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ट्विटर पर पड़ने वाली गालियों पर बोले चेतन भगत- मैं चुप रहूं तो सबके लिए अच्छा हूं

एंकर अंजना ओम कश्यप ने चेतन भगत से पूछा कि आप ट्विटर पर राजनीति से जुड़ी बातों पर लिखते हैं. क्या एक सेलेब्रिटी के रूप में आपको इसकी वजह से नुकसान होता है?

चेतन भगत चेतन भगत

भारत के मशहूर लेखक चेतन भगत e-साहित्य आजतक का हिस्सा बने. इस मौके पर उन्होंने एंकर अंजना ओम कश्यप से बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने हिंदी साहित्य, अपनी किताबों, प्रधानमंत्री मोदी संग ट्विट्टर पर होने वाली राजनीति पर भी अपने विचार रखे.

सेलेब के रूप में पॉलिटिक्स के बारे में बोलने पर होता है नुकसान

एंकर अंजना ओम कश्यप ने चेतन भगत से पूछा कि आप ट्विटर पर राजनीति से जुड़ी बातों पर लिखते हैं. क्या एक सेलेब्रिटी के रूप में आपको इसकी वजह से नुकसान होता है?

इसपर चेतन बोले- हां मैं कह सकता हूं कि आर्थिक नुकसान होता है. मैं चुप रहूं तो लोग बोलेंगे कि चेतन बहुत अच्छा है. बोल दूं तो बुरा हो जाता हूं. इसलिये मैं कोशिश करता हूं कि बैलेंस बनाकर रखूं.. लेकिन कई बार इसका नुकसान हो सकता है. फैन्स हो सकता है जिन्हें राजनीति पसंद नहीं है, वो मुझे कुछ आकर बोलेन कि ऐसे मत करो. वरना मुझे तो लेखक बनना अच्छा लगता है. मुझे पैसे कमाना भी पसंद है. लेकिन मैं पैसे कमाने वाला लेखक नहीं हूं. अगर मैं पैसों के पीछे भागने वाला होता तो मैं बैंक में नौकरी तो पहले कर ही रहा था.

चेतन ने आगे हिंदी साहित्य के बाते में बात करते हुए कहा- हिंदी बहुत अच्छा करेगी. हमें बस चीजों को बदलना पड़ेगा. अमेजन, नेटफ्लिक्स तक हिंदी पहुंच गई है. e-साहित्य आजतक जैसे मंच इसके लिए जरूरी हैं. लोगों को लगता था कि भारत की भाषाओं का क्या होगा और देखिए ये सभी फर्स्ट क्लास चल रही हैं.

मेरा कम्पटीशन लेखकों से नहीं

चेतन ने बातों बातों में कहा कि मैं गालिब नहीं हूं. इसपर उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं नहीं हूं गालिब लेकिन ये सच है कि दुनिया को गालिब की जरूरत है. उसके लिए गालिब जरूरी है, सलमान रुश्दी भी जरूरी है, चेतन भगत भी जरूरी है और अरुंधती रॉय भी जरूरी है. मेरा कम्पटीशन दूसरे लेखकों से नहीं है. व्हाट्सएप से है, इंस्टाग्राम से है टिक टॉक से है. हम चाहते हैं कि भारत का यूथ किताब उठाएं.

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