उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में अभी लंबा वक्त है, लेकिन कांग्रेस ने उसकी तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस ने नई टीम बनाई है और राज्य कार्यकारिणी का गठन किया है. हालांकि, इस टीम की घोषणा के साथ ही पार्टी में बगावत के सुर भी उठने लगे हैं.
70 सीट की विधानसभा में पहले ही कांग्रेस 11 विधायकों के साथ हाशिए पर खड़ी है. ऐसे में कांग्रेस में बगावत के सुर पार्टी के लिए अच्छी खबर नहीं है. बगावती तेवर अपना चुके नेताओं में से एक कांग्रेस के धारचूला विधायक हरीश धामी ने सोमवार को नई कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया.
साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर भी सरकार से सांठ-गांठ के गम्भीर आरोप लगाए. उनके ये आरोप आने वाले दिनों में पार्टी में ज़ुबानी जंग के कारण बन सकते हैं.
धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय पहुंचे हरीश धामी की प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से मुलाकात ना होने के चलते उन्होंने कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना को अपना इस्तीफा सौंपा.
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हरीश धामी ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता और विधायक होने के बावजूद उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया. उन्होंने कहा, 'मुझे जलील करने के लिए ये पद दिया गया था. इसकी वजह से प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दिया है.'
इस दौरान हरीश धामी ने नेता प्रतिपक्ष पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि सभी विधायक 3 फरवरी को कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात करेंगे, जहां सभी विषयों से हाईकमान को अवगत कराया जाएगा.
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पार्टी छोड़ने की भी कही बात
बता दें कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में हरीश धामी को प्रदेश सचिव बनाया गया था. जबकि कांग्रेस के बाकी विधायकों को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया. इसके बाद उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि कांग्रेस प्रदेश संगठन ने मुझे जो पद दिया है, मैं उससे इस्तीफा देता हूं. उन्होंने यहां तक लिखा कि वह बहुत जल्द ही कांग्रेस छोड़ने की तिथि की भी घोषणा करेंगे.