टीबी को हिंदी में क्षय रोग कहा जाता है. यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है. जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है. आमतौर पर टीबी की शुरुआत फेफड़ों से शुरू होती है.
सबसे ज्यादा टीबी फेफड़ों की ही होती है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है. यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर फैतली है लेकिन अनुवांशिक नहीं होती.
2 हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम आ रहा हो, कभी-कभार खून भी, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, इनमें से कोई भी लक्षण हो सकता है और कई बार कोई लक्षण नहीं भी होता.
जो खान-पान का ध्यान नहीं रखते उन्हें टीबी होने की संभावना ज्यादा होती है. क्योंकि कमजोर इम्यूनिटी से उनका शरीर बैक्टीरिया का वार नहीं झेल पाता. अंधेरी और सीलन भरी जगहों पर भी टीबी ज्यादा होती है क्योंकि टीबी का बैक्टीरिया अंधेरे में पनपता है.
फेफड़ों की टीबी के लिए बलगम जांच होती है. ध्यान रखें कि थूक नहीं, बलगम की जांच की जाती है. अच्छी तरह खांस कर ही बलगम जांच को दें. थूक की जांच होगी तो टीबी पकड़ में नहीं आएगी. इसी तरह शरीर जिस हिस्से में टीबी है उस हिस्से की जांच की जाती है. गौरतलब है कि समय पर टीबी की जांच और उपचार ना किए जाने की दशा में टीबी पूरे शरीर में फैल सकती है.
टीबी का इलाज पूरी तरह मुमकिन है. इलाज के शुरुआती दौर में भी जरूरी एहतियात बरतना चाहिए. मरीज इलाज के दौरान खूब पौष्टिक खाना खाए, एक्सरसाइज करे, योग करे और सामान्य जिंदगी जिए. समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहें.