दी साहित्य, संगीत और नाटक परंपरा को बढ़ावा देने के लिए साहित्य जगत के सितारों का यह जमावड़ा एक प्रयास है.

कार्यक्रम के पहले दिन सिंगर अनूप जलोटा और सिंगर तलत अज़ीज़ के साथ हंस राज हंस, नीलेश मिश्रा और कई नए कवियों ने शिरकत की. इनके अलावा सेंसर बोर्ड के प्रमुख और गीतकार, कवि प्रसून जोशी ने भी अपनी नई पुरानी कविताओं से भी महफिल में समां बांधा. पहले दिन का समापन मशहूर कव्वाल निज़ामी ब्रदर्स के सुरों से हुआ.

साहित्य आजतक की महफिल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के आंगन में सजी है, 12 नवंबर को भी कार्यक्रम में कई बड़ी हस्तियां शिकरत करेंगी.

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