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धर्म संसद में बोले स्वामी अवधेशानंद- देश पंथ निरपेक्ष है, धर्म निरपेक्ष नहीं

प्रधानमंत्री अयोध्या आएंगे इस बात को लेकर भी विवाद हुआ, सेक्युलरिज्म पर सवाल हुए. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, इस देश को सेक्युलरिज्म के एंगल से नहीं देखना चाहिए. संयोग से हमारा देश पंथ निरपेक्ष है, धर्म निरपेक्ष नहीं है. संविधान में जो संशोधन हुआ है वह पंथ निरपेक्षता का है.

स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज

  • 'राम का नाम लेते ही सब मुहूर्त अनुकूल हो जाते हैं'
  • 'राम के शरण में आते ही सब चीजें सिद्ध हो जाती हैं'

अयोध्या में भूमि पूजन से पहले 'आजतक' मंगलवार को अपने दर्शकों के लिए धर्मसंसद पर एक विशेष आयोजन कर रहा है. इस सत्र में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई लोगों के अलावा प्रशासन और सरकार से जुड़े लोग हिस्सा ले रहे हैं. इसमें संत समाज के लोग भी जुड़े हैं. 'जय श्रीराम' सत्र में प्रसिद्ध धर्म गुरु स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने हिस्सा लिया.

राम मंदिर आंदोलन के बारे में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि 1984 में हमलोग पहली बार अयोध्या आए थे. लाखों भक्त यहां आए. आज अयोध्या की शिलाएं भी आह्लादित हैं. अब कल भूमि पूजन होना है तो मन खुश है. प्रधानमंत्री जी का संकल्प और भक्तों की सेवा पूरी होने जा रही है. आज राम अत्यंत जीवंत हैं. आज पूरा संसार अयोध्या के साथ एकीकृत है.

कुछ दिन शुभ मुहूर्त को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हुई थीं. इस बारे में उन्होंने कहा, जैसे ही राम का नाम स्मरण करते हैं सब मुहूर्त अपने आप अनुकूल हो जाते हैं. इसलिए जिसके नाम से सभी दोषों की निवृति होती है, जिनके नाम से हनुमान लंका चले गए, उनके लिए शुभ मुहूर्त पर क्या सवाल है. मुहूर्त में काल की बात बहुत न्यून है.

राम के कार्य में जुड़ जाएं सभी लोग

प्रियंका गांधी ने कहा है कि राम सबके हैं. इस सवाल पर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि इसके लिए वे उनकी (प्रियंका गांधी) तारीफ करना चाहेंगे. उन सभी का स्वागत है जो भगवान राम के लिए कार्य कर रहे हैं, दान दे रहे हैं. इस वक्त किसी भी व्यक्ति के द्वारा दिया गया दान, सेवा, चंदा अत्यंत प्रशंसनीय है. यह स्वागतयोग्य पहल है, हमें लगता है कि इसके लिए सारे लोग खड़े हो जाएं.

विवेकानंद स्मारक बना तो सारी संस्थाएं खड़ी हुईं, पूरा देश खड़ा हुआ. सोमनाथ मंदिर बना तो उस वक्त के राष्ट्रपति वहां पहुंचे. राष्ट्र की गौरव गाथा का एक अध्याय यहां लिखा जा रहा है. अगर कुछ राजनैतिक दल भी इसमें सहयोग कर रहे हैं तो वे प्रशंसा के पात्र हैं. जो राम के काम आए, जो राम के काम में जुड़ जाए उससे बड़ी बात क्या होगी. राम के शरण में आने के बाद सब चीजें सिद्ध हो जाती हैं.

ये भी पढ़ें: LIVE: आलोक कुमार बोले- पूरे देश में मंदिर की स्वीकार्यता है, विरोध मुहूर्त को लेकर हुआ

हमारा देश पंथ निरपेक्ष है

प्रधानमंत्री अयोध्या आएंगे इस बात को लेकर भी विवाद हुआ, सेक्युलरिज्म पर सवाल हुए. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, इस देश को सेक्युलरिज्म के एंगल से नहीं देखना चाहिए. संयोग से हमारा देश पंथ निरपेक्ष है, धर्म निरपेक्ष नहीं है. संविधान में जो संशोधन हुआ है वह पंथ निरपेक्षता का है.प्रधानमंत्री किसी एक पार्टी का नहीं होता, पूरे देश का प्रधानमंत्री होता है.

इसलिए प्रधानमंत्री को किसी एक राजनैतिक दल या विचारधारा से जोड़ कर नहीं देख सकते. अन्य देशों के प्रधानमंत्री पूरे देश के प्रधानमंत्री होते हैं. प्रधानमंत्री मोदी का जो व्यक्तित्व है, उनकी जो स्वीकार्यता है, प्रत्येक व्यक्ति के अंतः करण में जो मान्यता है, वह किसी एक दल को लेकर नहीं है. विकास पुरुष हैं, पूरे राष्ट्र के विकास की दिशा में उनके पुरुषार्थ हैं.

पूरी धरती राममय हुई

पूर्व में गौरक्षकों की कुछ घटनाएं हुईं. इस पर प्रधानमंत्री का बयान आया था. बयान के बाद जिनका प्रधानमंत्री के प्रति विशेष मोह था, वे नाराज होने लगे. अब जब राम मंदिर का निर्माण शुरू हो रहा है तो ऐसे लोगों की नाराजगी, कड़वाहट क्या दूर होगी. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री के कहने का उद्देश्य यह था कि धर्म आवेश की चीज नहीं है, उत्तेजना की चीज नहीं है.

धर्म में किसी प्रकार की आक्रामकता न हो. प्रधानमंत्री जी के कहने का आशय था कि आक्रामकता, आवेश, उत्तेजना अथवा उन्माद न दिखाई दे. किसी वैसे व्यक्ति में जो स्वयं को संस्कृति का सेवक कहता है, गोभक्त कहता है, राष्ट्रभक्त कहता है. प्रधानमंत्री का संकेत काफी सुंदर था लेकिन राम मंदिर के इस काल में पूरा भारत एक हो गया है, पूरी धरती राममय हो गई है.

राम भक्तों का धैर्य देखें

जय श्रीराम के नारे पर भी विवाद हुआ. ऐसे वीडियो आए जिसमें दिखा कि लोगों को मार कर जय श्रीराम बोलने को कहा गया. इस सवाल पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि एक दो छिटपुट घटनाएं हुई होंगी, कुछ सिरफिरे हर जगह हैं. ऐसा हुआ होगा लेकिन राम एक मंत्र है. राम की कोई अवमानना करे, तिरस्कार करे, उपहास करे तो राम भक्तों को इस धरती पर मान्य नहीं होगा.

लेकिन किसी से विवशता से भगवान राम का नाम बुलवाया जाए तो यह अच्छी बात नहीं है. जितनी भी संस्थाएं हैं जो अपनी संस्कृति के साथ जुड़ी हैं वे बेहद अहिंसक हैं. राम भक्तों का धैर्य भी देखना चाहिए, उनमें अदभुत संयम है. जैसे ही अयोध्या का निर्णय आया, भक्तों में कितना संयम दिखा. वो संयम आज भी देखा जा रहा है. नहीं तो कोरोना काल चल रहा है, यहां घर-घर से शिलाएं आतीं, रामभक्तों का मेला अयोध्या आता, अयोध्या की कोई सड़क खाली न मिलती. इसलिए ये हमारा संयम ही तो है, हम अहिंसक ही तो हैं.

भाषा पर नियंत्रण रखें ओवैसी

सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि हम अपनी औलादों को बताएंगे कि इन लोगों ने मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाया है. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि ऐसी कोई मस्जिद वहां नहीं थी और उनके धर्मग्रंथों में भी लिखा है कि जो झगड़े की जगह है वहां कोई न तो कोई मस्जिद बनती है और न कोई प्रार्थना स्वीकार की जाती है.

इसलिए ओवैसी जी से कहना चाहूंगा कि अपने धर्मग्रंथ पढ़ कर देखिए, वहां कोई मस्जिद है ही नहीं. जब वहां मस्जिद का अस्तित्व ही नहीं था, जब नमाज नहीं पढ़ी गई तो क्या कहा जाए. वहां शुरू से रामलला की पूजा होती आई है. अंग्रेजों के काल से वहां रामलला थे.

अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने केस में कहा कि राम की जगह राम को दी जा रही है. कोर्ट ने सरकार को कहा कि इसके लिए ट्रस्ट का निर्माण करें. इसलिए ओवैसी जी को समझना चाहिए कि वे अपने उन्माद को शांत रखें. जिस प्रकार की वे भाषा बोलते हैं, जिस प्रकार की उत्तेजना पैदा करते हैं, तो उन्हीं के समाज में बहुत से लोग उनका आदर नहीं करते हैं. उन्हें कम से कम ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, वह भी आज के हमारे उत्सव में. इसलिए वे अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें.

अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है. इस पर अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, देश में हजारों मंदिर टूटे पड़े हैं, अफगानिस्तान में बुद्ध की शांत मूर्तियां तोड़ी गईं. ऐसे में मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी ने काशी कॉरिडोर बनाया है तो अच्छा है. देखने में भी वह काफी सुंदर लग रहा है. अगर ऐसी पूजा स्थली बनती है तो स्वाभाविक रूप से हमें उनके जीर्णोद्धार के लिए तत्पर रहना चाहिए.

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