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वामपंथियों ने केवल मेरा नुकसान किया, खरी खरी बात बोलना वामपंथियों की बपौती नहीं: पीयूष मिश्रा

पीयूष ने कहा कि कहा जाता है कि सन्नाटे में आर्टिस्ट अच्छा काम कर सकते हैं लेकिन सॉलिट्यूड और कैद में फर्क होता है. इस वक्त जो जेहन से निकल रहा है वो लिखा नजर नहीं आता. वो कुछ और ही नजर आता है.

पीयूष मिश्रा (फोटो- इंस्टा) पीयूष मिश्रा (फोटो- इंस्टा)

ई-साहित्य आज तक 2020 के डिजिटल मंच पर रविवार को दिग्गज कलाकार पीयूष मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए. पीयूष मिश्रा ने आज के माहौल से लेकर अपनी गायकी और लेफ्टिज्म पर अपनी विचारधारा तक तमाम चीजों के बारे में बात की. पीयूष मिश्रा ने लॉकडाउन के इस वक्त के बारे में कहा, "वक्त बढ़िया निकल रहा है. हार तो नहीं मान सकते. सामना नहीं कर सकते क्योंकि इससे लड़ने के हथियार नहीं हैं."

पीयूष ने कहा कि कहा जाता है कि सन्नाटे में आर्टिस्ट अच्छा काम कर सकते हैं लेकिन सॉलिट्यूड और कैद में फर्क होता है. इस वक्त जो जेहन से निकल रहा है वो लिखा नजर नहीं आता. वो कुछ और ही नजर आता है. अभी ऐसा वक्त है कि कोई आपकी कनपटी पर बंदूक रखकर कहे कि लिखो. पीयूष मिश्रा ने अपनी परफॉर्मेंस के बारे में कहा, "मैं आर्टिस्ट के तौर पर ग्रो करता रहता हूं इसलिए अपनी किसी परफॉर्मेंस को बेस्ट नहीं मानता हूं. खुद को बहुत अच्छा सिंगर नहीं मानता हूं. अगर रोज एक ही गाना गाने को कहा जाएगा तो तीसरे दिन खराब गाने लगूंगा. गाना बंद नहीं करूंगा."

वामपंथ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पीयूष मिश्रा ने कहा, "वामपंथ नाम की चीज से मेरा नमस्कार. मैं थक चुका हूं. वामपंथ ने बहुत बुरा किया है मेरा. सच बोलना और खरी-खरी बोलना वामपंथ की बपौती नहीं है. हो सकता है कि किसी के लिए ठीक रहा हो लेकिन वामपंथ ने मेरा बहुत बुरा किया है." पीयूष ने कहा कि मुझे अगर लगता है कि ये बात मुझे नहीं कहनी चाहिए लेकिन मैं कहना चाहता हूं तो मैं वहां से चला आता हूं उठ कर.


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कई बार लोग नाराज हो जाते हैं.

अपने स्पॉन्टेनियस होने के बारे में पीयूष ने कहा कि स्पॉन्टेनियस होना अगर मेरी बुराई है तो ये मेरी खासियत भी है. कई बार मेरी इस आदत का लोग बुरा मान जाते हैं. पीयूष ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो मैं उन्हें वक्त देता हूं तो कई बार लोग वापस आ जाते हैं. लेकिन फिर कुछ लोग वापस नहीं आते तो मैं उन्हें जाने देता हूं. मैं अपनी तहजीब को बहुत लगाम देकर चलता हूं लेकिन फिर भी आप हर किसी को संतुष्ट करके नहीं चल सकते.

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