कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिये पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया है. लॉकडाउन के पहले दो चरण के दौरान 40 दिन तक आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रखी गई थीं. इसका असर ये हुआ है कि कारोबारियों के साथ ही सरकारों को भी भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है. उत्तर प्रदेश सरकार को भी लॉकडाउन के कारण भारी आर्थिक झटका लगा है. सरकार को अब तक तय वार्षिक टारगेट का महज 2.7 प्रतिशत राजस्व ही मिल पाया है.
टैक्स रेवेन्यू यानी कर राजस्व की बात की जाये तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकार का लक्ष्य 1,66,021 करोड़ रुपये हासिल करना है, इसकी तुलना में अब तक सरकार को 2012.66 करोड़ का राजस्व ही मिल पाया है, जो वार्षिक टारगेट का महज 1.5 प्रतिशत है.
वहीं, टैक्स के अलावा दूसरे माध्यमों से आने वाले राजस्व में भी बड़ी गिरावट आई है. सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिये ऐसे राजस्व (करेत्तर राजस्व) का लक्ष्य 19,178.93 करोड़ रुपये रखा है, जिसके मद्देनजर अभी 282.12 करोड़ ही मिल पाया है जो वार्षिक टारगेट का 1.5 प्रतिशत है. इस तरह यूपी सरकार अब तक टारगेट से काफी पीछे चल रही है.
यूपी सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जीएसटी से लेकर आबकारी तक हर विभाग में सरकार की आमदनी बहुत ज्यादा गिरी है. सरकार ने बताया है कि अप्रैल में जितना टारगेट रखा गया था, उससे बहुत कम राजस्व मिला है.
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अप्रैल में राजस्व धड़ाम
अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन का टारगेट 4930.28 करोड़ था, लेकिन सिर्फ 1448.63 करोड़ ही मिल पाया है जो 29.4 प्रतिशत है. सबसे बड़ा झटका आबकारी और स्टाम्प रेवेन्यू को लगा है, क्योंकि 4 मई से पहले 40 दिन के लॉकडाउन में शराब की बिक्री भी बंद थी.

इसका असर ये हुआ है कि यूपी सरकार को आबकारी विभाग से अप्रैल में जो 3560.13 करोड़ रुपये मिलना था, वो घटकर सिर्फ 41.96 करोड़ रह गया है. यानी आबाकारी विभाग को टारगेट का महज 1.2 प्रतिशत राजस्व ही मिल पाया है. इसके अलावा वैट, स्टाम्प ड्यूटी, परिवहन, भूतत्व और खनिकर्म से मिलने से मिलने वाला राजस्व बुरी तरह गिर गया है.
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सरकार की तरफ से बताया गया है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते राजस्व में कमी आयी है, जिसकी पूर्ति के लिये कोशिश की जा रही हैं. साथ ही सरकार ने कहा है कि राजस्व में गिरावट के बावजूद 16 लाख कर्मचारियों और 12 लाख पेंशनर्स का भुगतान नहीं रोका गया है.
बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने पैसा जुटाने के लिये मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में 30 प्रतिशत कटौती करने के साथ ही एक साल की विधायक निधि भी पोस्टपोन कर दी थी. लेकिन अप्रैल के जो आंकड़े आये हैं वो यूपी जैसे बड़े प्रदेश के लिये एक बड़ी चिंता का विषय जरूर हैं.
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