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पुलवामा का एक साल: मैनपुरी के शहीद का ये सपना रह गया अधूरा

मैनपुरी के शहीद रामवकील की पत्नी अपने मायके इटावा में रहती हैं. उनका आरोप है कि सरकार ने जो वादे किए थे, अभी तक पूरे नहीं हुए हैं.

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शहीद के परिजन
शहीद के परिजन

  • शहीद की पत्नी अपने मायके इटावा में रहती हैं
  • शहीद रामवकील का गांव मैनपुरी में है

पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में शहीद मैनपुरी के रामवकील की पत्नी अपने मायके इटावा में रहती हैं. उनका आरोप है कि सरकार ने जो वादे किए थे, अभी तक पूरे नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि शहीद के स्मारक के लिए रास्ता नहीं मिल रहा है.

पत्नी गीता देवी अपने मायके अशोक नगर इटावा में रहती हैं. शहीद रामवकील के तीन बेटे हैं. बड़ा बेटा अंकित (11) गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट कॉलेज लखनऊ में पढ़ाई कर रहा है, दूसरा बेटा अर्पित (10) सहभागी इंटर नेशनल झज्जर हरियाणा में पढ़ाई कर रहा है. सबसे छोटा बेटा अंश (6) अपनी मां के पास रहकर देहली पब्लिक स्कूल इटावा में पढ़ाई कर रहा है.

शहीद की पत्नी गीता इटावा विकास भवन में ग्राम विकास में बाबू के पद पर रहकर डिस्पेच का काम करती हैं. गीता अपने पिता दिवारीलाल, मां कुसमा देवी भाई विपिन कुमार रिंकू के साथ रहती हैं. गीता के पिता पुलिस विभाग कानपुर में तैनात हैं.

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शहीद रामवकील का गांव मैनपुरी में है. उनका अंतिम संस्कार विनायकपुर गांव में किया गया लेकिन आज भी शहीद के स्मारक तक जाने के लिए सड़क नहीं बनी है. शहीद के स्मारक तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है.

रामवकील का एक सपना था मकान का, जो आज भी अधूरा है. वे शहीद होने से पहले मकान बनवाने की योजना बना रहे थे. इसके बाद सरकार ने मकान देने का वायदा किया लेकिन आज भी वह सपना अधूरा ही है.

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