अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से छूट कर भारतीय विमान से कजाकिस्तान होकर रविवार रात लौटे 16 देहरादून के निवासी अपने परिजनों से मिलकर फफक पड़े. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ठाकुरपुर में एक बरात घर में उनका फूल मालाओं से स्वागत किया और उन्हें स्वदेश लौटने पर बधाई दी. साथ ही इन लोगों ने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान में मौजूद पाकिस्तान के कुछ लोगों ने उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश की.
अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों में से 60 लोग अब तक दून लौट चुके हैं. इनमें से 16 लोग रविवार देर रात ठाकुरपुर (प्रेमनगर) पहुंचे. इनमें से कुछ डेनमार्क की एक कंपनी में सुरक्षाकर्मी थे. जबकि, कुछ लोग दूसरी अन्य कंपनियों में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्य करते थे. इनमें से ज्यादातर पूर्व सैनिक हैं. अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद कंपनी की ओर से भी उन्हें भारत भेजने के लिए प्रयास हो रहे थे.
वापस लौट लोगों का छलक पड़ा दर्द
ये लोग रात को जब वापस पहुंचे तो उनका दर्द छलक पड़ा. नौकरी के लिए विदेश जाने वाले देहरादून निवासी अरविंद खड़का और अफगानिस्तान में लगभग 15 साल तक कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर तैनात रहे शैलेंद्र थापा लगातार डेनमार्क और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहे.
देहरादून लौटे इन लोगों ने बताया कि शनिवार को वह काबुल एयरपोर्ट से भारतीय विमान में सवार हुए थे. भारतीय विमान पहले कजाकिस्तान पहुंचा और उसके बाद दिल्ली के लिए उड़ान भरी. उन्होंने बताया कि तालिबानियों ने उन्हें अनावश्यक घर से बाहर न निकलने की बात कही थी.
इन लोगों ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से काबुल एयरपोर्ट पर थे. डेनमार्क एंबेसी और भारत सरकार के साथ ही कुछ ब्रिटिश लोगों ने भी उनके खाने-पीने से लेकर अन्य जरूरी व्यवस्थाएं कीं. एयरपोर्ट पर एक लाख से भी अधिक लोगों की भीड़ होने के कारण वह एयरपोर्ट के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे थे. किसी तरह भारतीय और डेनमार्क के अधिकारियों के सहयोग से भारतीय विमान तक पहुंचे और स्वदेश वापसी की. उन्होंने बताया कि स्वदेश लौटकर वह आजाद महसूस कर रहे हैं. दिल्ली से यह लोग परिजनों या निजी वाहनों के जरिए घर पहुंचे.