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उत्तराखंड में मरने वालों की संख्‍या 130 के पार, बाढ़ में अब भी फंसे हुए हैं 70,000 लोग

भारी बारिश व बाढ़ से उत्तराखंड में मरने वालों की संख्‍या 130 के पार हो गई है. गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के मुताबिक बाढ़ में अब भी 70,000 लोग फंसे हुए हैं. उत्तराखंड में राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है.

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भारी बारिश व बाढ़ से उत्तराखंड में मरने वालों की संख्‍या 130 के पार हो गई है. गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के मुताबिक बाढ़ में अब भी 70,000 लोग फंसे हुए हैं. उत्तराखंड में राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है. उत्तराखंड में राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है. वहीं, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी बाढ़  प्रभावित इलाकों का हवाई दौरा करेंगे.

इस बीच, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि उत्तराखंड में आई बाढ़ में अभी 70,000 से ज्‍यादा लोग फंसे हुए हैं, जिन्‍हें पगडंडियां बनाकर बाहर निकाला जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि बाढ़ में फंसे हुए लोगों को फूड पैकेट्स दिए जा रहे हैं.

जारी है जिंदगी के लिए जद्दोजहद
उत्तराखंड में सैलाब से मची तबाही दिल दहलाने वाली है. यहां जो अपनी जान बचाने में कामयाब हो गए हैं, उन्हें अपनी सांसें बनाए रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है. क्रिकेटर हरभजन सिंह का भी बुरा हाल है, जो खुद तीन दिनों से जोशीमठ में फंसे हुए हैं. ऐसे में दाद देनी होगी फौज, पुलिस और एनडीआरएफ के लोगों को, जो प्रकृति के तांडव के बीच फंसे लोगों को बचाने में बड़ी दिलेरी जुटे हुए हैं.

बचाव के काम में आई तेजी
बारिश के कुछ कम होते ही राहत व बचाव का काम तेज कर दिया गया है. 5 हजार से ज्यादा सेना के जवान लोगों की मदद में जुटे हैं. सड़कें बह गई हैं, चलने लायक रास्ता नहीं बचा है. बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक को बड़ी मुश्किल से सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जा रहा है. गंगोत्री के पास कंडीकोड नाम की जगह पर फंसे हुए करीब 80 लोगों को टिहरी झील के रास्ते से निकाला गया. बचाए जा रहे श्रद्धालुओं को सड़क के रास्ते किसी तरह ऋषिकेश पहुंचाया जाएगा और फिर वहां से वे अपने घरों की तरफ जाएंगे.

केदारनाथ मंदिर पर भी आफत
कुदरत ने उत्तराखंड में भारी तबाही मचाई है. सबसे ज्यादा बर्बादी केदारनाथ में मची है, जहां मशहूर केदारनाथ मंदिर भी आधा मलबे में समा गया है. पूरे इलाके में मलबा और पानी बिखरा हुआ है. श्रद्धालुओं को ठहराने के लिए बने होटल और लॉज नेस्तनाबूद हो चुके हैं. अब तक वहां से करीब पचास शव निकाले जा चुके हैं.

बादल फटने से ऐसी तबाही मची कि पूरा केदारनाथ मटियामेट हो गया. जल प्रलय ने केदारनाथ को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. इस बर्बादी के बीच अगर कुछ बचा है, तो वो है भोले शंकर का मंदिर, लेकिन वो भी आधे मलबे में डूबा है. जिस 6 फीट के चबूतरे पर मंदिर बना है, वो कहीं नजर नहीं आ रहा है.

लॉज और होटलों में समाया पानी
खबर है कि केदारनाथ के पास का रामबाड़ा बाज़ार पूरी तरह बह चुका है. श्रद्धालुओं के रहने के लिए बने लॉज और होटल भी पानी की धार में समा चुके हैं. अब वहां सिवाए मलबे और पत्थरों के और कुछ नजर नहीं आ रहा है इस इलाके में श्रद्धालुओं के लिए बने कई होटल सैलाब में समा गए. हजारों भक्त अभी भी फंसे हुए है.

पिछले 48 घंटों से लगातार केदारनाथ में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. सेना के जवान हेलीकॉप्टर से लोगों को बचाने में जुटे हुए है. रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसरों का कहना है कि ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई. अब तक यहां से करीब 500 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है.

जहां नजर डालिए, पानी ही पानी
इधर, हरिद्वार में भी गंगा उफान पर है. कई इलाके पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं. हरकी पौंड़ी के पास कार पार्किंग में अभी भी कई गाड़ियां पानी में डूबी हुई हैं. यकीनन उत्तराखंड में हालात बेहद मुश्किल भरे हैं. अभी हालात सामान्य होने में लंबा वक्त लगने वाला है.

दिल्‍ली में यमुना किनारे बाढ़ का खतरा
दिल्ली में यमुना के किनारे बसे निचले इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. बुधवार सुबह 7 बजे तक यमुना का जलस्तर 206.36 मीटर पहुंच चुका है. ऐसा अनुमान है कि शाम तक यमुना का उफान 208 मीटर के करीब पहुंच जाएगा. अगर ऐसा हुआ, तो यह 1978 के बाद का सबसे भीषण सैलाब होगा. मंगलवार से ही निचले इलाकों को खाली कराने का काम शुरू हो चुका है. प्रशासन हाई अलर्ट पर है.

जलप्रलय से मची तबाही पर डालें एक नजर:
--सैलाब से अब तक 131 लोगों की मौत.
--अकेले उत्तराखंड में 102 लोगों की मौत.
--केदारनाथ से अब तक 50 शव बरामद.
--चारधाम यात्रा पर गए 71,440 लोग उत्तराखंड में फंसे.
--रुद्रप्रयाग से 500 लोग लापता.
--केदारनाथ में फंसे हैं करीब 8000 लोग.
--हेमकुंड साहिब में ढाई हजार लोग फंसे.
--बदरीनाथ में 8000 श्रद्धालु मुश्किल में.
--चमोली जिले में सबसे ज्यादा 27 हजार 40 लोग फंसे.
--रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में 25 हजार लोगों की जान मुश्किल में.

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