रोजे रखने का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं होता है, बल्कि यह खुदा ही नहीं खुद की भी इबादत है. रोजे रखने का अर्थ जरूरतमंदों की मदद के साथ अपनी आदतों और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना भी होता है.जो लोग इस अस्था के साथ रोजे रखते हैं असल में उनका ही रोजा कामयाब माना जाता है.
(प्रतिकात्मक तस्वीर)