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कृपया सड़क पर नहीं थूकें!

कहीं भी कुल्ला करने या थूकने से किसी को क्या परेशानी हो सकती है? सिवा इसके कि ऐसा करना भद्दा लगता है. कम ही लोग जानते होंगे कि आपके थूक में जितने बैक्टीरिया होते हैं उतने पूरी दुनिया में नहीं पाए जाते. शोध के मुताबिक बिना सोचे-समझे कहीं भी थूक दिया जाना संक्रमण का आसान तरीका मुहैया कराने जैसा है.

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कहीं भी कुल्ला करने या थूकने से किसी को क्या परेशानी हो सकती है? सिवा इसके कि ऐसा करना भद्दा लगता है. कम ही लोग जानते होंगे कि आपके थूक में जितने बैक्टीरिया होते हैं उतने पूरी दुनिया में नहीं पाए जाते. शोध के मुताबिक बिना सोचे-समझे कहीं भी थूक दिया जाना संक्रमण का आसान तरीका मुहैया कराने जैसा है.

वैज्ञानिकों की मानें तो हमारे शरीर में कोशिकाओं से 10 गुना ज्यादा बैक्टीरिया मौजूद होते हैं. शोधकर्ता इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि हमारा शरीर कितने बैक्टीरिया का वाहक है.

मुंह ही है जीवाणुओं का प्रवेश द्वार

-जीवाणुओं के शरीर में दाखिल होने में प्रवेश द्वार की भूमिका निभाने वाले मुंह में हमेशा कई तरह के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं. वैज्ञानिक भी इनके बारे में कम ही जानते हैं। लीपजिग स्थित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के मार्क स्टोनकिंग के मुताबिक 'हमारे लिए मुंह में पाए जाने वाले जीवाणुओं के बारे में जानना बेहद जरूरी है। इसके बाद ही हम शरीर में उनकी संख्या के बारे में बता पाएंगे.'

हर किसी में होते हैं अलग-अलग बैक्टीरिया

-लार में मौजूद बैक्टीरिया की जांच करने के लिए एशिया, अफ्रीका उत्तर व दक्षिण अमेरिका व यूरोप से 120 लोगों के लार के नमूने इकट्ठे किए गए थे. इसमें कई आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए। एक व्यक्ति व दो लोगों के तुलनात्मक अध्ययन में शरीर में मौजूद बैक्टीरिया में पर्याप्त विभिन्नता देखी गई. स्टोनकिंग के मुताबिक अलग-अलग खान-पान व सांस्कृतिक परिवेश इस विभिन्नता के पीछे जिम्मेदार होता है.

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