scorecardresearch
 

भारतीयों के लिए 'सेक्स' शब्द अब भी वर्जित

भारत के शहरी क्षेत्र में एक खास तबका भले ही यौन स्वतंत्रता का पक्षधर हो लेकिन उपन्यास ‘रिवाइज्ड कामसूत्र’ के लेखक रिचर्ड क्रास्टा के अनुसार अधिकतर भारतीयों के लिए सेक्स अब भी एक वर्जित शब्द है.

Advertisement
X
Richard_crasta
Richard_crasta

भारत के शहरी क्षेत्र में एक खास तबका भले ही यौन स्वतंत्रता का पक्षधर हो लेकिन उपन्यास ‘रिवाइज्ड कामसूत्र’ के लेखक रिचर्ड क्रास्टा के अनुसार अधिकतर भारतीयों के लिए सेक्स अब भी एक वर्जित शब्द है.

क्रास्टा के अनुसार, ‘मैंने यह दिलचस्प बात महसूस की है कि बड़ी संख्या में भारतीयों के लिए सेक्स अब भी एक वर्जित शब्द है. ऐसे में उन्हें इससे बाहर आने और उबरने में समय लगेगा.’

उन्होंने कहा, ‘शहरी भारतीय लोगों के बीच खासी यौन स्वतंत्रता है और वे इस संबंध में बात करने में तुलनात्मक रूप से अधिक उदार हैं. लेकिन भारत के निम्न मध्यम वर्ग के 95 प्रतिशत लोगों को अब भी इस संबंध में आपत्ति है.’

अमेरिका और भारत में अपना समय बिताने वाले क्रास्टा के अनुसार भारतीयों के लिए कौमार्य काफी महत्वपूर्ण है लेकिन पाखंड सबसे बड़ी समस्या है.

क्रास्टा ने कहा, ‘समाज का एक बड़ा तबका अब भी दमित है.’ युवा दंपतियों के निस्संतान रहने और संपन्नता की ओर ध्यान देने के बारे में उन्होंने कहा कि पैसे ने दमित सेक्स का स्थान ले लिया है.

Advertisement

करीब 20 साल पहले प्रकाशित इस उपन्यास का संशोधित संस्करण हार्परकोलिन्स इंडिया ने प्रकाशित किया है. यह पुस्तक पहले 11 देशों और आठ भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है. नए संस्करण के बारे में लेखक ने कहा कि मूल कहानी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. प्रस्तुतीकरण और गुणवत्ता में सुधार किया गया है.

किताब में एक छोटे शहर के रहने वाले मध्यमवर्गीय लड़के विजय प्रभु की कहानी है जो अंतत: अमेरिका पहुंचता है जो यौन स्वतंत्रता का मुखर समर्थक देश है.

Advertisement
Advertisement