वृंदावन में कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर नाले की खुदाई का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. मथुरा नगर निगम वृंदावन में नाले की खुदाई कर रहा है और इस दौरान निगम ने ट्रस्ट की दीवार को गिरा दिया. जिसके खिलाफ शक्तिपीठ मंदिर ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया.
कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर ट्रस्ट द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि प्रशासन के सीवेज निर्माण करने की वजह से नाले का पानी मंदिर की जमीन पर बह रहा है, जिसकी वजह से फसल खराब हो रही है.
ट्रस्ट की तरफ से यह भी कहा गया कि शक्तिपीठ की जमीन पर दीवार के पुनर्निर्माण की इजाजत दी जाए ताकि नाले को मंदिर परिसर से बाहर रखा जा सके.
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केस हारे तो हटानी होगी दीवारः SC
वहीं मथुरा वृंदावन नगर निगम का कहना है कि जिस सार्वजनिक सीवेज की बात हो रही है वह पुराना नाला है और उसकी मरमत की जा रही है. सार्वजनिक जमीन पर बने इस नाले की मरम्मत के लिए आने वाले अवरोध को हटाया जा रहा है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दीवार गिराने से पहले ट्रस्ट को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था. इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने ट्रस्ट को अंतरिम राहत देते हुए मंदिर ट्रस्ट को चाहरदीवारी के पुनर्निर्माण की इजाजत दे दी.
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ट्रस्ट केस हार जाता है तो ऐसी दशा में ट्रस्ट दीवार को हटाएगा. कोर्ट ने मंदिर ट्रस्ट को 3 दिन में हलफनामा दाखिल करने का समय दिया. जबकि नगर निगम को इस मामले पर जवाब दाखिल करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया.
दरअसल, मथुरा नगर निगम वृंदावन में नाले की खुदाई कर रहा है, जिसके लिए निगम ने कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर ट्रस्ट की दीवार को गिरा दिया. जिसके खिलाफ शक्तिपीठ मंदिर ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.