इस अभियान में साल 2000 से अब तक गुमशुदा लोगों की तलाश शुरू की जाएगी. जितने भी मामले रजिस्टर हुए हैं, उनमें पंजीकृत गुमशुदा बच्चों के साथ-साथ बड़े और बुजुर्गों को भी तलाश की जाएगी. इसके साथ ही गुमशुदा लोगों की तस्वीरों का मिलान लावारिश लाशों से भी किया जाएगा.
महानिदेशक अशोक कुमार ने इस मामले में कहा कि ऑपरेशन स्माइल और ऑपरेशन शिनाख्त अभियान के अन्तर्गत जनपद देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में पांच-पांच तलाशी टीम लगाई गई है. साथ ही शेष जिलों में 2-2 तलाशी टीम का गठन किया गया है.
प्रत्येक तलाशी टीम में गुमशुदा, बरामद बच्चों और महिलाओं से पूछताछ हेतु एक महिला पुलिसकर्मी को भी अनिवार्य रूप से नियुक्त किया गया है. टीमों की सहायता के लिए एक-एक विधिक और तकनीकी टीम का भी गठन किया गया है.
इसके साथ ही देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व ऊधमसिंहनगर में एक अपर पुलिस अधीक्षक और अन्य जनपदों में पुलिस उपाधीक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. विशेष तौर पर जो एक महत्वपूर्ण बात पुलिस के द्वारा बताई गई है उसमें बरामद बच्चों के सम्बन्ध में अगर किसी अपराध का होना पाया जाए तो सम्बन्धित के विरूद्ध तत्काल अभियोग दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी.
इस अभियान के लिए सोशल मीडिया का भी सहयोग लिया जाएगा साथ ही इस ऑपरेशन में विभिन विभागों जैसे सीडब्लूसी, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, अभियोजन, श्रम विभाग, संप्रेक्षण गृह, एनजीओ और चाइल्ड हेल्प लाईन से समन्वय स्थापित कर इनका सहयोग भी लिया जाएगा.
बाताया जा रहा है कि अभियान ऐसे समस्त सम्भावित स्थान जहां बच्चों के मिलने की सम्भावना अधिक है, जैसे शेल्टर होम्स,ढाबों,कारखानों,बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और अन्य जगहों पर चलाया जाएगा.
गौरतलब है कि इससे पहले ऑपरेशन स्माइल अभियान के अन्तर्गत साल 2015 से माह फरवरी 2018 तक उत्तराखण्ड (868) और अन्य प्रदेशों (693) के कुल 1561 गुमशुदा बच्चों को बरामद किया गया. इसके साथ ही वर्ष 2018 में 1 मई 2018 से 20 जुलाई 2018 तक चलाये गये ऑपरेशन शिनाख्त अभियान में कुल 68 अज्ञात शवों की शिनाख्त की गई और कुल 424 गुमशुदा लोगों को बरामद किया गया.