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Fertility Increasing Tips: फर्टिलिटी में कैसे होगा सुधार? जानें PCOS से बचाव के तरीके

आजकल की स्ट्रेसफुल लाइफ में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है. हार्मोनल असंतुलन के कारण ओवरीज या अंडाशय प्रभावित होती हैं. हर महीने ओवरीज से एक एग निकलता है. ये सामान्य मासिक धर्म साइकिल का ही एक हिस्सा होता है. पीसीओएस की समस्या में एग ठीक से विकसित नहीं हो पाता या ओव्यूलेशन के दौरान बन नहीं पाता है.

Fertility Increasing Tips (photo dredit-  gettyimages ) Fertility Increasing Tips (photo dredit- gettyimages )
स्टोरी हाइलाइट्स
  • PCOS महिलाओं में होने वाली समस्या है
  • PCOS प्रजनन क्षमता पर कई तरह के प्रभाव डाल सकती है
  • इन टिप्स से प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है

आजकल की स्ट्रेसफुल लाइफ में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है. हार्मोनल असंतुलन के कारण ओवरीज या अंडाशय प्रभावित होते हैं. हर महीने ओवरीज से एक एग निकलता है. ये सामान्य मासिक धर्म साइकिल का ही एक हिस्सा होता है. पीसीओएस की समस्या में एग ठीक से विकसित नहीं हो पाता या ओव्यूलेशन के दौरान बन नहीं पाता है.

एक्सपर्ट का कहना है कि पीसीओएस की समस्या प्रजनन क्षमता पर कई तरह के प्रभाव डाल सकती है. ज्यादातर मामलों में, ओव्यूलेशन की समस्याएं बांझपन का कारण बनती हैं. टेस्टोस्टेरोन का प्रोडक्शन बढ़ने से या ओवेरियन फोलिकल्स का ठीक तरह से मैच्योर न होने के कारण ओव्यूलेशन नहीं हो पाता है. ओव्यूलेशन होने पर भी, एक हार्मोनल असंतुलन यूटेरस की परत को ठीक से विकसित होने से रोक सकता है. ओव्यूलेशन और मासिक धर्म अनियमित हो सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार, अनियमित मासिक धर्म होने से गर्भावस्था के दौरान कई समस्याएं हो सकती हैं. आइए जानते हैं एक्सपर्ट के अनुसार किस तरह से प्रजनन क्षमता में सुधार किया जा सकता है.

दवाओं की आवश्यकता हो सकती है- फर्टिलिटी ड्रग्स ऐसी दवाएं हैं जो ओव्यूलेशन को नियंत्रित या उत्तेजित करती हैं. जो महिलाएं ओव्यूलेशन की समस्याओं के कारण बांझपन की समस्या को झेल रही हैं, वे फर्टिलिटी ड्रग्स का इस्तेमाल कर सकती हैं. फर्टिलिटी ड्रग्स ओव्यूलेशन को उसी तरह से बढ़ाने में मदद करती हैं जैसे प्राकृतिक हार्मोन फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन करते हैं. ओव्यूलेट करने वाली महिलाएं बेहतर या एक्सट्रा एग के लिए भी इन दवाओं का इस्तेमाल करती हैं.

स्वस्थ वजन- स्वस्थ वजन बनाए रखने से गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्या कम हो जाती है. गर्भधारण के लिए आइडियल बीएमआई 18.5 और 24.9 के बीच है. यदि आपका बीएमआई ज्यादा है, तो बेबी प्लानिंग से पहले इसे कम कर लें. ऐसा माना जाता है कि गर्भावस्था की शुरुआत में 35 या उससे अधिक के बीएमआई में प्री-एक्लेमप्सिया होने का खतरा हो सकता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए एक खतरनाक स्थिति है. हाई बीएमआई होने से रक्त के थक्के, लॉन्ग लेबर, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज और इमरजेंसी सीजेरियन डिलीवरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाई बीएमआई से गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, डायबिटीज और मोटापा जैसी समस्याएं बच्चों में हो सकती हैं.

तनाव कम करना- गर्भधारण करने की कोशिश कर रही महिला पर तनाव का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इस प्रकार, मेडिटेशन, गाने सुनना, योग करना, वॉक पर जाना, एक्सरसाइज और पालतू जानवरों के साथ खेलना कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे तनाव को कम किया जा सकता है और प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.

पीसीओएस में सहायक प्रजनन तकनीकों की भूमिका- सहायक प्रजनन तकनीकों का उपयोग करके पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम वाले रोगियों के इलाज में इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट को एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करना पड़ता है. पीसीओएस के मरीजों में कई तरह की समस्याएं होती हैं, जैसे शरीर का वजन बढ़ना और हाइपरिन्सुलिनमिया. आईवीएफ ट्रीटमेंट के बाद एंडोमेट्रियल नियोप्लासिया, हाइपरिन्सुलिनमिया और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए मरीजों की पूरी तरह से जांच की जानी चाहिए.

बैलेंस डाइट का सेवन- एक्सपर्ट के अनुसार, फर्टिलिटी क दूर करने के लिए हेल्दी आहार लेना जरूरी है. आयरन और जिंक से भरपूर भोजन, हाई फाइबर वाली चीजें जैसे ब्रेड, ब्राउन राइस, सीड, कम कार्बोहाइड्रेट और हाई फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करें. अधिक फल और सब्जियों का सेवन करें, जैसे कि दाल और बीन्स. मीठी चीजें और ड्रिंक्स जैसे मिठाई, कुकीज और फिजी ड्रिंक्स और जंक फूड से बचने की कोशिश करें. पेस्ट्री, बिस्कुट, पाई और केक जैसी चीजों में पाए जाने वाले सैचुरेटेड फैट से बचें और अधिक अनसैचुरेटेड फैट जैसे एवोकाडो, नट्स, तैलीय फिश और सीड का सेवन करें.

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