संसद में तीन बिल पेश किए गए हैं, जिसके बाद देश में चुनावी क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा. इसके बाद से देश में लोकसभा की 850 सीटें हो जाएंगी, जबकि हर राज्य में भी विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी संभव है. सरकार का कहना है कि परिसीमन के बाद कहीं भी सीटें कम नहीं होंगी. लेकिन, माना जा रहा है कि राज्यों में विधानसभा की सीटों में बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन, लोकसभा-विधानसभा सीटों की संख्या से जुड़ी चर्चा के बीच उन सीटों का जिक्र भी किया जाना चाहिए, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आरक्षित हैं.
दरअसल, भारत में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके लिए भी सीटें आरक्षित हैं. ये सीटें जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अंतर्गत आती है और जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सीटों में पीओके की 24 सीटें भी शामिल हैं. हालांकि, सरकार के गठन में इनकी गिनती नहीं की जाती है. अभी जम्मू-कश्मीर में 90 हैं. पहले जम्मू संभाग में पहले 37 सीटें थीं, जो बढ़कर 43 कर दी गई थीं और कश्मीर संभाग में पहले 46 सीटें थीं, जो बढ़कर 47 कर दी गई थीं.
इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के लिए 24 सीटें रिजर्व्ड हैं. इसके हिसाब से पहले जम्मू कश्मीर विधानसभा में 107 सीटें थीं जो 114 हो गईं हैं. यानी इसमें 24 सीटें पीओके की हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है.
कब से है ये व्यवस्था?
1956 में जब जम्मू कश्मीर का अलग संविधान बनाया गया था, तब से ही पीओके के लिए सीटें जम्मू कश्मीर विधानसभा में होती आई हैं. जब अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 खत्म किया गया तब भी इन 24 सीटों को बरकरार रखा गया. ये व्यवस्था काफी पहले से है और उस वक्त 25 सीटें थीं, जिन्हें बाद में 24 कर दिया गया. अब देखना है कि अगर परिसीमन से कश्मीर में सीटों में बदलाव होता है तो क्या इन सीटों की संख्या में भी कुछ बदलाव किया जाएगा? वैसे कई जब कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब प्रदेश की सीटें बढ़ी थीं, लेकिन इनमें बदलाव नहीं किया गया था.
कश्मीर में अभी कुल 90 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 74 सामान्य, 9 एसटी और 7 एससी हैं. जम्मू-कश्मीर में कुल 87.09 लाख मतदाता हैं. इनमें से 44.46 लाख पुरुष, 42.62 महिलाएं, 169 ट्रांसजेंडर, 82,590 दिव्यांग, 73943 अति वरिष्ठ नागरिक, 2660 शतायु, 76092 सेवा मतदाता और 3.71 लाख पहली बार मतदाता हैं.