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चेतन भगत सुनो, waxing से ज्यादा हमें periods का दर्द परेशान करता है...

चेतन भगत का नया नॉवेल 'वन इंडियन गर्ल' बाजार में आ गया है. टाइटल अच्छा है लेकिन अफसोस कि भारतीय लड़की का दर्द इसमें छलका नहीं... लगता है वे इन बातों पर गौर करना भूल ही गए...

चेतन भगत चेतन भगत

चेतन भगत का नया नॉवेल 'वन इंडियन गर्ल' बाजार में आ गया है. इस बार चेतन ने महिलाओं के नजरिए से दुनिया को देखने की कोशि‍श की है. लेकिन दर्द वो अच्छे से महसूस नहीं कर पाए हैं.

लड़कियों को वैक्स कराते हुए जिस दर्द का अनुभव होता है वो तो चेतन को समझ आ गया. मगर भारत क्या, दुनिया के किसी भी देश में औरत की जिंदगी से जुड़े कुछ बेहद कड़वे सच इसमें गायब हैं.

दरअसल चेतन सेलिब्रिटी लेखक बन गए हैं. वे जो लिखते हैं उस पर फिल्में बनती हैं, सितारे बुक लाॅन्च करने आते हैं और किताबें पढ़कर रोते भी हैं. उनकी इस किताब लाॅन्च पर कंगना कुछ इसी तरह रोईं थीं. चेतन ने एक वीडियो भी लाॅन्च किया, जिसमें उन्होंने बताया कि महिलाओं को वैक्स कराते हुए कितना दर्द होता है. हर महीने यह दर्द सहना कितनी हिम्मत का काम है.

साथ में यह भी कि वे महिलाओं का कितना आदर करते हैं.यह सब देखकर लगता है चेतन चकाचौंध भरी अपनी दुनिया में महिलाओं के दर्द को सही तरीके से शब्दों में पिरो नहीं पाए हैं. वे असलियत से कोसों दूर दिखते हैं. काश चेतन ने इन पर भी गौर किया होता तो समझते कि दर्द क्या होता है-

पीरियड्स
सोचिए आप 10-11 साल की लड़की हैं जिसे पीरियड्स शुरू हुए हैं. उस उम्र में सेनेट्री नैपकिंस की दुनिया, घूरती नजरों से बचकर बाथरूम जाना, क्लास में बच्चों से खुद को अलग महसूस करना और साथ में पेड़ू में उठता दर्द. माह दर माह इस प्रक्रिया में होने वाला दर्द, खून की कमी, चक्कर आना जो बच्ची सहती है वह होता है असली दर्द. अगले 40 साल के लिए उसे यह दर्द हर माह सहना होता है.

चेतन भगत के जलवे का दौर

प्रेगनेंसी
प्रेगनेंसी का सबसे बड़ा फायदा  है पीरियड्स से मु‍क्‍ति. पर इसके अपने चैलेंज हैं. आप जरा खुद को उस स्थ‍िति में रखकर देखिए कि गैस से आपका पेट फूल गया हो. कितनी बैचेनी होती है, ऐसा ही कुछ महिला पूरे समय सहती है. साथ में एसिडिटी, मॉर्निंग सिकनेस, एलर्जी और कई तरह की चुनाैतियां.

लेबर और बच्चे का जन्म
दुनिया का वह सबसे बड़ा दर्द, जिसे महिला सहती है. 7 से 8 घंटे का लेबर पेन. वो असहनीय दर्द जिसे वो ही सहती है और फिर बच्चे को जन्म देती है. अनेक बार इतना दर्द सहकर भी महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी नहीं दे पातीं. अगर आप किसी महिला से बात करेंगे तो वह आपको बता पाएगी कि किस तरह लेबर का दर्द, पीरियड्स के दर्द से लाख गुना ज्यादा होता है.

काश ये सब चेतन समझ पाते . आज ऐसा लगता है कि अगर हमें पुरुषों को समझना हो हम क्या कर सकते हैं- शायद दाढ़ी उगा लें, सिगरेट का कश लगा लें, मेल दोस्तों के साथ गपशप कर लें, उनकी बातों का हिस्सा बन जाएं पर उनके चैलेंजेस तो वही बता सकते हैं. कुछ इसी तरह की बात चेतन पर भी लागू होती दिखती है.

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