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सीन की डिमांड पर कैसे किरदार के डायलॉग लिखते थे जावेद अख्तर, बताया तरीका

जावेद अख्तर से इस दौरान पूछा गया था- फिल्मों के लिए लिखते हुए सीन की डिमांड और जावेद अख्तर खुद के लिए कितना लिखते थे? जावेद अख्तर ने कहा कि अगर मैं एक जालिम का डायलॉग लिख रहा हूं तो मैं सोचूं कि वे इंसान कैसा सोचता होगा.

जावेद अख्तर जावेद अख्तर

कोरोना के बीच ई- साहित्य आजतक में हस्तियां कोरोना वॉरियर्स को सलाम कर रही हैं. इसी आयोजन में शुक्रवार को जावेद अख्तर पहुंचे. बॉलीवुड के मशहूर राइटर जावेद अख्तर ने इस दौरान डायलॉग लिखने के कुछ तरीकों पर बात की. उन्होंने बताया कि सीन की डिमांड पर वे कैसे किरदार के डायलॉग लिखते थे.

'कैरेक्टर का होता है डायलॉग'

जावेद अख्तर से इस दौरान पूछा गया था- फिल्मों के लिए लिखते हुए सीन की डिमांड और जावेद अख्तर खुद के लिए कितना लिखते थे?
जावेद अख्तर ने कहा, 'जब मैं डायलॉग लिख रहा हूं तो सिर्फ डायलॉग लिख रहा हूं. अगर मैं एक जालिम का डायलॉग लिख रहा हूं तो मैं सोचूं कि वे इंसान कैसा सोचता होगा. जैसा कि एक्टर किरदार को लेकर सोचते हैं. हम सोचते हैं कि ये आदमी ऐसे समय में किस तरह से बात करेगा, क्या सोचेगा. ये डायलॉग आपका नहीं होना चाहिए, वे उस कैरेक्टर का ही होगा.'


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गीत में भी कैरेक्टर के होते हैं शब्द
उन्होंने कहा,' इसी तरह गीत में भी होता है. सोचते हैं कि ये गीत कौन गा रहा है- यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर गा रहा है, किसान गा रहा है, मां लोरी गा रही है...उस लिहाज से सबकुछ बदलता है. शब्दावली का चयन उस तरीके से होता है.''

'पर सोच राइटर की होती है और वही कैरेक्टर बोलता है'

इसके साथ ही जावेद अख्तर ने कहा, 'पर ये सबकुछ कहने के बाद अल्टीमेटली आप ही सोच रहे होते हैं. तो जो राइटर सोचने के काबिल है वही लिख सकता है. जो उसका बुनियादी सोच है वही लिख सकता है. वो जैसा समझेगा वही लिख सकता है. कभी-कभी आप अच्छे कैरेक्टर के बारे में कोई बात सुनते हैं जो उम्मीद नहीं कि एक अच्छा व्यक्ति बोल सकता है, वो राइटर की सोच है. राइटर की सोच और उसका विश्वास कैरेक्टर पर होता.'

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