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अतीत की तह में पैठ खुद को उधेड़ने वाली लेखिका हैं साहित्य की नोबेल पुरस्कार विजेता एनी अरनो

बेबाकी, साफगोई, बारीकी और ईमानदारी से लिखी गई अरनो की कृतियों को हमेशा नारीवाद से जोड़कर देखा गया. अरनो ने इसे कभी छिपाया भी नहीं. वे मानती हैं कि 'मेरा काम राजनीतिक है'

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एनी अरनोः साहित्य की नोबेल पुरस्कार विजेता 2022 [सौजन्यः अरनो सोशल मीडिया हैंडल]
एनी अरनोः साहित्य की नोबेल पुरस्कार विजेता 2022 [सौजन्यः अरनो सोशल मीडिया हैंडल]

वे अपने बारे में, अनुभव और अतीत के बारे में लिखती हैं और साहित्य का नोबल पुरस्कार जीत लेती हैं. भले ही यह सम्मान पाने में उनकी उम्र के आठ दशक और लेखन के पांच दशक बीत गए हों. पर क्या साल 2022 में साहित्य के नोबल पुरस्कार के लिए चुनी गईं फ़्रेंच लेखिका एनी अरनो ऐसा ही चाहती थीं? इसका साफ उत्तर है, नहीं! अगर ऐसा नहीं होता तो नोबेल की घोषणा के बाद संवाददाताओं से पुरस्कार के साथ मिलने वाली रकम को लेकर वह यह नहीं कहतीं कि "पैसों को लेकर मेरे साथ बड़ी दिक्कत है. पैसा मेरे लिए कोई लक्ष्य नहीं है... मुझे नहीं पता कि इसे अच्छी तरह से कैसे खर्च किया जाए."
बेबाकी, साफगोई, बारीकी और ईमानदारी से लिखी गई अरनो की कृतियों को हमेशा नारीवाद से जोड़कर देखा गया. अरनो ने इसे कभी छिपाया भी नहीं. वे मानती हैं कि 'मेरा काम राजनीतिक है'. फ्रांस के साहित्यिक प्रतिष्ठान से हमेशा अरनो को तिरस्कार का सामना करना पड़ा, क्योंकि वह 'अभिजात वर्ग के बाहर श्रमिक वर्ग की पृष्ठभूमि से आई एक महिला हैं,' ऐसा अरनो खुद कहती हैं; और अपने इस तिरस्कार के लिए अपने उस परिवेश और उस परवरिश को जिम्मेदार बताती हैं, जिसमें एक प्रसिद्ध लेखक बनने की 'असंभवता' है. लेकिन फिर अपने को सुधारते हुए वह कहती हैं- आप से ऊपर 'लोगों की दुनिया' है. 
नॉरमैंडी के छोटे से शहर यवेटोट में पली-बढ़ी अरनो के माता-पिता के पास संयुक्त रूप से किराने की एक दुकान और कैफे था. वे जब छोटी ही थीं, तो उन्होंने माता-पिता के बीच प्यार, खुलापन और मार-कुटाई सब देखी. थोड़ी बड़ी हुईं तो उन्हें रूएन और फिर बोर्डो के विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने के लिए भेज दिया गया, जहां से उन्होंने एक स्कूल शिक्षक की योग्यता के साथ आधुनिक साहित्य में उच्च डिग्री प्राप्त की.
एनी अरनो स्पष्ट रूप से लेखन की मुक्त शक्ति में विश्वास करती हैं. उनका काम समझौता नहीं है और सादा पर साफ-सुथरी भाषा में लिखा गया है. लेकिन क्या शुरू से ही ऐसा था? अरनो की पहली पुस्तक 'क्लीन्ड आउट' 1974 में प्रकाशित हुई. 'द फ्रोजन वुमन' की भी खूब चर्चा हुई पर 'अ मैन्स प्लेस' ने उन्हें साहित्य जगत में स्थापित कर दिया. यह संस्मरणात्मक और काफी हद तक आत्मकथात्मक लेखन था. वे इसके साथ ही अपने अतीत की तहों में न केवल गहरे तक पैठती गईं, बल्कि उन्हें यों उधेड़ना शुरू किया कि उनके साथ-साथ स्त्री-पुरुष के रिश्ते, परिवार और समाज सभी नंगे होते चले गए. वे नारी की पराधीनता या यों कहें कि उस पर सामाजिक पारिवारिक दबावों का विद्रोही पर नरम स्वर बन गईं.
 Nobelprize.org के अनुसार, "'अ मैन्स प्लेस' पुस्तक उनकी 'साहित्यिक सफलता' थी और सौ पृष्ठों में उन्होंने अपने पिता और संपूर्ण सामाजिक परिवेश का एक ऐसा विवादास्पद चित्र उकेरा, जिसने उन्हें मौलिक रूप से गढ़ा था." हालांकि उन्होंने 'द ईयर्स', 'हैप्पनिंग', 'सिंपल पैसन', 'गेटिंग लॉस्ट', 'एक्सटिरियर्स', 'आई रिमेन इन डार्कनेस', 'थिंग्स सीन' और 'द पजेसन' जैसी कृतियों से भी खूब शोहरत कमाई, पर इन सबमें असली बात तो खुद का अतीत और उससे जुड़े अनुभव में कल्पना की चाशनी थी. 
पिता पर लिखी कृति की चर्चा के कुछ साल बाद ही अरनो ने अपनी मां से जुड़े संस्मरणों का शब्द-चित्र सा खींचा और इससे जो पुस्तक बाजार में आई उसका शीर्षक था 'ए वीमेन्स स्टोरी'. अरनो की यह पुस्तक उनके लेखन की प्रकृति के साथ कल्पना, समाजशास्त्र और इतिहास के बीच के स्थानांतरण पर एक महत्त्वपूर्ण व्याख्या सरीखी है. इसने अरनो को न केवल बतौर शिक्षक, लेखक, संस्मरणकार स्थापित किया बल्कि उनके लिए घर-परिवार के भीतर ही वह आकाश मुहैया कराया, जहां से वे अपने लिए लेखन का नया आकाश चुन सकती थीं. अपनी आत्म-कथात्मक, संस्मरणात्मक रचनात्रयी 'ए मैन्स प्लेस', 'ए वीमेन्स स्टोरी' और 'शेम' के माध्यम से अरनो न केवल अपने और अपने माता-पिता के अतीत में उतरती हैं, बल्कि उसमें समाहित जीवन की खोज करती हैं, और उस सामाजिक परिवेश का पता लगाती हैं, जिसमें उनका जीवन विकसित होता है.
साल 2020 में प्रकाशित 'अ गर्ल्स स्टोरी' (सेवन स्टोरीज़) की बात करें तो यह एक युवा महिला के पहले यौन अनुभव की कहानी है. जो मानती है कि उसे यह अनुभव उसके वांछित प्रेमी द्वारा प्राप्त होता है, जिससे उसे तृप्ति मिली, खुशी मिली. वह ऐसा रिश्ता बनाते समय खुश होती है, आनंदित होती है, अपमानित महसूस नहीं करती. लेकिन, बाद में उसका मज़ाक उड़ाया जाता है, दूसरों द्वारा प्रताड़ित किया जाता है, जो मानते हैं कि उसने खुद को बदनाम किया. जिसे वह अपना दोस्त समझती थी, अब उसके साथ 'कुछ नहीं' जैसा व्यवहार करती है. उसे शर्म आती है. लेकिन क्या यह शर्म उसकी है? या यह इस बात का प्रतिबिंब है कि उससे क्या अपेक्षा की जाती है?
एनी अरनो 2016 में फ्रेंच में प्रकाशित इस पुस्तक के बारे में लिखती हैं, "ऐसी बातों को मानने का मतलब है कि उन सभी व्याख्याओं के विध्वंस के लिए सहमत होना जो मैंने वर्षों से इकट्ठी की हैं."

मेरा लेखन राजनीतिक हैः एनी अरनो [ Photo: Getty Images ]

यह पुस्तक एक किशोर-किशोरी के रूप में अरनो के यौन मुठभेड़ का एक विवरण है, जिसमें वे उन घटनाओं के पुनर्निर्माण के साथ ही उससे जुड़ी भावनाओं का भी पुनर्निर्माण करती हैं और यह उम्मीद करती हैं कि भावनात्मक इतिहास सबसे व्यक्तिगत होगा, सबसे सच्चा होगा. यह एक इतिहासकार होने की चुनौती सदृश है या फिर एक संस्मरणकार की सटीकता की वह चुनौती है, जिसे यह जानना है कि उसने तब क्या महसूस किया- और वह अब भी क्या महसूस करती है- अरनो के शब्दों में, 'वास्तव में ऐसी भावनाएं और शब्द भीतर से आते हैं.'
अरनो की यह कहानी 1958 की गर्मियों के आसपास घूमती है, जब अठारह वर्षीय एनी अरनो उत्तरी फ्रांस में एक शिविर में परामर्शदाता के रूप में काम कर रही होती हैं. वह अपने को 'एस' कहती हैं. इस शहर में पहली बार आश्रित और भोलीभाली वह लड़की अपने पिता के साथ लूर्डेस की यात्रा के अलावा मुश्किल से इससे पहले घर से बाहर निकली है. शिविर में ही वह एक आदमी पर एकतरफा फिदा हो जाती है, जिसे वह 'एच' कहती है. मार्लन ब्रैंडो की तरह दिखने वाले उस शख्स पर उसे क्रश है. उसे इस बात की परवाह नहीं है कि अन्य महिला परामर्शदाता एक-दूसरे से बड़बड़ाते हैं कि वह आदमी सब कुछ हो सकता है, पर उसके दिमाग नहीं है. जबकि 'एस' उसके बारे में एक 'महादूत' के रूप में सोचती है.
उसे 'एच' की ओर कौन सी चीज आकर्षित करती है, यह जानने की जरूरत है. किसी ने भी उसे अब से पहले इतनी 'गहरी नज़र' से कभी नहीं देखा. वे दोनों एक काउंसलर की पार्टी में नृत्य करते हैं. आगे क्या होता है इसके लिए 'प्रलोभन' सही शब्द नहीं है. लेकिन अरनो इन घटनाओं को कोई भी नाम नहीं देती हैं. इसकी बजाय, वह स्पष्ट रूप से वर्णन करती हैं कि वह अपने कमरे में 'एच' का अनुसरण कैसे करती हैं, कैसे वह अपनी जीन्स के माध्यम से अपने पेट पर उसके... को महसूस करती हैं...वह स्वयं क्या करती हैं और उसके साथ क्या होता है, इसमें कोई अंतर नहीं है. जल्द ही....का एक मोटा जेट उसके चेहरे पर फूटता है, जो उसके नथुने में रच बस जाता है.' यहां अरनो भाषा और वाक्य की शुद्धता से अधिक खुशी पैदा करने वाली भावनाओं को व्यक्त करती हैं, जिनमें 'एच' के साथ भस्म हो जाने के लिए उनकी बेताब ख्वाहिशें और अंतहीन इच्छाएं शामिल हैं.
ध्यान रखें ऊपर अंकित डॉट्स उन शब्दों के लिए लगाए गए हैं, जिन्हें हिंदी में लिख पाना भी अश्लील है. अरनो एक असामान्य संस्मरणकार हैं, वह अपनी याददाश्त पर भरोसा नहीं करती हैं. वह फर्स्ट पर्सन में लिखती हैं, और फिर अचानक स्विच करती हैं और दूर से अपने बारे में बोलने लगती हैं. वह खुद को '58 की लड़की' या 'एस' कहती हैं. कभी-कभी तो ऐसा लगता है, जैसे वो किसी पुरानी तस्वीर या किसी फिल्म के सीन में खुद को देख रही हों. वह हमें बताती हैं कि वह कब कहानी में खो रही हैं, और कहां उनकी याददाश्त खाली हो जाती है. अरनो अतीत को केवल प्रकट ही नहीं करती हैं - बल्कि वह इसके लिए किसी भी आधिकारिक पहुंच का ढोंग भी नहीं करतीं. वह कहती हैं,  "लिखने का क्या मतलब है, अगर चीजों का पता नहीं लगाना है?"
अरनो अपने उद्देश्य में कामयाब रही हैं. उनके लिखे और बोले को अब पूरी दुनिया सुन रही है. प्यार, यौन संबंध, गर्भपात और शर्म पर उनके विचारों की अपनी अहमियत है. नोबेल साहित्य समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने जैसा कहा भी है कि "अरनो कठोर सच्चाइयों का सामना करने से नहीं डरतीं. वह उन चीजों के बारे में लिखती हैं, जिनके बारे में कोई और नहीं लिखता है. उदाहरण के लिए गर्भपात, ईर्ष्या, एक परित्यक्त प्रेमिका के रूप में उनके अनुभव आदि. मेरा मतलब है, वास्तव में कठिन अनुभव." स्टॉकहोम में पुरस्कार की घोषणा के बाद अरनो के लिए ओल्सन ने अपनी पहले कही गई बात को आगे बढ़ाते हुए फिर कहा, "और वह इन अनुभवों के लिए शब्द देती हैं, जो बहुत ही सरल और प्रभावी हैं. वे छोटी किताबें हैं, लेकिन वास्तव में वे दौड़ती हैं."
इस पुरस्कार के बाद अरनो साल 1901 से 2022 के बीच 119 उन महान साहित्यकारों में शुमार हो गई हैं, जिन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है. यह एक ऐतिहासिक मान्यता है, जो उस व्यक्ति को सम्मानित करती है, जिसने साहित्य के क्षेत्र में आदर्श और उत्कृष्ट काम किया है. सबसे कम उम्र में यह पुरस्कार रुडयार्ड किपलिंग को 1907 में मिला था, तब वे केवल 41 साल के थे. यह पुरस्कार पाने वाली सबसे उम्रदराज शख्सियत डोरिस लेसिंग थीं, जिन्हें किपलिंग से ठीक 100 साल बाद 2007 में जब वे 88 साल की थीं, तब यह पुरस्कार दिया गया था. पारंपरिक रूप से यह पुरस्कार यूरोसेंट्रिक रहा है. एनी अरनो को इस साल 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में एक औपचारिक समारोह में किंग कार्ल सोलह गुस्ताफ से साहित्य का नोबेल प्राप्त होगा. यह तारीख डायनामाइट के आविष्कारक और इस पुरस्कार के संस्थापक वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की मृत्यु से जुड़ी है. 
अरनो अब चाहें या नहीं, नोबेल पुरस्कार के तहत उन्हें 196 ग्राम का एक गोल्ड मेडल, जिसमें 150 ग्राम शुद्ध सोना होता है, एक प्रमाणपत्र और 10 मिलियन स्वीडिश क्रोनर, यानी लगभग $911,400 डॉलर जिसे रुपए में बदलें तो लगभग 7 करोड़ 48 लाख 78 हजार की पुरस्कार राशि मिलेगी.
बधाई 82 साल की उत्साही युवती, एनी अरनो! लड़ती रहें, लिखती रहें.

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