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स्लीपर में 8, थर्ड AC में 5 सीट रिजर्व... सरकार ने बताया- कैसे होती है लोअर बर्थ की बुकिंग?

भारत में हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे बुजुर्गों, महिलाओं और गर्भवती यात्रियों को लोअर बर्थ देने की खास व्यवस्था करता है. रेलवे कुछ सीटें इनके लिए रिजर्व रखता है और खाली लोअर बर्थ होने पर प्राथमिकता के आधार पर सीट बदलने की सुविधा भी देता है.

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लोअर बर्थ खाली होने पर प्राथमिकता के आधार पर सीट बदलने की सुविधा भी मिलती है. ( Photo: AI)
लोअर बर्थ खाली होने पर प्राथमिकता के आधार पर सीट बदलने की सुविधा भी मिलती है. ( Photo: AI)

भारत में हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. लंबी दूरी की यात्रा के लिए ज्यादातर लोग रेलवे को सबसे आसान और सस्ता साधन मानते हैं. त्योहारों, छुट्टियों और शादी के सीजन में ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है. ऐसे में बुजुर्गों, महिलाओं और गर्भवती यात्रियों को सफर के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, खासकर जब उन्हें ऊपर वाली सीट यानी अपर बर्थ मिल जाती है. यात्रियों की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने कुछ खास नियम बनाए हैं, ताकि जरूरतमंद लोगों को लोअर बर्थ यानी नीचे वाली सीट आसानी से मिल सके. रेलवे की यह सुविधा वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और गर्भवती यात्रियों के लिए काफी मददगार साबित होती है.

किन लोगों को मिलती है लोअर बर्थ की प्राथमिकता?
रेलवे के नियमों के अनुसार, 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के पुरुष यात्रियों और 45 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिला यात्रियों को उपलब्धता के आधार पर लोअर बर्थ देने की कोशिश की जाती है. अगर टिकट बुक करते समय सीट का विकल्प नहीं भी चुना गया हो, तब भी रेलवे ऐसे यात्रियों को प्राथमिकता देने की कोशिश करता है. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी लोअर बर्थ देने का नियम है ताकि उन्हें सफर के दौरान ज्यादा परेशानी न हो.

हर कोच में अलग से रखी जाती हैं सीटें
रेलवे मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि  कुछ सीटें खास तौर पर इन यात्रियों के लिए सुरक्षित रखता है. स्लीपर कोच में करीब 6 से 7 लोअर बर्थ रिजर्व रहती हैं. वहीं 3AC कोच में 4 से 5 और 2AC कोच में 3 से 4 लोअर बर्थ ऐसे यात्रियों के लिए अलग रखी जाती हैं. यह संख्या ट्रेन और कोच की उपलब्धता के हिसाब से थोड़ी बदल सकती है. रेलवे का मकसद यही होता है कि बुजुर्ग और जरूरतमंद यात्रियों को आरामदायक यात्रा मिल सके.

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खाली सीट मिलने पर भी मिल सकती है सुविधा
अगर ट्रेन चलने के बाद कोई लोअर बर्थ खाली रह जाती है, तो रेलवे उसे प्राथमिकता के आधार पर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों या गर्भवती महिलाओं को दे सकता है. खासकर अगर ऐसे यात्रियों को पहले मिडिल या अपर बर्थ मिली हो, तो टीटीई उपलब्धता के अनुसार उनकी सीट बदल सकता है. इससे उन यात्रियों को काफी राहत मिलती है जिन्हें ऊपर चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती है.

जनरल डिब्बों में भी मिलती है खास व्यवस्था
रेलवे ने सिर्फ रिजर्वेशन कोच में ही नहीं, बल्कि कुछ जनरल डिब्बों में भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग जगह तय की है. खासकर लोकल ट्रेन सेवाओं में बुजुर्ग यात्रियों के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं ताकि उन्हें भीड़ में परेशानी न हो.

इन बातों का रखना होगा ध्यान
रेलवे की इस सुविधा का फायदा लेने के लिए यात्रियों को टिकट बुक करते समय सही उम्र भरनी जरूरी होती है. अगर यात्री पात्रता के दायरे में आते हैं, तो सिस्टम अपने आप लोअर बर्थ देने की कोशिश करता है. हालांकि सीट पूरी तरह उपलब्धता पर निर्भर करती है. कई बार ज्यादा भीड़ होने पर लोअर बर्थ मिलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन रेलवे जरूरतमंद यात्रियों को प्राथमिकता देने की कोशिश करता है. रेलवे की यह सुविधा लाखों यात्रियों के सफर को आसान और आरामदायक बनाने में मदद कर रही है. खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह नियम काफी राहत देने वाला माना जाता है.

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