लंबे समय तक लचीला रुख अपनाने के बाद यूपी सरकार ने शुगर इंडस्ट्री के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है.
शनिवार, 30 नवंबर को चीनी उद्योग के बड़े समूहों पर निशाना साधते हुए शासन ने नौ चीनी मिलों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किया है. प्रमुख सचिव चीनी उद्योग व गन्ना विकास राहुल भटनागर ने बताया कि ब्याज समेत गन्ना मूल्य वसूली के लिए यह कार्रवाई की गई है. साथ ही संबंधित जिलाधिकारियों को कार्रवाई को तुरंत अमल में लाने के निर्देश दिए गए हैं.
प्रमुख सचिव ने बताया कि इन मिलों में चार दिसंबर तक पेराई शुरू करने के संकेत नहीं मिलने के कारण भी यह कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि प्रदेश की 80 निजी चीनी मिलों पर 2320 करोड़ रुपये बकाया है. मिलों पर रिसीवर नियुक्त करने के सवाल पर भटनागर ने कहा, नियत समय पर पेराई शुरू न करने पर सभी आवश्यक कदम भी उठाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि अब तक 31 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो गई है. इनमें 22 सहकारी, एक निगम व आठ निजी क्षेत्र के मिले हैं. दस निजी मिलों ने पेराई शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया है.
उधर इस मुद्दे पर यूपी की राजनीति भी गरमा गई है. बीजेपी ने मेरठ कमिश्नर कार्यालय का प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी व किसान मोर्चा अध्यक्ष विजयपाल तोमर के नेतृत्व में घेराव किया, जबकि यहां के सतेंद्र नामक किसान ने आत्मदाह का प्रयास किया.
राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने सरकार को चेताया है कि रविवार को पश्चिमी जिलों में चक्का जाम से जनता को असुविधा के लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख हस्तक्षेप की मांग करते हुए पांच दिसंबर को प्रदेश में चक्का जाम की चेतावनी दी है.