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आखिरकार चीनी मिलों के आगे झुकी अखिलेश सरकार

चीनी मिलों में गन्ना पेराई को लेकर तकरीबन महीने भर से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार खत्‍म होता दिख रहा है. अखिलेश यादव सरकार ने चीनी मिलों के लिए अपना पिटारा खोल दिया है.

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Symbolic image
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चीनी मिलों में गन्ना पेराई को लेकर तकरीबन महीने भर से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार खत्‍म होता दिख रहा है. अखिलेश यादव सरकार ने चीनी मिलों के लिए अपना पिटारा खोल दिया है.

सरकार ने चालू पेराई सत्र में मिलों को सहकारी गन्ना समितियों के कमीशन से छूट दे दी. कमीशन के करीब 500 करोड़ रुपये की भरपाई प्रदेश सरकार करेगी. मिलें गन्ना मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल अदा करने पर राजी हैं, लेकिन इसका भुगतान दो किस्तों में किया जाएगा. मिलें किसानों को 260 रुपए तुरंत गन्ना लेते वक्त करेंगी और शेष 20 रुपए पेराई सत्र के पूरा होने से पहले दे दिए जाएंगे.

इससे पहले निजी शुगर मिलों ने चीनी के रेट में गिरावट से घाटे का तर्क देते हुए मिलें चलाने से इन्कार कर दिया था. किसानों के आंदोलन और हाईकोर्ट में तीन दिसंबर को प्रस्तावित सुनवाई को देखते हुए सरकार ने शनिवार को बड़े समूहों की नौ मिलों के खिलाफ कुर्की आदेश जारी कर दिए थे. इस पर शुगर लॉबी तत्काल हरकत में आई. चीनी मिल मालिक रविवार, एक दिसंबर, की सुबह ही मुख्य सचिव जावेद उस्मानी से मिलने पहुंच गए. दोपहर में तय हुआ कि चीनी मिलों को गन्ना समिति के कमीशन से छूट दे दी जाएगी. चालू सीजन के लिए कमीशन 6.20 रुपये प्रति क्विंटल बैठता है. इसके बाद निजी मिलें तत्काल पेराई को राजी हो गईं.

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चीनी मिल एसोसिएशन ने सरकार से चीनी पर प्रवेश कर, गन्ना क्रय कर और गन्ना समितियों का कमीशन माफ करने का भी अनुरोध किया. मुख्य सचिव ने बताया कि प्रवेश कर और गन्ना क्रय की छूट पहले ही दी जा चुकी है. चालू सत्र में गन्ना समितियों के कमीशन की भरपाई प्रदेश सरकार करेगी. इससे चीनी मिलों को करीब 500 करोड़ रुपये का और लाभ मिलेगा. प्रवेश कर में छूट से 219 करोड़ की राहत, तो गन्ना क्रय कर में 160 करोड़ रुपये की रियायत दी गई है. शीरा बिक्री पर नियंत्रण हटाने से चीनी उद्योग को 167 करोड़ का लाभ होगा यानी 1046 करोड़ रुपये की रियायत चालू सीजन में शुगर इंडस्ट्री को दी गई हैं.

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