जापान के मेकअप आर्टिस्ट कोडो निशिमुरा जब हील्स में सामने आते हैं तो वह बिल्कुल भी किसी बौद्ध भिक्षु की तरह नहीं लगते हैं.
एक प्रेजेंटेशन के दौरान वह दर्शकों के सामने एक बार स्मोकी आईशैडोज, लैशेज, आईलाइनर में अपने फैन्स के सामने आते हैं तो दूसरी बार एक साधारण से बौद्ध भिक्षु के रूप में.
टोक्यो मंदिर में कोडो के पिता प्रमुख बौद्ध भिक्षु हैं और कोडो वहां अपने पिता की अनुष्ठानों में मदद करते हैं. बौद्ध भिक्षुओं के साधारण से रोब में उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है.
किसी को एक बार गलतफहमी तक हो सकती है कि वह कोई डबल ऐक्ट कर रहे हैं लेकिन
29 वर्षीय निशिमुरा को अपनी दो अलग-अलग पहचानों से कोई परेशानी नहीं है.
निशिमुरा प्रमुख तौर पर एक मेक-अप आर्टिस्ट हैं. उनके कस्टमर्स में बड़े-बड़े पॉपस्टार्स से लेकर ब्यूटी क्वीन्स शामिल हैं.
वह ज्यादातर समय अमेरिका में ही बिताते हैं जहां पर पहली बार उनका मेक-अप के लिए उनका पैशन खुलकर सामने आया था.
निशिमुरा बताते हैं, जब मैं बच्चा था तो दुनिया से इस राज को छिपाकर रखता था. मैं बाथरूम में ही सारे प्रयोग करता था. मैं अपनी मां के आईशैडो बॉक्स को लेकर जाता था और अपने चेहरे पर लगाकर देखता था. लेकिन मैं एक जोकर की तरह दिखता था.
जब कोडो पढ़ाई के लिए जापान से अमेरिका पहुंचे तो उन्होंने पहली बार मस्कारा और आईलाइनर खरीदा. इसके बाद एक मेकअप आर्टिस्ट के साथ इंटर्नशिप के साथ जॉब शुरू कर दी.
करियर चुनाव को लेकर कोडो को जब पैरेंट्स का भी सपोर्ट मिल गया तो उन्हें काफी हैरानी हुई.
लेकिन मेक-अप आर्टिस्ट बनने के बाद कोडो ने महसूस किया कि अभी भी किसी चीज की कमी है. बौद्ध मठ में कोडो की परवरिश हुई थी.
कोडो कहते हैं, 'मैं कोई भी फैसला लेने से पहले यह जानना चाहता था कि बौद्ध भिक्षुओं का जीवन कैसा होता है. इसलिए 24 की उम्र में 'बुद्धिस्ट प्योर लैंड सेक्ट' में दो साल के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा ले लिया.'
लेकिन कोडो का जापान जाने का उत्साह जल्दी ही ठंडा पड़ गया. दरवाजे बंद होते ही ट्रेनर्स चीखने-चिल्लाने लगते. कोडो कहते हैं, 'मुझे लगा कि मैं कहां पर आ गया?'
फिर न्यू यॉर्क में कोडो ने मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. यहीं पर उन्होंने अपनी गे पहचान को सार्वजनिक भी किया.
लेकिन कोडो को डर सता रहा था कि कहीं ऐसा करने से बौद्ध भिक्षुओं के मूल्यों में तो कमी नहीं आएगी. कहीं इससे बौद्ध भिक्षु समुदाय का अपमान तो नहीं होगा?
लेकिन एक वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु ने कोडो की चिंताएं दूर कर दीं और बताया कि
जापानी भिक्षु अधिकतर मंदिर के बाहर गैर-धार्मिक वस्त्र धारण करते हैं और
दूसरी नौकरी करते हैं.
कोडो ने कहा, यह मेरे लिए मुक्ति जैसा था. तभी मुझे लगा- 'मैं अपनी असली पहचान के साथ एक बौद्ध भिक्षु हो सकता हूं.'
कोडो यह बात स्वीकार करते हैं कि मेकअप आर्टिस्ट और बौद्ध भिक्षु एक साथ
होना अजीब लग सकता है क्योंकि बौद्ध धर्म आंतरिक खूबसूरती पर ध्यान देने के
लिए कहता है.
बोडो ने कहा, मुझे लगता है कि बौद्ध धर्म का मूल संदेश खुश रहना है. सुंदर दिखने से इंसान ज्यादा उदार हो जाता है और दूसरों की मदद के लिए ज्यादा तेजी से आगे बढ़ता है.