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उत्तर प्रदेश: नरसिंहानंद के विवादित बोल- मदरसों को बारूद से उड़ा देना चाहिए, भारत जोड़ो यात्रा मजाक

यूपी के अलीगढ़ में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने मदरसों को लेकर विवादित टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि मदरसों को बारूद से उड़ा देना चाहिए. इतना ही नहीं उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर भी कुछ ऐसी ही बात कही है. इसके साथ ही नरसिंहानंद ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को मजाक बताया है.

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मदरसों को लेकर यति नरसिंहानंद की विवादित टिप्पणी
मदरसों को लेकर यति नरसिंहानंद की विवादित टिप्पणी

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है. नरसिंहानंद ने कहा कि मदरसों को बारूद से उड़ा देना चाहिए, ताकि बच्चों के दिमाग से वायरस निकल सके. उन्होंने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर भी कटाक्ष किए. यति नरसिंहानंद हिंदू महासभा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अलीगढ़ पहुंचे थे.

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मजाक
यति नरसिंहानंद ने धर्म की रक्षा का प्रण लेते हुए कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा एक मजाक है. राहुल गांधी जिहादियों के साथी हैं. वह उत्तर प्रदेश में जीत नहीं सकें और केरल जाकर चुनाव लड़ा. भारत जोड़ने के लिए उनके पास एक ऐतिहासिक मौका था, लेकिन गांधी परिवार ने देश को बर्बाद कर दिया. अगर राहुल गांधी भारत जोड़ना चाहते हैं तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में जाएं, जिसे महात्मा गांधी ने बनवाया था. पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश को भारत से जोड़ें, ऐसा करने से सब उनसे जुड़ जाएंगे.

मदरसे जैसी संस्था नहीं होनी चाहिए
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराई जा रही मदरसों की जांच को लेकर यति नरसिंहानंद ने कहा कि मदरसे जैसी संस्था होनी ही नहीं होनी चाहिए. जितने भी मदरसे हैं, उन्हें बारूद से उड़ा देना चाहिए. जैसे चीन करता है, वैसे ही यहां करना चाहिए. मदरसे के सारे विद्यार्थियों को शिविरों में भेजना चाहिए. यति नरसिंहानंद ने कहा कि मदरसों की तरह एएमयू(अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) को भी बारूद से उड़ा देना चाहिए. जितने लोग इसमें रहते हैं, उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजकर उनके दिमाग का इलाज करवाना चाहिए. 

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यूपी में मदरसों की जांच
बता दें कि यूपी में मदरसों की जांच कराई जा रही है. इसका मकसद है कि उनकी स्थिति सुधारी जाए. जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था के साथ आधुनिक शिक्षा भी मिले. कई जिलों में जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने बच्चों की आधुनिक शिक्षा की बदतर स्थिति को देखते हुए शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा पर जोर देने की नसीहत दी. साथ ही पढ़ाई के स्तर और बेहतर करने को कहा.

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