वो एक जून का ही दिन था जब एक खुशबू पूरी फिज़ा को महका गई. एक अन्जानी सी खुशबू, एक मासूम सी मुस्कुराहट. वो खुशबू थी नर्गिस की. नर्गिस जो आज पचास साल बाद भी हिंदुस्तान के लाखों करोड़ों सिने प्रेमियों के दिलों में धड़क रही है, महक रही है.