सुई यानी इंजेक्शन का नाम सुनते ही आज भी कई लोग घबरा जाते हैं. हो सकता है आप भी उन लोगों में एक रहे हों जो इंजेक्शन से कभी ना कभी डरे हों. सबसे अधिक डर तब लगता था जब डॉक्टर इंजेक्शन में दवाई भरकर सिरिंज से 1-2 बूंद दवा बाहर निकालते थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर वो ऐसा क्यों करते थे? दरअसल, वे सिरिंज के अंदर मौजूद हवा के बुलबुलों (Air Bubbles) को बाहर निकाल रहे होते थे.
एक आम धारणा है कि अगर शरीर में हवा का एक छोटा सा बुलबुला भी चला जाए तो इंसान की तुरंत मौत हो सकती है. लेकिन क्या यह वाकई इतना डरावना है या सिर्फ एक मेडिकल मिथक? आइए इस बारे में जानते हैं.
Healthline के मुताबिक, यदि शरीर के ब्लड वेसल्स में हवा के बुलबुले चले जाते हैं तो उसे एयर एम्बोलिज्म कहा जाता है. इंजेक्शन से 1-2 बूंद बाहर निकालने का उद्देश्य है कि इंजेक्शन में बिल्कुल हवा न रहे क्योंकि हवा दवा के साथ नसों में जा सकती है.
अगर हवा का बुलबुला बड़ा होगा तो वो हार्ट, फेफड़ों या दिमाग तक जाने वाले ब्लड सर्कुलेशन को ब्लॉक कर सकता है जिससे शरीर के अंगों को मिलने वाली ऑक्सीजन सप्लाई में मुसीबत पैदा हो सकती है.
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंजेक्शन में थोड़ी-सी हवा चली जाए तो घबराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन बड़ी मात्रा में हवा शरीर में जाने पर यह घातक साबित हो सकती है.
अधिकतर मामलों में अगर बहुत कम मात्रा में हवा जैसे कि एक छोटा सा बुलबुला मसल्स या नस में जाता है तो शरीर उसे सोख लेता है और वह अपने आप खत्म हो जाता है. किसी को जान का खतरा तब होता है जब हवा की मात्रा अधिक हो. छोटे बुलबुलों से आमतौर पर सिर्फ उस जगह पर हल्का दर्द या सूजन हो सकती है.
Healthline के मुताबिक, करीब 50–100 मिलीलीटर हवा के शरीर में सीधे ब्लड स्ट्रीम में जाने पर खतरा बढ़ता है लेकिन सामान्य इंजेक्शन में इतनी मात्रा में हवा आ नहीं सकती. इंजेक्शन लगाते समय अगर थोड़ी हवा गलती से चली भी जाए तो शरीर का नैचुरल सर्क्युलेशन सिस्टम उसे आसानी से खत्म कर देता है.
Cleveland Clinic के मुताबिक, यदि इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद सांस फूलना, चक्कर आना या सीने में दबाव जैसा महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए. शुरुआत में ये संकेत हल्के हो सकते हैं लेकिन हर स्थिति में सावधानी काफी जरूरी है. इसलिए हमेशा सलाह दी जाती है कि इंजेक्शन लगवाने के बाद थोड़ी देर तक क्लीनिक या हॉस्पिटल में रुकें.
मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं, इंजेक्शन में बहुत मामूली मात्रा में हवा जाने से डरने की बात नहीं, लेकिन कभी भी खुद से इंजेक्शन लगाने की कोशिश न करें.