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बाढ़ से मची महातबाही के बाद भूकंप से कांपेगा केदारनाथ!

केदारनाथ अभी बाढ़ की त्रासदी से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि उस पर बड़े भूकंप का खतरा मंडराने लगा है. भूवैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तराखंड का केदारनाथ इलाका भूकंप के लिहाज से हिमालय के सबसे संवदेनशील इलाकों में से एक है.

केदारनाथ केदारनाथ

केदारनाथ अभी बाढ़ की त्रासदी से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि उस पर बड़े भूकंप का खतरा मंडराने लगा है. भूवैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तराखंड का केदारनाथ इलाका भूकंप के लिहाज से हिमालय के सबसे संवदेनशील इलाकों में से एक है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां पर 8 या इससे ज्यादा के परिमाण का भूकंप आने की संभावना बहुत ज्यादा है. भूवैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय का ये इलाका भूकंप के लिहाज से काफी सक्रिय है. पिछले एक साल में यहां पर लगातार हलचल रिकॉर्ड की जा रही है, लेकिन ये हलचल हिमालय के नीचे पल रहे बड़े भूकंप की सुगबुगाहट मानी जा रही है.

इस इलाके की हलचल को पकड़ने के लिए केदारनाथ इलाके के पास ही टिहरी जिले के गुत्तू इलाके में एक ऑब्जर्वेटरी लगाई गई है. वाडिया इंस्टीट्यूट फॉर हिमालयन स्टडीज के डायरेक्टर डॉ एके गुप्ता के मुताबिक, 'केदारनाथ और आस-पास का इलाका भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक इलाकों में से एक है. भूवैज्ञानिकों की माने तो हिमालय नतीजा है धरती की दो बड़ी टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच हो रही टक्कर का. तकरीबन पांच करोड़ साल पहले टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच शुरू हुई टक्कर आज भी जारी है. यही वजह है कि हिमालय में बड़ा भूकंप आना कोई नई बात नहीं है. पिछले सालों में आए बड़े भूकंपों का अध्ययन करने के बाद भूवैज्ञानिक इस नतीजे पर सहमत हैं कि हिमालय में एक बड़ा भूकंप कभी भी आ सकता है.'

जानकारों की माने तो बड़े भूकंप यानी 8 या इससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप जिन इलाकों में आने की संभावना है वो इलाके हैं, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, बिहार का तराई वाला इलाका और असम. हाल ही में अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भारतीय संस्थान एनजीआरआई के साथ एक अध्ययन में ये पाया है कि हिमालय में मेन हिमालयन थ्रस्ट यानी एमएचटी काफी सक्रिय है. यहां पर ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि रिएक्टर स्केल पर 8 या इससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप कभी भी तबाही मचा सकता है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक एमएचटी वो इलाका है जहां यूरेशियन और इंडियन प्लेट आपस में टकरा रहे हैं. इस वजह से यूरेशियन प्लेट ऊपर उठ रही है. कई इलाकों में इस वजह से हिमालय के कई हिस्से हर साल 34 मिलीमीटर की रफ्तार से ऊपर उठ रहे हैं. चिंता की बात ये है कि हिमालय में कई इलाके ऐसे हैं जहां पर चट्टानों में तनाव एकत्र हो रहा है.

ऐसे इलाकों में चट्टानों में टूट-फूट बहुत ज्यादा होती है, लेकिन जिन इलाकों में बड़े भूकंप बहुत दिनों से नहीं आए हैं वहां पर जबरदस्त भूकंप का खतरा ज्यादा है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के भूविज्ञान के एचओडी प्रोफेसर सी एस दुबे की सीस्मिक गैप थ्योरी के मुताबिक जिन इलाकों में पिछले 100 साल से बड़े भूकंप नहीं आए हैं उन इलाकों में बड़े भूकंप की संभावना लगातार बनी हुई है.

केदारनाथ का इलाका भी इन्हीं इलाकों में से एक है. हाल ही में अतिवृष्टि की वजह से केदारनाथ धाम में हुई तबाही देखने के बाद ये सोचकर मन कांप उठता है कि अगर बड़ा भूकंप इस इलाके में आया तो भारी तबाही से इसे कोई नहीं बचा सकता है.

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