157 साल बाद सलामी नसीब हो रही है गदर के शहीदों को? वो आखिर कौन है, जो देश के नाम अपनी जान कुर्बान कर गए, मगर इतने बरस तक गुमनाम रहे? आखिर इतने बरस तक उनकी वीर गाथा कैसे दबी छिपी रही? ये सवाल सुलग रहे हैं अजनाला के एक शहीदी कुएं की खुदाई के बाद से. कुएं से जो नरकंकाल और दूसरी चीजें निकल रही है...वो गदर के दिनों की नई गाथा सामने ला रही है...