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कॉलेज के 'One Night Stand' ने बर्बाद कर दी महिला की जिंदगी, सालों बाद हुआ ये अंजाम

डॉक्टर्स को मेरे एचआईवी पॉजीटिव होने का पता चल गया, क्योंकि मेरी बच्ची के शरीर में मेरी ही एंटीबॉडीज थी, जैसा कि सभी बच्चे अपनी खुद की इम्यूनिटी बनाने से पहले करते हैं. खून में एचआईवी एंटीबॉडीज की मौजूदगी से ये साफ हो गया कि वो वायरस मेरे शरीर में था और अब बच्ची भी उसके संपर्क में आ गई थी.

World Aids Day: कॉलेज में 'वन नाइट स्टैंड' से हुई HIV पॉजिटिव Photo: Getty Images (Representational Image) World Aids Day: कॉलेज में 'वन नाइट स्टैंड' से हुई HIV पॉजिटिव Photo: Getty Images (Representational Image)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कॉलेज में तेज सिरदर्द था एड्स का पहला लक्षण
  • वन नाइट स्टैंड के साथ HIV संक्रमित हुई महिला

एड्स एक ऐसी लाइलाज बीमारी है जिसके लक्षण शरीर में कई सालों तक छिपे रह सकते हैं. इस बीमारी का सामना कर रही एक महिला की दुखभरी कहानी पत्थर दिल इंसान का भी सीना पिघला देगी. कॉलेज के दिनों में हुई एक गलती से इस महिला की पूरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई. पढ़िए एड्स दिवस पर एक महिला की कहानी उसी की जुबानी-

साल 2001 की बात है. मुझे एक दिन अचानक तेज सिरदर्द हुआ. मुझे और मेरे रूममेट को लगा कि बहुत देर तक भूखा रहने की वजह से ऐसा हो रहा है तो हम कैफेटेरिया चले गए. हालांकि, कुछ देर बाद मैं बेहोश हो गई.

कैंपस के हेल्थ सेंटर की नर्स ने मुझे आश्वस्त किया कि मैं प्रेग्नेंट नहीं हूं, लेकिन मुझे यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) है. इसके बाद मुझे कुछ एंटीबायोटिक्स के साथ वापस घर भेज दिया गया. हालांकि, कुछ हफ्तों बाद मेरा वजन अचानक से घटने लगा. मैं बहुत ज्यादा बीमार पड़ गई. लोग मेरा मजाक उड़ाने लगे कि मैं ड्रग्स ले रही हूं. मैं बहुत बेचैन और घबराई हुई थी. मुझे लग रहा था कि जैसे मेरे साथ कुछ बहुत बुरा होने वाला है, लेकिन मैंने मन से डर को निकाला. दो महीने बाद मुझे अचानक अच्छा महसूस होने लगा.

उस रहस्यमयी बीमारी के लगभग एक साल बाद 2002 के अंत में मैं प्रेग्नेंट हो गई. इसकी जांच के लिए मैंने एक लोकल हेल्थ डिपार्टमेंट से संपर्क किया. वो इतने व्यस्त थे कि मुझे पहली प्रेग्नेंसी की जांच के लिए बहुत आगे की तारीख दी. ना तो कोई मेरी केयर करने वाला था और ना टेस्टिंग हुई थी. जुलाई 2003 में एक लोकल अस्पताल में मैंने एक बच्ची को जन्म दिया और वहां ऑटोमेटकली उसके सभी टेस्ट हो गए.

तभी डॉक्टर्स को मेरे एचआईवी पॉजीटिव होने का पता चला, क्योंकि मेरी बच्ची के शरीर में मेरी ही एंटीबॉडीज (एक ऐसा प्रोटीन जो इंफेक्शन्स से लड़ता है) थी, जैसा कि सभी बच्चों में अपनी खुद की इम्यूनिटी बनने से पहले होता है. खून में एचआईवी एंटीबॉडीज की मौजूदगी से ये साफ हो गया कि वो वायरस मेरे ही शरीर में था. कुछ महीनों तक मैंने अपनी बच्ची की रेगुलर जांच कराई और उसे एंटीरेट्रोवायरल मेडिकेशंस पर रखा ताकि मेरी बच्ची के शरीर में उसकी अपनी एचआईवी एंटीबॉडीज विकसित ना हों. अगर उसके शरीर में खुद की एंटीबॉडीज बन जातीं तो इसका मतलब होता कि वह भी एचआईवी पॉजिटिव हो गई. हालांकि, टेस्टिंग करने पर उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई.

Kamaria Laffrey

इस दौरान मेरा दिमाग एक बार फिर उस घटनाक्रम में चला गया जब कॉलेज में मैं बीमार पड़ गई थी और मेरा वजन तेजी से कम होने लगा था. उस वक्त मेरे दिमाग में कभी ये बात नहीं आई कि ये एचआईवी संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं. ये सब होने से कुछ हफ्तों पहले ही मैंने एक वन नाइट स्टैंड किया था. मैंने असुरक्षित यौन संबंध (अनप्रोटेक्टेड सेक्स) बनाया था.

महिला ने कहा, 'मैंने उस शख्स को प्रोटेक्शन (कॉन्डम) का इस्तेमाल करने को कहा था. वो उठा और कमरे से बाहर चला गया, जैसे प्रोटेक्शन लेने गया हो. लेकिन मैंने इसकी जांच नहीं की. मैं बस उस पल को एंजॉय करना चाहती थी. अगली सुबह, मैंने बाथरूम में एक पैकेटबंद कॉन्डम देखा. इसलिए मैं जानती थी कि मुझे एचआईवी कैसे हुआ होगा. मैं बहुत डर चुकी थी और अपनी मौत के बारे में सोचने लगी थी.'

एचआईवी संक्रमण का पता लगने के बाद मुझे लगभग एक साल तक एड्स से पीड़ित लोगों की विशेष देखभाल करने वाला क्लीनिक नहीं मिला. फिर मैंने 'हेल्थ फैमिली' नाम के एक प्रोग्राम को चुना जिसने मुझे एक सामाजिक कार्यकर्ता से जोड़ा और बेटी की परवरिश के दौरान मुझे सहारा दिया. खुद को भावनात्मक रूप से आहत होने से बचाने के लिए मैंने पहले उन लोगों को अपने बारे में बताना शुरू किया जिनसे मेरी लंबे समय की पहचान नहीं थी. अगर वो मुझसे दूरी बनाते तो मैं ज्यादा आहत नहीं होती, क्योंकि मैं इसकी वजह जानती थी. जब वो मुझसे किनारा करते तो मैं इसे एक संकेत समझती थी कि वो लोग मेरे लिए मायने नहीं रखते हैं. कोई नहीं समझता था कि मैं एक क्रॉनिक हेल्थ डिसीज के साथ जी रही हूं.

फिर भी, मैंने जो कलंक महसूस किया, वो बहुत दर्दनाक था. कई बार ऐसा महसूस होता था कि जो मेरे साथ हुआ, उसके लिए मैं ही जिम्मेदार हूं और मैं प्यार के लायक नहीं हूं. लेकिन अपने परिवार की बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इस बीमारी के साथ स्वीकार किया और उनकी इसी केयर से मुझे फिर से एक बेहतर जिंदगी शुरू करने का भरोसा मिला.

अपने सामाजिक कार्यकर्ता के साथ मिलकर मैं एचआईवी संक्रमितों की एक कम्यूनिटी का हिस्सा बनी. जब मैंने वहां कई लोगों के अनुभव सुने तो मुझे महसूस हुआ कि हम में से बहुत से लोग आवाज दबाए हुए हैं, छिपे हुए हैं. इसके बाद मैंने खुद लोगों को अपनी कहानी बतानी शुरू की ताकि वो खुद को अकेला ना समझें. यह मेरे लिए शर्मिंदगी से बचने का एक जरिया बन गया. साल 2007 में मेरी कहानी एक लोकल अखबार में छपी. मैंने चर्च ग्रुप और कई स्कूलों के साथ उसे शेयर किया. मैंने लोगों को जागरुक करना शुरू किया कि इस बीमारी की चपेट में कोई भी आ सकता है.

Kamaria Laffrey

मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मैंने पहली बार एचआईवी के बारे में सुना था तो मैं बहुत डर गई थी. लेकिन मुझे इसकी चिंता भी थी. दरअसल मुझे ऐसा भरोसा था कि मेरे जैसे किसी शख्स को एचआईवी नहीं हो सकता है. जब मैंने पहली बार अपनी कहानी लोगों को सुनानी शुरू की तो मेरा ध्यान अपनी छोटी उम्र और सेक्सुअल एक्सपीरिएंस की कमी पर जाता था. मैं बार-बार उस रात के बारे में सोचने लगती थी. लेकिन उससे उबरने का कोई रास्ता नहीं था, मैं सिर्फ उस एक चीज के साथ काम कर सकती थी, जो मैंने सीखी थी.

मैं अब उस इंसान से प्यार करने लगी हूं जो मैं बन चुकी हूं. और सच यही है कि मैंने एक ऐसे इंसान के साथ वन नाइट स्टैंड किया जो बेहद आकर्षक था, वो भी उसके बारे में जाने बिना. इस गलती के लिए खुद को और उस इंसान को माफ करने में मुझे करीब पांच साल लगे. जब भी ऑडियंस में से कोई मुझसे उस शख्स के बारे में पूछता है तो मुझे उस पर गुस्सा आने लगता है. लेकिन मैं आशा करती हूं वो आज भी जिंदा हो, सलामत हो. मुझे आशा है कि उसे जो मदद चाहिए, वो मिल रही हो. उसे प्यार और एक हेल्दी रिलेशनशिप का अनुभव मिले.

साल 2012 में मैंने शादी की थी. एक ऐसे शख्स से जो खुद एचआईवी संक्रमितों के साथ रहता था. हमने हर कदम पर एक दूसरे को सपोर्ट किया. दुर्भाग्यवश 2019 में उनका निधन हो गया. इन दिनों मेरी बेटी स्वस्थ है और हाई स्कूल में पहुंची है. मैं दिन में एक गोली के साथ एचआईवी को मैनेज करती हूं. साल में दो बार डॉक्टर से इसकी जांच करवाती हूं. मैं वायरली सरपास्ड या अनडिटेक्टेबल हूं. यानी पार्टनर के साथ सेक्स करने से वायरस उसके शरीर में ट्रांसमिट नहीं होगा.

एड्स लाइलाज जरूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एचआईवी के साथ जीने वाले इंसान के लिए ये एक मौत की सजा है. इस क्रॉनिक डिसीज को मैनेज किया जा सकता है. इसके उपाय उपलब्ध है जिसके सहारे आप इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाकर वायरस को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं. लेकिन इसका कोई इलाज नहीं है. वायरस फिर भी आपके शरीर में रहेगा. लेकिन मौजूदा दौर में एचआईवी के साथ रहने वाले लोग सुरक्षा के साथ शारीरिक संबंध बना सकते हैं. बच्चे पैदा कर सकते हैं और एक खुशहाल जिंदगी जी सकते हैं.

 

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