हमारे देश में आज भी एड्स को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं. हालांकि सरकार समय-समय पर इसके लिए प्रचार-प्रसार के कार्यक्रम चलाती रहती है. लेकिन बावजूद इसके एड्स पीड़ितों को समाज में उपेक्षा झेलनी पड़ रही है. वहीं, समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो खुद एचआईवी पॉजिटिव होने के बावजूद एड्स पीड़ितों को जीने की हिम्मत देने के साथ ही अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
एक ऐसे ही एचआईवी पीड़ित युवा नायक का नाम है दिनेश यादव. उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला निवासी दिनेश को 13 साल की कच्ची उम्र में एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिली. लेकिन उन्होंने हिम्मत हारने की बजाय इस बीमारी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया. शनिवार को लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए दिनेश ने जीवन के कई खट्टे-मीठे अनुभव साझा किए. दिनेश आज अपने जिले में घूम-घूमकर लागों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने का काम करते हैं.
27 वर्षीय दिनेश कहते हैं, 'वर्ष 1999 में 13 साल की उम्र में मेरे पिता ने मेरा एचआईवी टेस्ट करवाया. टेस्ट पॉजिटिव आया, लेकिन तब मेरे पिता ने मुझे इस बारे में नहीं बताया.' दिनेश बताते हैं कि उनकी मां भी एचआईवी पीड़ित हैं और शायद मां से ही उन्हें यह बीमारी मिली.
दिनेश ने बताया कि 15 साल की उम्र में उन्हें बॉडी बिल्डिंग की सूझी और दो साल में उन्होंने बॉडी बिल्डिंग में अपने जिले में पहला स्थान प्राप्त किया. दिनेश के अनुसार 2006 में एक बार उनकी तबीयत खराब हुई तब उन्हें पता चला कि वह एड्स से ग्रस्त हैं. जब दिनेश के दोस्तों को इसके बारे में जानकारी हुई तो कई दोस्तों ने उनसे किनारा कर लिया, लेकिन कई दोस्तों ने उन्हें सहारा दिया.
एड्स पीड़िता से की शादी, बिता रहे हैं खुशहाल जीवन
दिनेश ने साल 2010 में जिस लड़की को अपना जीवन साथी बनाया वह भी एचआईवी पॉजिटिव है. आज दिनेश का परिवार हंसी-खुशी अपना जीवन बिता रहा है. दिनेश आज अपने जिले के करीब 1500 एचआईवी पीड़ित लोगों से जुड़े हुए हैं.
बनना है देश का नंबर वन बॉडी बिल्डर
दिनेश जानते हैं कि यह बीमारी उन्हें जीने नहीं देगी, लेकिन वह कहते हैं कि जब तक जिंदा हूं भारत का नंबर वन बॉडी बिल्डर का ताज हासिल करना चाहता हूं. दिनेश उत्तर प्रदेश वेलफेयर फॉर पीपल लिविंग विद एचआईवी यानी एड्स सोसायटी से जुड़कर एड्स पीड़ितों की सेवा कर रहे हैं.