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कौन हैं लक्ष्मी अग्रवाल? पर्दे पर जिसकी भूमिका निभा रहीं दीपिका पादुकोण

आखिर कौन हैं लक्ष्मी अग्रवाल जिनकी जिंदगी को पर्दे पर दिखाएंगी दीपिका पादुकोण. आइए जानते हैं लक्ष्मी अग्रवाल के बारे में.

लक्ष्मी अग्रवाल लक्ष्मी अग्रवाल

दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' जल्द ही बड़े पर्दे रिलीज होने वाली है. दीपिका इस फिल्म में एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं. आइए जानते हैं आखिर कौन हैं लक्ष्मी अग्रवाल जिनकी जिंदगी को पर्दे पर दिखाया जा रहा है.

लक्ष्मी अग्रवाल एक एसिड अटैक सर्वाइवर हैं. एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली लक्ष्मी दिल्ली की रहने वाली हैं. लक्ष्मी का सपना गायक बनने का था. लेकिन कम उम्र में ही उनके साथ हुए एक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी ही बदलकर रख दी.

32 साल का एक युवक लक्ष्मी से शादी करना चाहता था, लक्ष्मी उस वक्त सिर्फ 15 साल की थी. उसने युवक से शादी करने से इनकार कर दिया. वो युवक अक्सर लक्ष्मी का पीछा करता था. आखिरकार सारी कोशिश विफल होने के बाद साल 2005 में उस युवक ने लक्ष्मी पर तेजाब (एसिड) फेंक दिया.

लक्ष्मी ने एक इंटरव्यू में अपनी दर्दनाक कहानी बयां की है. लक्ष्मी ने बताया था, 'जिस वक्त मेरे ऊपर तेजाब फेंका गया, उस वक्त ऐसा लगा जैसे मेरे पूरे शरीर पर किसी ने आग लगा दी हो. एसिड से जलकर मेरी पूरी स्किन मोम की तरह टपकने लगी.'

लक्ष्मी ने बताया, 'मैंने अटैक के बाद जब पहली बार खुद को शीशे में देखा तो मुझे ऐसा लगा कि मेरा सबकुछ बर्बाद हो चुका है.' साल 2006 में लक्ष्मी ने एक पीआईएल डालकर सुप्रीम कोर्ट से एसिड बैन करने की मांग की. लक्ष्मी एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों के लिए बोलती हैं.

लक्ष्मी अब स्टॉप सेल एसिड की संस्थापक है. ये एसिड हिंसा और एसिड की बिक्री के खिलाफ एक अभियान है. लक्ष्मी ने #StopSaleAcid के साथ इस अभियान की शुरुआत की जिसमें उन्हें राष्ट्रव्यापी समर्थन मिला. लक्ष्मी को महिला और बाल विकास मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय और उनके अभियान स्टॉप सेल एसिड के लिए यूनिसेफ से 'अंतर्राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण पुरस्कार 2019' भी मिला है.

इसके अलाव लक्ष्मी को यूएस फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा द्वारा 2014 का अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मान पुरस्कार भी मिल चुका है. 'Stop Acid Attacks' कैंपेन चलाने के दौरान लक्ष्मी की मुलाकात आलोक दीक्षित नाम के शख्स से हुई. दोनों एक दूसरे को चाहने लगे. आलोक दीक्षित इस कैंपेन के फाउंडर थे. दोनों की पिहु नाम की एक बेटी भी है. लेकिन बेटी के जन्म कुछ साल बाद ही लक्ष्मी और आलोक ने अलग होने का फैसला कर लिया.

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