भारत के सबसे दमदार एक्टर्स में गिने जाने वाले मनोज बाजपेयी ने रविवार को अपनी मौजूदगी से साहित्य आजतक 2023 में खूब रंग जमाया. मंच पर बातचीत करते हुए 'नरकटियागंज के छोरा' मनोज ने बताया कि बिहार के जिस छोटे से शहर से वो आते हैं वहां क्या खास है.
अब अपने काम के सिलसिले में मुंबईवासी बन चुके मनोज ने बताया कि नरकटियागंज का चिवड़ा और मीट बहुत मशहूर है. उन्होंने कहा, 'जिसे यहां शहरों में लोग पोहा बोलते हैं, उसे हमारे यहां चिवड़ा कहा जाता है. मैं जब भी गांव जाता हूं, वहां से चिवड़ा लेकर जरूर आता हूं.'
आज भी किरदार की तैयारी में लगाते हैं उतना ही वक्त
मनोज ने बातचीत में बताया कि 'सत्या' फिल्म में उन्हें भीकू म्हात्रे का किरदार तैयार करने में चार महीने का समय लगा था. आज भी जब वो किसी नए किरदार के लिए तैयारी शुरू करते हैं तो स्क्रिप्ट पढ़ने के साथ ही उनका काम शरू हो जाता है. मनोज ने कहा कि आज भी वो अपने हर किरदार पर इसी तरह समय लगाते हैं. उन्होंने कहा, 'वो एक नशा है जुनून है. मेरी अभिनय के साथ एक प्रेम कहानी है. एक अच्छी स्क्रिप्ट मिलने के बाद और कुछ भी नहीं सूझता.'
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में सरदार खान के आइकॉनिक किरदार के पीछे की सोच बताते हुए मनोज ने कहा, 'अनुराग उसे अपने स्टाइल में एक कमर्शियल फिल्म बनाना चाहते थे. लेकिन उसक हीरो अभी तक के फिल्म हीरोज से बिल्कुल अलग रखना था. इसलिए उसका लुक भी ऐसा रखा गया जिसे किसी भी तरह से कोई फॉलो नहीं करना चाहेगा. ये हीरो अपने तरह का एक 'बेढंगा' हीरो था.'
जनता प्रमोट करे नई फिल्म 'जोरम'
मनोज की नई फिल्म 'जोरम' 8 दिसंबर को थिएटर्स में रिलीज होने जा रही है. दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल्स में खूब तारीफ़ पा चुकी 'जोरम' के बारे में मनोज ने कहा कि वो चाहते हैं इस फिल्म को जनता ही प्रमोट करे. इसलिए फिल्म की कोई प्राइवेट स्क्रीनिंग नहीं होगी. मनोज ने कहा, 'अगर ये दर्शक आपकी फिल्म को प्रमोट नहीं करेगा, तब तक अच्छी फिल्में थिएटर्स में दिखाई नहीं जाएंगी.'
'जोरम' की कहानी के बारे में मनोज ने बताया, 'एक आदिवासी आदमी की कहानी है, जो मुंबई में कंस्ट्रक्शन साईट पर काम करता है. उसकी पत्नी की हत्या कर दी जाती है. वो अपनी 3 महीने की बच्ची को लेकर वापस झारखण्ड के जंगल में भागता है. क्योंकि उसे पता है कि वहां चला गया तो जान बच जाएगी.'
मसालेदार एक्शन के साथ भी आ रहे हैं मनोज
मनोज ने बताया कि उनकी आने वाली फिल्म 'भैयाजी' बड़ी कमर्शियल फिल्म है. अपने कमिटमेंट का उदाहरण बताते हुए मनोज ने बताया, 'एक्शन डायरेक्टर चाहते थे कि 95% तक शॉट खुद दूं. 25-30 साल के व्यक्ति का एक्शन करना बहुत अलग होता है. मेरे घुटने में चोट लगी, गर्दन में चोट लगी, कितनी बार लगा कि कर नहीं पाऊंगा. मगर फिर भी इसे पूरी ईमानदारी से किया.'
डांस क्यों नहीं करते मनोज?
'सत्या' फिल्म के गाने 'सपने में मिलती है' के लिए मनोज ने जैसा डांस किया, वो आज भी शादियों-बारातों की जान है लेकिन क्या अब उन्हें फिल्म में डांस करने का चांस नहीं मिलता? इसपर जवाब देते हुए मनोज ने बताया, 'डांस वगैरह मैं करता था. लेकिन जब ऋतिक की फिल्म आई 'कहो न प्यार है' और मैंने वो देखी, तो कसम खा ली कि अब डांस नहीं करूंगा. फिर टाइगर श्रॉफ आया, तो उसने डांस करना और मुश्किल बना दिया. इसलिए अब डांस नहीं करता.'
मनोज ने बताया कि उनकी ओटीटी फिल्म 'एक बंदा काफी है', साल की सबसे बड़ी सफल फिल्म है. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश इसी तरह की फिल्में और कहानियां बड़े पर्दे पर लेकर आने की है. उन्होंने कहा, 'ये दर्शक नई कहानी, अपनी कहानी, अपने तरह के किरदार देखना चाहता है. कोशिश यही है कि उसी तरह की कहानी दर्शक को दिखाई जाए.'
मनोज ने बताया कि पहले उन्हें ये सोचना पड़ता था कि कब पैसे के लिए फिल्म करनी है और कब अपने हुनर ओ चमकाने वाली. लेकिन अब हालात बेहतर हैं अब वो जो भी काम करते हैं, उसके लिए सही पैसे मिल जाते हैं. उन्होंने कहा, 'काम बढ़े, चुनने की आजादी हो, उसका इंतजार हर कलाकार को रहता है.'
पहले ये चुनाव करना पड़ता था कि पैसे के लिए करूं या एक्टिंग के लिए काम करूं. लेकिन अब लोग पैसे दे देते हैं. इसलिए वो एक समय में एक ही प्रोजेक्ट पर ध्यान देते हैं चाहे फिल्म हो या ओटीटी शो.
मनोज ने साउथ के हीरो को बताया जनता का हीरो
साहित्य आजतक 2023 की बातचीत में मनोज ने कहा कि बीच में उन्होंने मेनस्ट्रीम फिल्में करनी इसलिए छोड़ दीं क्योंकि उन्हें एक कमी लगी. इसे बताते हुए उन्होंने कहा, 'मेनस्ट्रीम फिल्में जो हों, आम लोगों से जुड़ी हों. साउथ की जितनी मेनस्ट्रीम फिल्में हैं, उनका नायक कितना भी बड़ा हो, वो लुंगी पहनता है. हिंदी फिल्मों में हमने कहीं न कहीं ये चीज खो दी है.' मनोज ने बताया कि उनकी अगली फिल्म 'भैयाजी' का नायक पूरी तरह से उतर भारत का नायक है. वो जनता का नायक है.
मनोज ने सिर्फ मंच पर बातचीत ही नहीं की, बल्कि उन्हें सुनने आई जनता का दिल भी खूब लगाए रखा. जहां उन्होंने अपनी फिल्मों के मशहूर डायलॉग बोले, वहीं जनता की डिमांड पर 'वो पुराने दिन' गीत भी गाकर सुनाया.
अच्छा गाने के पीछे वजह बताते हुए मनोज ने कहा, 'पीयूष मिश्रा का शिष्य हूं मैं. वो हमारे थिएटर ग्रुप में होता था. वो संगीत का गुंडा था, लात मार-मारकर हमारे सुर ठीक किया करता था. और अगर हम गलती करते थे तो चलते शो में डांटता था. उसके हम शिष्य रहे और दोस्त भी हैं. हमने बड़े साल 'एक्ट 1' नाम की एक ड्रामा ग्रुप में साथ गुजारे हैं.' जाते-जाते मनोज ने जनता को अपनी फेवरेट कविता, रामधारी सिंह दिनकर की 'कृष्ण की चेतावनी' भी सुनाई.