कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कर दिया है कि वो सिर्फ कांग्रेस हाईकमान के फैसले को मानेंगे और इसी पर चलेंगे. हावेरी में उन्होंने दो टूक कहा कि इस मुद्दे पर वो बार-बार सफाई नहीं देंगे और जब पार्टी बुलाएगी तभी दिल्ली जाएंगे.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि नेतृत्व बदलने के सवाल पर वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी हाईकमान जो तय करेगा वही अंतिम होगा. उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी को हाईकमान का फैसला मानना पड़ेगा और वह किसी और की टिप्पणी पर जवाब नहीं देंगे. सिद्धारमैया ने मीडिया से कहा कि एक ही सवाल बार-बार ना पूछा जाए, क्योंकि वह इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जब हाईकमान बुलाएगा तो वह दिल्ली जाएंगे.
'1000 दिन सिर्फ माइलस्टोन नहीं, गरीबों को सशक्त किया'
सीएम ने अपनी सरकार के कामकाज का जिक्र किया और कहा कि सरकार ने चुनाव में किए गए वादों के मुताबिक काम किया है. उन्होंने दावा किया कि पिछले 1000 दिनों में गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं और सरकार आगे भी इसी दिशा में काम करती रहेगी.
17 फरवरी के बाद तेज हो सकती है सियासी हलचल
सूत्रों के मुताबिक 17 फरवरी के बाद कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संतुलन को लेकर हलचल तेज हो सकती है. बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया जा सकता है, जहां पावर-शेयरिंग फॉर्मूले पर चर्चा होने की संभावना है.
सूत्रों का कहना है कि इस मसले पर वरिष्ठ मंत्रियों और पार्टी नेताओं से अलग-अलग बातचीत भी हो सकती है, ताकि जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर सहमति बनाई जा सके.
कुर्सी की खींचतान या मैसेज पॉलिटिक्स?
कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व को लेकर अंदरखाने खींचतान की चर्चा रही है. सिद्धारमैया के ताजे बयान से साफ है कि वो सार्वजनिक तौर पर हाईकमान के फैसले को ही अंतिम बता कर सियासी गेंद दिल्ली के पाले में डालना चाहते हैं.