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पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल की बेटी की कोरोना से मौत, छोटी बेटी का आरोप- अस्पताल में मिन्नतें कीं, तब बॉडी दिखाई

26 अप्रैल को पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा की पत्नी मनोरमा मिश्रा (76) की मौत गुरूधाम इलाके में स्थित एक निजी अस्पताल में कोरोना से हो गई. फिर 1 मई को उनकी बड़ी बेटी संगीता की मौत मैदागिन इलाके में स्थित कोविड अस्पताल में हो गई.

बेटी का आरोप है कि अस्पताल ने बड़ी मिन्नत के बाद डेड बॉडी दिखाई. बेटी का आरोप है कि अस्पताल ने बड़ी मिन्नत के बाद डेड बॉडी दिखाई.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पं. छन्नूलाल की बड़ी बेटी की कोरोना से मौत
  • छोटी बेटी का आरोप, अस्पताल ने लाखों रुपए लिए

देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर भी बढ़ती जा रही है. मरीजों की मौत की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में निजी अस्पतालों पर लापरवाही और धन उगाही के आरोप भी लग रहे हैं. ऐसा ही एक मामला यूपी के वाराणसी से आया, जहां पद्मविभूषण शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल की बेटी की कोरोना से मौत होने के बाद परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है. बीते दिनों ही पंडित छन्नूलाल की पत्नी की कोरोना से मौत हो गई तो पिछले हफ्ते एक निजी अस्पताल में उनकी बेटी की भी कोरोना से मौत हो गई. ऐसे में पंडित छन्नूलाल की दूसरी बेटी ने उसी निजी अस्पताल पर पहुंचकर जमकर हंगामा काटा और अस्पताल पर लापरवाही और धन उगाही का आरोप लगाया.

2014 के लोकसभा चुनाव में जब पीएम मोदी ने वाराणसी से पर्चा भरा था तो पंडित छन्नूलाल मिश्रा उनके प्रस्तावक थे. 

दरअसल, 26 अप्रैल को पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा की पत्नी मनोरमा मिश्रा (76) की मौत गुरुधाम इलाके में स्थित एक निजी अस्पताल में कोरोना से हो गई. फिर 1 मई को उनकी बड़ी बेटी संगीता की मौत मैदागिन इलाके में स्थित कोविड अस्पताल में हो गई. मौत के दो दिन बाद भी जब अस्पताल की ओर से संगीता की जांच की पूरी डिटेल्स और मरीज की सीसीटीवी फुटेज नहीं मिली, तो पंडित छन्नूलाल की छोटी नम्रता ने अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा काटा. नम्रता ने अस्पताल पर लापरवाही और धन उगाही का भी आरोप लगाया. 

घंटों चले हाई वोल्टेज ड्रामे के दौरान पुलिस भी अस्पताल पर पहुंच गई और काफी समझाने के बाद हंगामा कर रहे परिजनों को समझाया और लिखित शिकायत मांगी. जिसके बाद नम्रता की ओर कोतवाली थाने में मेडविन अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई.

अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए नम्रता ने बताया कि 24 अप्रैल को उनकी बहन संगीता मिश्रा को उल्टी और बुखार की शिकायत पर मैदागिन इलाके के मेडविन अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसके लिए 1.5 लाख रुपए का बिल भी दिया गया. बाद में उनकी कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई. जिस पर अस्पताल में भर्ती संगीता के सीसीटीवी फुटेज को दिखाने का वादा भी किया गया था और बताया गया था कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और उन्हें सात्विक भोजन और काढ़ा भी दिया जा रहा है. इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने कई लाख रुपये इलाज के नाम पर लिए. लेकिन हर डॉक्टर अलग-अलग बातें करता रहता.

उन्होंने बताया कि 29 अप्रैल को अस्पताल ने फोन कर बताया कि मरीज की हालत नाजुक है और अस्पताल आने पर उनकी मौत की खबर बताई गई. फिर बड़ी मिन्नत के बाद ICU में उनकी डेड बॉडी दिखाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार कहने के बावजूद एडमिशन के वक्त का सीसीटीवी नहीं दिखाया गया और जांच का ब्योरा भी नहीं दिया गया. इसलिए अब सीसीटीवी फुटेज और जांच का पूरा ब्योरा चाहिए. जिसके लिए उन्होंने थाने आकर लिखित शिकायत की है. उनका कहना है कि वो कोर्ट की भी मदद लेंगी, क्योंकि उनकी बहन की मौत नहीं हत्या हुई है.

वहीं, इस पूरे मामले की जांच के लिए डीएम ने तीन सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया है. तीन सीनियर डॉक्टरों की टीम इस पूरे मामले की जांच करेगी.

वाराणसी में सोमवार को बीते 24 घंटों में कोरोना के 992 नए मामले सामने आए और 17 मौतें हुईं. अब तक यहां 599 लोगों की मौत हो चुकी है. यहां एक्टिव केस भी बढ़कर 15,494 हो गए हैं.

 

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