'ना जट्टा ना...', 'जा वे जा...', 'कच्चे पक्के यार...', जैसे कई गानों पर आप थिरके होंगे और लाउड आवाज में सुनकर झूमे होंगे. इन फेमस गानों को गाने वाले पंजाबी सिंगर पर्मिश वर्मा ने साहित्य आजतक के मंच की शोभा बढ़ाई और अपनी स्ट्रगल स्टोरी के बारे में बात की. पर्मिश ने बताया कि उनका करियर बनाने के लिए उनके पिता अपना घर तक बेचने को तैयार हो गए थे. वो पहले ऑस्ट्रेलिया में हुआ करते थे, फिर वो इंडिया आए और गाने बनाए.
अपनी स्ट्रगल स्टोरी पर बात करते हुए पर्मिश ने कहा कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, जो दूसरे को आगे बढ़ने से रोकते हैं वहीं कुछ ऐसे होते हैं आगे बढ़ने में मदद करते हैं, मैंने दोनों देखे हैं. आपको सोचना होगा कि आपको जिंदगी जीनी कैसे है. मैं लाइफ को ऐसे ही एक्सेप्ट करता हूं. आपको लगता है कि जिंदगी का कंट्रोल आपके हाथ में है, जिंदगी जीने का तरीका आपके हाथ में है, लेकिन आउटकम आपके हाथ में नहीं है.
हीरो बनाने के लिए घर बेचने चले थे पिता
पर्मिश का स्ट्रगल 2007 नहीं बल्कि इससे पहले से शुरू हो गया था. सिंगर बोले- जब मैं शुरु शुरू में थोड़ा सा हिट हुआ था तो लगता था कि बहुत अचीव कर लिया है. लेकिन अब जब मैं बहुत कुछ एक्सपीरियंस कर चुका हूं तो लगता है कि कुछ अचीव नहीं किया है. मैं दोस्तों से कहता हूं कि जब खर्चे हजारों में थे, तो लाखों रुपया बहुत ज्यादा लगता था. पर जब आप अपना अनुभव लेते हो तो सब बहुत बड़ा अचीवमेंट लगता है. हर किसी का कुछ मतलब है, मैंने अपनी लाइफ में बहुत कुछ किया है, लेकिन वो सिर्फ जर्नी है, उसका क्वालिफिकेशन राउंड ही मैंने क्लियर किया था.
पर्मिश ने बताया कि उनके पिता उनका करियर सेट करने के लिए घर तक बेचने को तैयार थे. सिंगर बोले- पिता होते ही ऐसे हैं, शायद ही कोई इस बात से इनकार करेगा. एक डायरेक्टर ने कहा था कि 2 करोड़ दोगे तो हीरो ले लेंगे आपके बेटे को. तो पापा ने कोशिश की और पता चला कि 35 लाख का ही बिकेगा, तो वो बोले कि घर बेच के भी 35 लाख ही आएंगे. दो करोड़ कैसे आएंगे. तो पापा ने हमेशा मुझे आगे बढ़ाने की कोशिश की है. ये आपको रिएलाइज होता है जैसे जैसे आप बड़े होते हो.
विदेश से बुलाया वापस
पहली सक्सेस पर्मिश को जब मिली तो उन्होंने सबसे पहले अपने पिता से ही शेयर की. पर्मिश ने कहा- मैं ऑस्ट्रेलिया में था और जब मुझे जॉब ऑफर मिली तो मैंने अपने पिता को कॉल किया और कहा कि पापा ये जॉब मिली है मुझे और ये कॉन्ट्रैक्ट है दो साल का, तो मैं यहीं सेटल हो जाऊंगा. तो उन्होंने ही कहा मुझे कि तू इंडिया वापस आजा तू तो एक्टर बनना चाहता था ना. तू भारत आकर ट्राय कर. मेरे पापा ही ऐसा कहने वाले पहले इंसान थे. हाल ही में हमारा नया घर बन रहा था तो मैंने उनसे कहा कि पापा हमारा नया घर बन रहा है अब यहां से चंडीगढ़ शिफ्ट होंगे. तो तब उन्होंने कहा कि यार मैं ये घर छोड़कर नहीं जा सकता. ये वही पटियाला वाला घर था जिसे मेरे लिए वो बेचने को तैयार थे.
पर्मिश ने आगे कहा कि स्ट्रगल लाइफ की कभी खत्म नहीं होती है. हर एक बंदा अपनी जिंदगी नें स्ट्रगल कर ही रहा है, लेकिन जब आप एक्सेप्ट कर लेते हो ना तो लाइफ थोड़ी आसान हो जाती है. जब मैं स्कूल में था तो बहुत बुरा लगता था कि मैं क्या करूंगा, फिर ऑस्ट्रेलिया था तब सोचता था क्या करूंगा, कैसे एक्टर बनूंगा, फिर पीआर मिला तो सोचा कैसा कैसा कंटेंट करूंगा. तो इससे बढ़िया तो मैं ऑस्ट्रेलिया में जॉब करते हुए ही था. तो जैसे जैसे लाइफ बढ़ेगी स्ट्रगल बढ़ेगी ही, मुश्किलें तो रहेंगी ही, आपको आदत डालनी पड़ेगी.
बचपन से शुरू हुआ स्ट्रगल
पर्मिश ने बताया कि उनका स्ट्रगल बचपन से ही शुरू हो गया था. मेरे पिता प्रोफेसर थे, उन्होंने पर्सनल लोन्स लेकर मुझे बहुत महंगे स्कूल में डाला ताकि मुझे एक्सोपजर मिले और अच्छी एजुकेशन मिले. तब मुझे एहसास हुआ कि मैं सबसे कितना अलग हूं. क्योंकि वहां सब अमीर के बच्चे थे, तो मुझे समझ आ गया था और मुझे रियलाइज हुआ कि अच्छा लाइफ में ये ये चीजें करनी हैं. इमोशनल, इंटलेक्चुअल हो या फाइनेंशियली. हर तरह से सब असलियत पता चल गई थी.
भारत से माइग्रेशन करने वालों को लेकर भी पर्मिश ने बात की और बताया कि सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि गुजराती और साउथ के भी मुझे बाहर बहुत मिले. अब तो हरियाणा से भी जाते हैं. पर अब थोड़ा कम हो गया है क्योंकि भारत में ही कई ऑपुरचुनिटीज हैं. पर्मिश सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इंस्पायर करने की बहुत कोशिश करते हैं. हालांकि बातचीत में उन्होंने इसे कमर्शियल दुकान बताया. वो बोले- एक आर्टिस्ट के तौर पर वो आपकी दुकान होती है, जहां आप अपना सामान बेचने की कोशिश करते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर पर्मिश का एक पार्ट है जो कमर्शियली बनाई गई है.
पर्मिश ने साथ ही बताया कि उन्होंने एक ऐसा SDS स्टूडियो प्लेटफॉर्म बनाया है जहां ऐसे कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है जिसे रिकॉर्ड लेबल मान्यता नहीं देते हैं. क्योंकि उनके हिसाब से वो पैसा कमाने वाले नहीं होते हैं. यहां हम किसी कमर्शियल आर्टिस्ट को साइन नहीं करते हैं. हम इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट का वेलकम करते हैं जिन्हें सिर्फ पहचान की जरूरत है. जो कुछ मीनिंगफुल कंटेंट बनाना चाहते हैं, हम उनके साथ काम करते हैं. क्योंकि ऐसा काम रिकॉर्ड्स काम नहीं करना चाहते हैं. और इसलिए भी किसी का घर ना बिके.