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लेखक और डायरेक्टर नीरज पांडे ने बताया गालिब डेंजर क्यों और कैसे

नीरज ने कहा कि एक दिन मुंबई में वे किसी मीटिंग से निकले थे. मीटिंग बांद्रा में थी, वहां से वापस लौटते हुए जब वे एक ट्रैफिक सिग्ननल पर रूके तो उन्हें ये किताब लिखने का ख्याल आया था.

नीरज पांडे नीरज पांडे

e साहित्य आजतक के मंच पर मशहूर स्क्रीनराइटर, लेखक और डायरेक्टर नीरज पांडे ने शिरकत की. नीरज पांडे कई हिट फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं लेकिन मिर्जा गालिब को लेकर प्यार और सम्मान के चलते उन्होंने एक किताब भी लिख डाली है. आजतक के सीनियर एक्जक्यूटिव ए़डिटर और क्राइम हेड शम्स ताहिर खान से नीरज पांडे ने इस किताब यानि गालिब डेंजर के बारे में बात की थी.

नीरज ने कहा कि एक दिन मुंबई में वे किसी मीटिंग से निकले थे. मीटिंग बांद्रा में थी, वहां से वापस लौटते हुए जब वे एक ट्रैफिक सिग्ननल पर रूके तो उन्हें ये किताब लिखने का ख्याल आया था. नीरज पांडे ने कहा कि मैं थोड़ा दिलचस्प टाइटल सोच रहा था चूंकि गालिब की शायरी से मुझे बेहद प्यार रहा है और वे मेरे लिखने के स्टायल से भी मैच कर रहा था इसलिए मैंने इस किताब का नाम 'गालिब डेंजर' रखा था. मेरी यही कोशिश थी कि अपनी फिल्मों की तरह इस किताब के जरिए भी कुछ नया और रोचक लोगों को देने की कोशिश करूं.

लंबी कहानियों के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स हैं बेस्ट: नीरज पांडे

उन्होंने आगे कहा कि गालिब का लिखा हुआ ऐसा है कि वो किसी भी जोन और किसी भी दौर में फिट बैठ सकता है और आज भी उनकी शायरियां काफी प्रासंगिक है. जिंदगी की सभी परेशानियों का हल आपको गालिब की शायरियों में मिल जाएगा. बता दें कि 'गालिब डेंजर' नाम की इस किताब की कहानी कामरान खान नाम के एक युवा टैक्सी ड्राइवर पर आधारित है जो मुम्बई शहर में कुछ बड़ा करने की कोशिश करता है लेकिन कामरान की जिंदगी तब बदल जाती है जब वह मिर्जा नामक एक डॉन को मरने से बचा लेता है.

नीरज ने इसके अलावा ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बारे में भी बात की थी. उन्होंने कहा था कि ऐसी कई कहानियां होती हैं जिन्हें आप 2 घंटे में नहीं कह सकते हैं. इसके लिए आपको 6-7 घंटों की दरकार होती है. ये फॉरमेट ऐसी कहानियों के लिए एकदम सही है. ऐसे कई विषय हैं जिन पर फिल्म नहीं बनाते हैं लेकिन फिल्ममेकर्स और स्टोरीटेलर्स के तौर पर आप कई अलग-अलग तरह की कहानियां दिखाना चाहते हैं और ऐसे में ये प्लेटफॉर्म्स काफी कारगर साबित होते हैं.

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